नैनीताल। शराब व्यापारी पोंटी चड्ढा की हत्या के फौरन बाद उत्तराखंड की नौकरशाही चेत गई है। अब अफसरानों को कायदे-कानून याद आने लगे हैं। पोंटी चड्ढा की हत्या के एक हफ्ते बाद बागेश्वर के जिला प्रशासन ने पोंटी चड्ढा के बागेश्वर स्थित खडि़या खानों में सालों से कायदे-कानूनों को अगूंठा दिखा बगैर इजाजत चल रही ट्राली को सीज कर दिया है। साथ में करीब डेढ़ सौ बोरी खड़िया भी सीज कर दी है। अब बागेश्वर का जिला प्रशासन जिले में चल रही सभी खड़िया खदानों की जाँच करने की बात कह रहा है। कुमांऊँ का बागेश्वर जिला खड़िया व्यापारियों की जन्नत है। जिले का ज्यादातर हिस्सा पिछले लम्बे अरसे से खड़िया व्यापारियों के हवाले है। उनकी रहमो-करम पर है।
जिले में करीब उनचालीस हजार नाली यानि 783.4 हेक्टेयर जमीन में 59 माइनिंग लीज और करीब छत्तीस सौ नाली यानि 72.6 हेक्टेयर जमीन में 13 प्रोस्पेटिंग लीज पर खड़िया खानें चल रही हैं। माइनिंग लीज बीस साल के लिए होती है। जबकि प्रोस्पेटिंग लीज की मियाद एक साल होती है। ज्यादातर खड़िया खदानें विभिन्न सियासी पार्टियों से जुड़े रसूकदार लोगों के पास हैं। खदान मालिकों के लिए खड़िया सफ़ेद सोना साबित हुआ है। खड़िया ने कितनों के स्याह चेहरे सफ़ेद और चमकदार बना दिए है। पहाड़ के बेहद नाजुक पारितंत्र और पर्यावरण की कीमत पर सैकड़ों लोग करोड़पति बन गए हैं। तो भला इस खेल में पोंटी चड्ढा क्यों पीछे रहते।
अलग उत्तराखंड बनने से पहले संयुक्त उत्तर प्रदेश के ज़माने में पोंटी चड्ढा ने भी यहाँ के वाशिंदों की नियमानुसार अनापत्ति के बगैर बागेश्वर में दो माइनिंग लीजें मंजूर करा लीं थीं। बताते हैं कि इसके अलावा चड्ढा ग्रुप के पास चार खड़िया खानें प्रोस्पेटिंग लीज पर भी हैं। यहाँ की खड़िया खदानों पर खड़िया खुदान में जेसीबी मशीनों का बेजा इस्तेमाल, सार्वजनिक, सरकारी और जंगलात की जमीन से अवैध खड़िया खुदान, बरसात से पहले खनन बंद होने पर गड्ढ़ों को ठीक से नहीं भरे जाने और दूसरी तमाम गड़बड़ियों के आरोप बराबर लगते रहे हैं। मामला रसूखदार लोगों से जुड़ा होने के चलते प्रशासन ज्यादा ध्यान देने की जरूरत महसूस नहीं करता है। बर्दाश्त से बाहर होने पर बात जुर्माने तक ही जाती है। खदान मालिक जुर्माना भर देते हैं। कायदे-कानूनों का उल्लंघन बदस्तूर जारी रहता है। बताते हैं कि मानकों के उल्लंघन के चलते पिछले साल प्रशासन ने तमाम खड़िया खदानों से तकरीबन एक करोड़ रुपया बतौर जुर्माना वसूला। पर नियमों की अनदेखी जारी रही।
अब पोंटी चड्ढा की मौत के फौरन बाद प्रशासन एकाएक फिर हरकत में आ गया है। प्रशासन ने चड्ढा की खदान में चल रही ट्राली को सीज कर दिया है। साथ
में कुछ खड़िया भी। यह ट्राली चड्ढा की खान में माइनिंग क्षेत्र से बाहर जंगलात और सार्वजनिक जमीन में बगैर इजाजत कई सालों से बरोकटोक चल रही थी। बागेश्वर के जिला मजिस्ट्रेट डा. पी षणमुगम के मुताबिक जिले में 783.4 हेक्टेयर जमीन में 59 माइनिंग लीज और 72.6 हेक्टेयर जमीन में 13 प्रोस्पेटिंग लीजें चल रहीं हैं। उन्होंने सभी खड़िया खानों की गहन और निष्पक्ष जाँच के ऑर्डर दिए हैं। बकौल जिलाधिकारी जाँच के दौरान जिस खदान में भी गड़बड़ियाँ पकड़ी जायेंगी, उनके खिलाफ नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। डीएम डा. पी षणमुगम ने कहा है कि अब नियमों की अनदेखी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
लेखक प्रयाग पाण्डे उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार हैं तथा नैनीताल के रहने वाले हैं.


