आज पूरे देश में केंद्र व राज्य की सरकारें वरिष्ठ नागरिकों को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं मुहैया करवाने की कोशिश कर रही हैं। रेलवे भी वरिष्ठ नागरिकों को अपने यहाँ यात्रा करने पर पुरुषों को ४0 प्रतिशत व महिलाओं को ५0 प्रतिशत की छूट देती है। पर यह छूट तत्काल टिकट पर न जाने क्यों नहीं लागू होती। हर गाड़ी में लगभग ३0 प्रतिशत टिकट तत्काल के लिए आरक्षित होती है। इन ३0 प्रतिशत टिकटों पर वरिष्ठ नागरिकों का हक़ नहीं होता। न जाने क्या सोच कर रेलवे वरिष्ठ नागरिकों को इस सुविधा से वंचित रख रही है, जबकि दुनियादारी, दुःख-सुख में वरिष्ठ नागरिक को ही सबसे ज्यादा आना-जाना पड़ता है। आशा है सरकार जल्द इस सुविधा के लिए अपने कानून में बदलाव लाएगी। यह छूट न केवल किराये-भाड़े पर अपितु तत्काल के लिए लगाने वाले सरचार्ज पर भी लागू होना चाहिए।
अधिकतर देखा जाता है कि सीनियर सिटिज़न चाहे रूटीन में टिकट अरक्षित करवाए अथवा तत्काल में उसे अपर बर्थ ही अलाट होता है। इसका कारण रेलवे बताती है कि नीचे की टिकट पहले आया पहले पाया के आधार पर अलाट कर दी जाती है। रेल यात्रा के दौरान पाया जाता है कि नीचे के बर्थ पर नौजवान यात्री यात्रा कर रहे होते हैं, जबकि वे ऊपर के बर्थ पर आसानी से यात्रा कर सकते हैं। वे अनुरोध करने पर बाद में सीनियर सिटिज़न से बर्थ बदलना भी नहीं चाहते। ऐसे मौकों पर मौजूदा टीसी भी हेल्पलेस हो जाता है। सीनियर सिटिज़न द्वारा ऊपर के बर्थ पर चढ़ने-उतरने में साँस फूल जाती है व कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है तथा उसकी जवाबदारी रेलवे पर आ सकती है। इसलिए रेलवे को नीचे की सभी स्लीपर सीनियर सिटिज़न के लिए आरक्षित रखनी चाहिए। इसके लिए रेलवे को अपने कम्प्यूटर सर्वर में हल्का सा फेर बदल करना पड़ेगा। सीनियर सिटिज़न द्वारा कम्प्यूटर में तत्काल टिकट बुक करते समय हड़बड़ी में कुछ गलती भी हो जाती है। जैसे गाड़ी या दिन की। जब वो भूल सुधर करना चाहता है उसका पैसा कटता है। हमारी मांग है कि सीनियर सिटिज़न का तत्काल टिकट यदि एक घंटे में कैंसल करावा दे तो उसे कोई चार्ज नहीं लगना चाहिए व पूरा पैसा वापस मिलना चाहिए।
अशोक भाटिया
महामंत्री, वसई रोड यात्री संघ


