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क्‍या सचमुच सोनिया पूर्वोत्‍तर क्षेत्र के विकास के प्रति गंभीर हैं?

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने अपने असम के दौरे के दौरान दावा किया है कि केंद्र की यूपीए और असम की कांग्रेसी सरकार की कोशिश से उस इलाके में आतंकवाद कमज़ोर पड़ा है. बातचीत के ज़रिये समस्या को हल करने की नीति की उन्होंने तारीफ़ की और कहा कि यूपीए और कांग्रेस की इसी नीति के कारण कई आतंकवादी सगठनों ने आतंकवाद को तिलांजलि देने का फैसला किया है. उन्होंने भरोसा जताया कि आतंकवादी संगठनों के लोगों को विश्वास हो जाएगा कि आतंक का रास्ता सही नहीं है. वे आगे आयेंगे और शान्ति की प्रक्रिया में शामिल हो जायेंगे. सोनिया गाँधी असम की कांग्रेसी सरकार के एक साल पूरा होने की खुशी में आयोजित एक सभा में भाषण कर रही थीं. दिल्ली में भी कांग्रेसी मीडिया विभाग अपनी अध्यक्ष की सफल असम यात्रा की तारीफ़ करते नहीं अघा रहा है. उनके साहस को ख़ास तौर से बताया जा रहा है कि बम विस्फोट के बाद भी उन्होंने अपने कार्यक्रम में कोई परिवर्तन नहीं किया.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने अपने असम के दौरे के दौरान दावा किया है कि केंद्र की यूपीए और असम की कांग्रेसी सरकार की कोशिश से उस इलाके में आतंकवाद कमज़ोर पड़ा है. बातचीत के ज़रिये समस्या को हल करने की नीति की उन्होंने तारीफ़ की और कहा कि यूपीए और कांग्रेस की इसी नीति के कारण कई आतंकवादी सगठनों ने आतंकवाद को तिलांजलि देने का फैसला किया है. उन्होंने भरोसा जताया कि आतंकवादी संगठनों के लोगों को विश्वास हो जाएगा कि आतंक का रास्ता सही नहीं है. वे आगे आयेंगे और शान्ति की प्रक्रिया में शामिल हो जायेंगे. सोनिया गाँधी असम की कांग्रेसी सरकार के एक साल पूरा होने की खुशी में आयोजित एक सभा में भाषण कर रही थीं. दिल्ली में भी कांग्रेसी मीडिया विभाग अपनी अध्यक्ष की सफल असम यात्रा की तारीफ़ करते नहीं अघा रहा है. उनके साहस को ख़ास तौर से बताया जा रहा है कि बम विस्फोट के बाद भी उन्होंने अपने कार्यक्रम में कोई परिवर्तन नहीं किया.

सोनिया गांधी का यह दावा सही नहीं है कि यूपीए की केंद्र सरकार भी उत्तर पूर्वी भारत में आतंकवाद को ख़त्म करने की कोशिश कर रही है. जब से पूर्वोत्तर भारत में आतंकवादी गतिविधियाँ शुरू हुई हैं, हर मंच पर सरकार और राजनीतिक पार्टियों ने दावा किया है कि अगर उस इलाके का सही विकास किया गया होता तो आतंकवादियों को मौक़ा ही न मिलता कि वे उस इलाके के नाराज़ लोगों को साथ ले सकें. पूर्वोतर भारत के विकास के लिए बहुत सारी योजनायें चलायी गयीं लेकिन केंद्र सरकार की गैरजिम्मेदारी का नतीजा है कि कोई भी योजना सही तरीके से लागू नहीं की गयी. यह भी तर्क बार बार दिया गया है कि आतंकवाद को ख़त्म करने के लिए विकास की योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाना चाहिए.

सच्चाई यह है कि केंद्र सरकार पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के लिए गंभीर ही नहीं है. संसद के बजट सत्र में पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास मंत्रालय के काम काज के बारे में संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट आई है, जिसमें साफ़ लिखा है कि क्षेत्र के विकास के लिए प्रकृति ने बहुत सारी सम्पदा उपलब्ध कराई है लेकिन सरकार उनका सही इस्तेमाल नहीं कर पा रही है. पूर्वोत्तर भारत के इलाकों पानी से पैदा होने वाली बिजली के सबसे बड़े स्रोत हैं. उसके लिए केंद्र सरकार ने बहुत सारी योजनायें भी बनायी हैं लेकिन केंद्र सरकार के अधिकारी इस इलाके की योजनाओं के  सन्दर्भ में पूरी तरह से लापरवाह हैं. और क्षमता का सही विकास नहीं किया जा रहा है. जिन योजनाओं को पूरा किया जाना है, मार्च २०१२ तक उनकी क्षमता का ९३ प्रतिशत पूरी तरह से अनछुआ था. यह रिपोर्ट मई में संसद में रखी गयी थी.

अपने देश में संसद की स्थायी समितियां संसदीय लोकतंत्र की बहुत ही ताक़तवर संस्थाएं हैं. लेकिन केंद्र सरकार के अफसर गृह मंत्रालय के काम काज के लिए बनी हुई संसद की स्थायी समिति केंद्र सरकार के अफसर गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. इसी कमेटी के एक सदस्य ने कहा कि अगर यूपीए की अध्यक्ष पूर्वोत्तर भारत की समस्याओं को वास्तव में हल करने का माहौल  बनाना चाहती हैं तो उन्हें चाहिए कि अपनी सरकार के मंत्रियों से कहें कि वे केंद्र सरकार के अफसरों को संसदीय समितियों को सम्मान देने का का तरीका सिखाएं.

कमेटी की रिपोर्ट में लिखा है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के लिए २०१२-१३ के लिए अनुदान की मांग को लेकर जब चर्चा हो रही थी केंद्र सरकार के अफसरों ने सरकार की बात रखने के लिए उपयुक्त और ज़िम्मेदार अफसर तक नहीं भेजा. ११ अप्रैल २०१२ की  बैठक को रद्द करना पड़ा क्योंकि कुछ मंत्रालयों और विभागों ने अपने अफसर ही नहीं भेजे, जबकि कुछ अन्य विभागों ने बहुत ही जूनियर अफसरों को भेज दिया जो सही जवाब नहीं दे सके. बैठक में जो अफसर हाज़िर भी हुए वे बिना किसी तैयारी के आये थे. कमेटी ने इस बात का बहुत बुरा माना और जब रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखी गयी तो इस बात को रिपोर्ट की प्रस्तावना में ही लिख दिया. कमेटी के अध्यक्ष ने कैबिनेट सेक्रेटरी को चिट्ठी लख कर उनसे कहा कि केंद्र सरकार के इस गैरजिम्मेदार रवैये को ठीक करने के लिए उपाय करें. कमेटी ने चेतावनी दी है कि इस तरह की स्थिति दुबारा नहीं पैदा होनी चाहिए. इस कमेटी के अध्यक्ष राज्य सभा के सदस्य वेंकैया नायडू हैं जबकि इसके सदस्यों में लाल कृष्ण आडवाणी, बाबू लाल मरांडी, नीरज शेखर, जनार्दन रेड्डी, डी राजा और तारिक अनवर आदि महत्वपूर्ण नेता शामिल हैं. ज़ाहिर है कि पूर्वोत्तर के विकास को अपनी प्राथमिकता बताने वाली यूपीए को केंद्र सरकार के अफसरों पर भी ध्यान देना चाहिए.

लेखक शेष नारायण सिंह वरिष्‍ठ पत्रकार तथा स्‍तम्‍भकार हैं. वे एनडीटीवी, जागरण, जनसंदेश टाइम्‍स समेत कई संस्‍थानों में वरिष्‍ठ पदों पर रह चुके हैं. इन दिनों दैनिक देश बंधु को वरिष्‍ठ पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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