मुंबई। सुप्रसिद्ध गजल गायक और गजल के बादशाह कहे जानेवाले जगजीत सिंह के लिए सोमवार की सुबह जिंदगी की आखिरी सुबह साबित हुई। पिछले 18 दिनों से मुंबई के लीलावती अस्पताल में जीवन-मौत से संर्घष कर रहे जगजीत सिंह ने आज सुबह 8 बजे आखिरी सांस ली। 70 वर्षीय गजल सम्राट को एक कार्यक्रम के दौरान ब्रेन हैमरेज होने के बाद 23 सितम्बर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी सर्जरी की गई, इसके बाद से ही उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी।
खालिस उर्दू जानने वालों की मिल्कियत समझी जाने वाली गजलों को आम आदमी तक पहुंचाने का काफी कुछ श्रेय जगजीत सिंह का है। उनकी गजलों ने न सिर्फ उर्दू के कम जानकारों के बीच शेरो-शायरी की समझ में इजाफा किया बल्कि गालिब, मीर, मजाज, जोश और फिराक जैसे शायरों से भी उनका परिचय भी कराया। हिन्दुस्तान और पाकिस्तान और पूरे उपमहाद्वीप के गजल गायकों में जगजीत सिंह का नाम बहुत ही सम्मान से लिया जाता है। अब तक वे 50 से ज्यादा अलबम निकाल चुके हैं। हिन्दी के अलावा पंजाबी, बांग्ला, उर्दू, गुजराती, सिंधी और नेपाली में भी उन्होंने कई गीत-गजल गाए हैं।
8 फरवरी 1941 को राजस्थान के श्रीगंगानगर में पैदा हुए जगजीत सिंह अपने पीछे एक सुरीला संसार छोड़ गए हैं। जगजीत सिंह के पिता अमर सिंह धमानी भारत सरकार के कर्मचारी थे तथा इनका परिवार मूलत: पंजाब के रोपड़ जिले के दल्ला गांव का रहने वाला था। जगजीत के बचपन का नाम जगमोहन था, जो बाद में पारिवारिक ज्योतिष की सलाह पर बदल कर जगजीत कर दिया गया। इनकी शुरुआत शिक्षा श्रीगंगानगर के खालसा स्कूल में हुई। बाद की शिक्षा जालंधर और कुरुक्षेत्र से हुई। 2003 में भारत सरकार ने कला में खास योगदान के लिए जगजीत सिंह को पद्म भूषण से सम्मानित किया।


