बाराबंकी। युवा सीएम अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। प्रदेश में सपा सरकार बनी। इसकी मुबारकबाद। लेकिन बदले निजाम में के बीच यहां यह कसक जरूर रह गयी कि अति विश्वास के बाद भी सपा को जिले में नम्बर एक की स्थिति में ले जाने वाले अरविन्द सिंह गोप को मंत्रिमण्डल में कैबिनेट मंत्री का दर्जा न हासिल हो सका। जहां इससे स्वयं सपाई भी बेचैन है वहीं जनपदवासी भी सपा नेतृत्व के फैसले से हैरान रह गये हैं। आखिरकार उप्र में सपा की सरकार का आज विधिवत गठन हो गया। पूर्ण बहुमत व ऐतिहासिक सफलता से लबरेज सपा परिवार ने आज के यादगार क्षण को अपनी यादों में सजो लिया। बाराबंकी को एक नहीं तीन-तीन लाल बत्तियां भी मिली। बाराबंकी की पचास फीसदी सफलता को सपा नेतृत्व ने पूरे सम्मान के साथ आत्मसात किया। लेकिन जहां तक बात की जाये हक की तो बाराबंकी को इस मामले में वह अधिकार नहीं मिला जिसका वह हकदार था।
चुनाव से पूर्व यहां समाजवादी पार्टी को केन्द्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा, बसपा सरकार के राज्यमंत्री संग्राम सिंह वर्मा व भाजपा तथा अन्य विरोधी दलों ने सीधे निशाना बना रखा था। यहां छोटे लाल यादव, रामवीर सिंह, मोहम्मद निजाम जैसे कई सपाई दिग्गज पार्टी को छोड़ चुके थे। ऐसे में दल को सफलता की ओर ले जाने की जिम्मेदारी पूर्व मंत्री हैदरगढ़ के विधायक अरविन्द सिंह गोप के कंधो पर थी। सभी विरोधियों ने गोप को घेरने के लिए सब कुछ किया जो चुनावी जंग में विरोधी जांबाज करते हैं। लेकिन संगठन व नेता जी को सब कुछ मानने वाले इस नेता ने हिम्मत नहीं छोड़ी और चुनाव में अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया। जिले की सभी सीटों पर सपा का परचम लहरा गया।
स्वयं सपाइयों के ही मुताबिक पार्टी को जिले में जो सफलता मिली है उसमें गोप के योगदान को कतई नकारा नहीं जा सकता। तमाम हमलों के बावजूद भी गोप ने कार्यकर्ताओं का उत्साह कभी कम नहीं होने दिया। ऐसे में जब सपा पूर्ण बहुमत में आयी और सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया तो स्थानीय सपा कार्यकर्ताओं के अलावा जनपदवासियों को यह विश्वास था कि गोप को उनके संघर्ष का इनाम सपा नेतृत्व द्वारा जरूर मिलेगा। उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा सपा सरकार में हासिल होगा। क्योंकि वह पहले भी प्रदेश के लोक निर्माण राज्यमंत्री रह चुके हैं। लेकिन जब आज शपथ ग्रहण समारोह में इस युवा नेता का नाम राज्यमंत्री की श्रेणी में रखा गया तो यह स्थिति देख स्थानीय सपाइयों के चेहरे मायूस हो गये। यही नहीं जनपद की जनता भी सपा नेतृत्व के फैसले से हैरान रह गयी। जनपद के एक वरिष्ठ नेता ने भारी मन से कहा मुझे तो काटो खून नहीं रह गया। क्योंकि हम सब चाहते थे कि गोप कैबिनेट मंत्री बने और जिले में सपा का नेतृत्व करें।
सपाइयों की माने तो उनका कहना है कि हमें सभी के मंत्री बनने से पार प्रसन्नता है। लेकिन सपा की इस सत्ता में यह कसक जरूर रह गयी कि न तो गोप भाई कैबिनेट मंत्री का दर्जा पाये और न ही सौ फीसदी सफलता हासिल करने के बाद बाराबंकी को एक कैबिनेट मंत्री मिला। सियासी विश्लेषकों का मानना है कि गोप के कद को अन्य के साथ एक ही पैमाने में मापना आगे चलकर यह संगठन के लिहाज से भी एक चूक हो सकती है। क्योंकि ऐसे में सरकार के नशे में चूर जिले में एक साथ समकक्ष तरीके से तीन दरबार चलते नजर आयेंगे। जो दल की सेहत के लिए नुकसान देह भी हो सकता है। फिलहाल तो खुशी के आलम में यह आह झकझोर ही जाती है कि यह क्या हो गया। उधर इस संबंध में सपा का कहना है कि यहां न कोई बड़ा है और न कोई छोटा सब संगठन के झंडे के नीचे चलने वाले सिपाही हैं। नेतृत्व का हर निर्णय व आदेश सच्चे सिपाही की तरह सिर आंखों पर। इस मामले को तूल देना कतई उचित नहीं।
बाराबंकी से रिजवान मुस्तफा की रिपोर्ट.


