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ग्रामीण पत्रकारिता की स्थिति अत्‍यन्‍त भयावह है

जौनपुर : वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यलय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में गुरुवार को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर गोष्ठी का आयोजन किया गया. इस अवसर पर वक्ताओं ने प्रेस की आजादी को संवैधानिक स्तर पर लाने की बात की. प्राध्यापक डॉ. मनोज मिश्र ने कहा कि ३ मई १९९३ को संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा प्रारंभ विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस प्रेस की स्वतंत्रता और प्रेस पर हमले से बचाव और प्रेस की सेवा करते हुए शहीद हुए प्रेस कर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का पल हैं. आज पत्रकारों को तमाम तरह की कठिनाइयों के दौर से गुजर कर खबरें जुटानी होती हैं जिसमें भारत ग्रामीण पत्रकारिता की स्थिति और भी भयावह हैं. ऐसे में पत्रकारों के बचाव के लिए कानून बनाने की जरुरत हैं.  

जौनपुर : वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यलय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में गुरुवार को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर गोष्ठी का आयोजन किया गया. इस अवसर पर वक्ताओं ने प्रेस की आजादी को संवैधानिक स्तर पर लाने की बात की. प्राध्यापक डॉ. मनोज मिश्र ने कहा कि ३ मई १९९३ को संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा प्रारंभ विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस प्रेस की स्वतंत्रता और प्रेस पर हमले से बचाव और प्रेस की सेवा करते हुए शहीद हुए प्रेस कर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का पल हैं. आज पत्रकारों को तमाम तरह की कठिनाइयों के दौर से गुजर कर खबरें जुटानी होती हैं जिसमें भारत ग्रामीण पत्रकारिता की स्थिति और भी भयावह हैं. ऐसे में पत्रकारों के बचाव के लिए कानून बनाने की जरुरत हैं.  

डॉ. अवध बिहारी सिंह ने कहा कि भ्रस्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले शहीद पत्रकारों को नमन करने का दिन हैं. भारत में लोकतंत्र को सशक्त करने में प्रेस का अभिन्न योगदान हैं. प्रेस सोती सरकार को जगा रही हैं. जनता के लिए पत्रकार जोखिम उठता हैं और उसकी आवाज को उठाने वाला कोई नहीं हैं. स्वतंत्रता लोकतंत्र के मूल में हैं. इसे पत्रकारों को हर हाल में मिलना चाहिए. बिना इसके निर्भीक पत्रकारिता संभव नहीं हैं. प्राध्यापक डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने कहा कि विश्व के उन देशों में जहा ताना शाही आज भी है वहा पत्रकारिता करने वालों की स्थिति बहुत दयनीय हैं. भारत में पत्रकारों को स्वतंत्रता के सम्बन्ध में कोई अलग से अधिकार नहीं मिला हैं लेकिन लोकतंत्र होने के कारण वह अपना काम आसानी से कर लेते हैं.

डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता को संवैधानिक दर्जा देने की जरूरत हैं. सिर्फ मौलिक अधिकारों से पत्रकारिता के स्वरुप को न तो बदला जा सकता हैं न खोजीपत्रकारिता   की जा सकती हैं. आज विक्लिक्स की खबरों से विश्व के कई देशो की सरकारे हिल गई हैं. अगर पत्रकारों को संवैधानिक स्वतंत्रता मिली तो वह देश ही नहीं विश्व से अपराध और भ्रष्‍टाचार को ख़त्म करने में अपनी भूमिका निभा सकता हैं. धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रुश्दा हाशमी एवं संचालन छात्रा शादा ने किया. इस अवसर पर विभाग के छात्र -छात्राएं मौजूद रहे.

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