इस खबर से उत्तराखंड के हर शुभचिन्तक को बेहद दुःख होगा कि किस प्रकार खंडूड़ी और निशंक की कुर्सी की लड़ाई में एक ऐसी योजना की भ्रूण हत्या हो गयी, जिसमें उत्तराखंड में हजारों नहीं बल्कि लाखों लोगों को रोजगार देने की क्षमता थी. मेरी अनवरत पहल पर गत वर्ष से तत्कालीन मुख्यमंत्री निशंक ने चार धाम यात्रा को साल भर जारी रखने की घोषणा के साथ-साथ इसका शुभारंभ भी किया था. उत्तराखंड सरकार की ओर से घोषणा की गयी थी कि मां यमुन, गंगा, भगवान बद्रीनाथ व केदार नाथ के दर्शन अब उनके शीतकालीन आवासों में भी हो सकेंगे. इस घोषणा से राज्य के धार्मिक पर्यटन से जुड़े उन लाखों लोगों की बांछे खिल गयी थी. जो तीन माह के यात्रा सीजन के बाद सालभर मक्खियाँ मारने पर मजबूर रहते हैं.
इस योजना का स्थानीय लोगों, पंडा समुदाय, होटल व्यवसायों तथा परिवहन व्यवसाय से जुड़े लाखों लोगों ने भरपूर स्वागत किया. योजना की शुरुआत बड़े ही खुशनुमा माहौल में हुयी. राज्य का पर्यटन व संस्कृति विभाग भी योजना के उत्साहजनक सपने बुनने लगा. निशंक का राज बदला तो उनकी यह योजना भी लापता हो गयी. एक अधिकारी से जब इस योजना के बारे में पूछा गया तो… .उसका कहना था कि यह योजना बेहद लाभदायक थी पर निशंक की योजना की खंडूड़ी के सामने पैरवी करने की हिम्मत भला कौन करेगा… इसलिए योजना को ठन्डे बस्ते में रहने देने में ही सबने भलाई समझी. निशंक के समय में इस योजना की मुक्त कंठ से तारीफ़ करने वाले सचिव-पर्यटन की भी जाने क्यों बोलती बंद हो गयी…?
यह सुन कर मेरे पत्रकार मन को बेहद दुःख पहुंचा कि किस प्रकार राज्य की एक रोजगार परक योजना दम तोड़ गयी. लोग निशंक भ्रष्ट व खंडूड़ी है जरूरी….जैसे जुमलों में खो गए. लोगों को विकास के उजाले की राह न मिली तो लोगों ने चुनाव में अपने-अपने जाति के हाथ थाम लिए तो भीषण ठण्ड के चुनावी मौसम में बोतल व मुर्गों ने भी अपना खूब रंग दिखाया. यदि सरकार में बैठे लोग जन कल्याणकारी योजनाओं को ठन्डे बस्ते में डालेगे तो चुनाव में लोगों को लुभाने के लिए भ्रष्ट तरीके तो अपनाने ही पड़ेंगे.
विजेंद्र रावत उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार हैं.


