Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

ये दुनिया

गंगा पर संतों की नीयत पर उठे सवाल का जवाब नहीं दे पाए गोविंदाचार्य

अविरल गंगा व निर्मल गंगा पर देशभर के प्रतिष्ठित संतों के संगठन ..गंगा महासभा.. द्वारा प्रेस क्लब आफ इंडिया में आयोजित एक संवाददाता सम्मलेन में सभी पदाधिकारियों सहित संगठन के मार्गदर्शक के.एन. गोविन्दाचार्य भी निरुत्तर हो गये जब मैंने पूछा कि गंगा के मैली होने की शुरुआत धर्म नगरी ऋषिकेश व हरिद्वार से होती है और इसमे सबसे ज्यादा योगदान यहाँ के 5 स्टार ब्रांड धार्मिक आश्रमों का है, जिनका सारा सीवर व कचरा सीधे गंगा में जा रहा है? क्या ये अरबपति बने आश्रम अपने ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगा सकते? जिन्होंने गंगा के नाम पर अकूत सम्पति इकठ्ठी कर ली है? भागीरथी में बन रहे विद्युत परियोजनाएं तो संतों ने बंद करवा दी पर उत्तरकाशी से लेकर गंगोत्री तक के सौ कि.मी. के क्षेत्र में बने करीब 89 धार्मिक आश्रमों के किसी के भी अपने ट्रीटमेंट प्लांट नहीं है और उनकी गन्दगी सीधे भागीरथी में जा रही है…. क्या संतों को सबसे पहले अपने घर में गंगा की सफाई के लिए काम नहीं करना चाहिए?

अविरल गंगा व निर्मल गंगा पर देशभर के प्रतिष्ठित संतों के संगठन ..गंगा महासभा.. द्वारा प्रेस क्लब आफ इंडिया में आयोजित एक संवाददाता सम्मलेन में सभी पदाधिकारियों सहित संगठन के मार्गदर्शक के.एन. गोविन्दाचार्य भी निरुत्तर हो गये जब मैंने पूछा कि गंगा के मैली होने की शुरुआत धर्म नगरी ऋषिकेश व हरिद्वार से होती है और इसमे सबसे ज्यादा योगदान यहाँ के 5 स्टार ब्रांड धार्मिक आश्रमों का है, जिनका सारा सीवर व कचरा सीधे गंगा में जा रहा है? क्या ये अरबपति बने आश्रम अपने ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगा सकते? जिन्होंने गंगा के नाम पर अकूत सम्पति इकठ्ठी कर ली है? भागीरथी में बन रहे विद्युत परियोजनाएं तो संतों ने बंद करवा दी पर उत्तरकाशी से लेकर गंगोत्री तक के सौ कि.मी. के क्षेत्र में बने करीब 89 धार्मिक आश्रमों के किसी के भी अपने ट्रीटमेंट प्लांट नहीं है और उनकी गन्दगी सीधे भागीरथी में जा रही है…. क्या संतों को सबसे पहले अपने घर में गंगा की सफाई के लिए काम नहीं करना चाहिए?

इस सवाल के जवाब में गंगा महासभा के महामंत्री आचार्य जीतेंद्र (काशी) जवाब देने का प्रयास करने लगे पर गोविदाचार्य ने बीच में ही टोकते हुए जीतेंद्र से कहा कि उनके सवाल के जवाब ये नहीं है? पर फिर गोविन्दाचार्य भी इस सवाल के जवाब में कुछ नहीं बोल सके और प्रेस वार्ता समाप्त हो गयी…. आचार्य जितेन्द्र ने एक आरोप जरूर लगाया कि उत्तराखंड में बांधों के समर्थन के पीछे अंतरराष्ट्रीय धन है, जो 35 ब्लैक लिस्टेड एनजीओ के माध्यम से उत्तराखंड में आ रहा है. इसका सीधा मतलब है कि इन्होंने बाँध समर्थक मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को निशाने पर लेने का भी प्रयास किया है….!

लेखक विजेंद्र रावत वरिष्‍ठ पत्रकार हैं.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs

You May Also Like

ये दुनिया

रामकृष्ण परमहंस को मरने के पहले गले का कैंसर हो गया। तो बड़ा कष्ट था। और बड़ा कष्ट था भोजन करने में, पानी भी...

सोशल मीडिया

यहां लड़की पैदा होने पर बजती है थाली. गर्भ में मारे जाते हैं लड़के. राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्र में बाड़मेर के समदड़ी क्षेत्र...

दुख-सुख

: बस में अश्लीलता के लाइव टेलीकास्ट को एन्जॉय कर रहे यात्रियों को यूं नसीहत दी उस पीड़ित लड़की ने : Sanjna Gupta :...

ये दुनिया

बुद्ध ने कहा है, कि न कोई परमात्मा है, न कोई आकाश में बैठा हुआ नियंता है। तो साधक क्या करें? तो बुद्ध ने...