टेलीविजन धारावाहिकों का कुप्रभाव वैसे हर आदमी के उपर पड़ता है लेकिन सबसे ज्यादा असर होता है स्कूली बच्चों पर। कभी शक्तिमान जैसे लोकप्रिय धारावाहिक का कुप्रभाव स्कूली बच्चों पर इस कदर पड़ा था कि देश भर मे बड़ी तादात मे स्कूली बच्चे नकल करने के चक्कर मे हताहत हुये थे। इस बार ऐसा ही कुप्रभाव पड़ा हुआ है कर्लस चैनल पर प्रसारित हो रहे रियलटी शो खतरों के खिलाड़ी से। इस शो के कुप्रभाव के चलते हाईस्कूल के एक स्कूली छात्र की मौत हो गई। कहा जा रहा है कि रियलटी शो का स्टंट करने के चक्कर मे छात्र की जान चली गई।
यह वाक्या हुआ है उत्तर प्रदेश के इटावा शहर के कोतवाली इलाके के पुरबियाटोला में। जहां पर शहर के प्रमुख इस्लामिया इंटर कालेज के हाईस्कूल के 14 साल के छात्र धर्मेंद्र कुमार ने रियलिटी शो खतरों के खिलाड़ी के स्टंट करते समय अपनी जान गंवा दी। जिस रियलिटी शो का स्टंट करते हुये छात्र धर्मेंद्र की मौत हुई है उसको मशहूर एक्शन अभिनेता अक्षय कुमार प्रस्तुत करते है। मरने वाले स्कूली छात्र के पिता संजीव कुमार का आरोप है कि उनके बेटे के उपर खतरों के खिलाड़ी शो के स्टंट का इस कदर असर हुआ कि वो घर में अकेले में यह सब करता था, इसी के चलते उसकी मौत हो गई।
असल में हुआ यूं कि हाथ-पैर में चोट लगने के दौराना क्रेप बैंडेज का इस्तेमाल किया जाता है, उसी से धर्मेंद्र ने घर के उपर छत पर फांसी लगाने का स्टंट किया जिस में उसकी हकीकत में जान चली गई। इतना ही नहीं उसके छोटे भाई रोहित कुमार को खतरों के खिलाड़ी का वो शो ज्यादा पंसद है जिस में कुछ जानवरों के साथ लड़की को रखा जाता है, हालांकि वह अपने भाई की मौत के बाद डरा हुआ है और अब कोई भी स्टंट करने के लिये किसी भी सूरत में तैयार नहीं है।
शहर के प्रमुख मनोचिकित्सक डा.नागेंद्र पुरवार का कहना है कि अमूमन देखा जाता है कि मासूम बच्चों और स्कूली छात्रों पर सिनेमा और टेलीविजन
नाटकों का व्यापक असर होता है, जैसा वे देखते हैं वैसा ही करने का उनके मन मे भाव पैदा हो जाता है। इस दौरान वे यह सोच पाने की दशा में किसी भी सूरत में नहीं होते हैं कि आखिरकार इसका असर क्या होगा। मनोचिकित्सक कहते हैं कि एक समय शक्तिमान जैसे धारावाहिकों का कुप्रभाव आम इंसान देख चुका है आम तौर पर देखा गया है कि मासूम बच्चों के उपर जल्दी ही प्रभाव होता है। बच्चे हमेशा यह सब इसलिये कर बैठते हैं कि उनको अपने भले बुरे का ज्ञान नही होता है। मनोचिकित्सक का कहना है कि टेलीविजन या फिर सिनेमा का असर मासूम बच्चों पर बहुत तेजी से पड़ता है ऐसे में जिज्ञासावश वो सब करने के चक्कर में रहते हैं जिनसे उनको नुकसान हो सकता है।
पूरे मामले को लेकर फिलहाल पुलिस का इतना ही कहना है कि उसकी मौत के बाद उसके शव को परीक्षण के लिये भेज दिया गया है, लेकिन मौत के कारणों को लेकर अभी कोई पड़ताल नहीं की गई है। इटावा के पुलिस उपाधीक्षक एम.पी.सलोनिया का कहना है कि जिस लड़के के मरने की खबर मिली है, उसी आधार पर पुलिस को मौके पर भेज कर के परीक्षण करवा दिया गया है, लेकिन मासूम की मौत के पीछे क्या कारण हो सकते हैं इसका उसके परिजनों ने फिलहाल कोई ज्रिक नहीं किया है।
हमेशा देखा गया है कि जब कोई भी इस तरह का रियलिटी शो का प्रसारण किसी भी चैनल पर किया जाता है तो इसी के साथ शो में खतरनाक करतबों को करने से रोकने के लिये आम दर्शकों के लिये एक कड़ी चेतावनी भी प्रसारित की जाती है, लेकिन इस तरह के हादसे जरूर बयान करने के लिये काफी समझे जा सकते हैं कि बच्चों पर सही ढंग से निगरानी नहीं रखी जाती है, इसी वजह से बच्चे टेलीविजन पर प्रसारित नाटकों को अपनी जिदंगी का हिस्सा बना लेते हैं और अनजाने मे मौत के मुंह में समा जाते हैं।
इटावा से दिनेश शाक्य की रिपोर्ट.


