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घडि़याली आंसू न बहाएं विपक्षी दल : सपा

एक तरफ समाजवादी पार्टी की खोखली राजनैतिक विचारधारा और संकीर्ण की सोच पर लोग उंगली उठा रहे हैं तो दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के नेता अक्सर ही किसी न किसी मंच से कहते घूम रहे हैं कि प्रदेश में विशाल जनादेश से बनी समाजवादी पार्टी की सरकार के प्रति पहले दिन से ही पूर्वाग्रह ग्रस्त दलों और उनके नेताओं को दिन में भी रात दिखने की बीमारी हो गई है। जिनका कभी खेत खलिहान और गांव-गरीब से नाता नहीं रहा उन्हें अब किसानों की चिन्ता सताने लगी है। पिछले पांच सालों तक जिन्हें बसपा कुशासन के खिलाफ विरोध की बात करने में भी भय लगता था अब वे सड़कों पर उतरने की धमकियां देने लगे है। गन्ना किसानों के लिए घड़ियाली आंसू बहानेवाले कभी उनकी लड़ाई में शामिल नहीं हुए। आज उनकी झूठी हमदर्दी से गन्ना किसान भी हैरत में हैं।

एक तरफ समाजवादी पार्टी की खोखली राजनैतिक विचारधारा और संकीर्ण की सोच पर लोग उंगली उठा रहे हैं तो दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के नेता अक्सर ही किसी न किसी मंच से कहते घूम रहे हैं कि प्रदेश में विशाल जनादेश से बनी समाजवादी पार्टी की सरकार के प्रति पहले दिन से ही पूर्वाग्रह ग्रस्त दलों और उनके नेताओं को दिन में भी रात दिखने की बीमारी हो गई है। जिनका कभी खेत खलिहान और गांव-गरीब से नाता नहीं रहा उन्हें अब किसानों की चिन्ता सताने लगी है। पिछले पांच सालों तक जिन्हें बसपा कुशासन के खिलाफ विरोध की बात करने में भी भय लगता था अब वे सड़कों पर उतरने की धमकियां देने लगे है। गन्ना किसानों के लिए घड़ियाली आंसू बहानेवाले कभी उनकी लड़ाई में शामिल नहीं हुए। आज उनकी झूठी हमदर्दी से गन्ना किसान भी हैरत में हैं।

गन्ना किसानों को उचित और लाभप्रद समर्थन मूल्य देने के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव प्रतिबद्ध हैं। वे जल्दी ही किसानों के हित में न्याय संगत निर्णय लेगें। किसान न तो निराश हैं और नहीं क्षुब्ध। किसान पेराई के लिए गन्ना मिलों में ले जा रहे हैं। उन्हें विश्वास है कि समाजवादी पार्टी की सरकार किसानों की सरकार है। जब भी समाजवादी पार्टी सत्ता में होती है, किसानों का भला होता हैं। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री स्वयं कृषक परिवार के होने से किसान और खेती का दर्द भली भांति जानते हैं। बसपा की भूतपूर्व मुख्यमंत्री ने तो कमीशन वसूली के लिए 31 चीनी मिलें ही बेच दी थीं। विरोधियों के दुष्प्रचार के बावजूद सच्चाई यह है कि राज्य की कुल 125 चीनी मिलों में 100 ने पेराई शुरू कर दी है। शेष मिलें भी शीघ्र पेराई शुरू करने वाली है। राज्य की चीनी मिलों ने 2012-13 सत्र के लिए अब तक 319 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कर ली है। अब तक राज्य में 26 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन भी हो चुका है। जो विरोधी दल फितूर और नफरत फैलाकर प्रदेश में बवंडर पैदा करने की कोशिशों में लगे है उन्हें जानना चाहिए कि प्रदेश की जनता उनके बहकावे में आनेवाली नहीं है।

समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर पिछली सरकार के समय के बकायों के भुगतान पर कार्यवाही करते हुए वर्तमान अवधि में गन्ना किसानों को सहकारी, निगम क्षेत्र एवं निजी क्षेत्र की चीनी मिलों पर पेराई सत्र 2006-07 व 2007-08 का देय बकाया अतंर गन्ना मूल्य भुगतान क्रमशः 123.68 करोड़ रूपए एवं 759.76 करोड़ रूपए, कुल 883.54 करोड़ रूपए का भुगतान भी कराया गया है। सरकार की किसान हितैषी नीतियों के कारण किसानों को 17812.37 करोड़ रूपए का गन्ना मूल्य भुगतान कराया गया। इससे पूर्व जब मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे तब प्रदेश में रिकार्ड चीनी उत्पादन हुआ और उत्पादकों को सर्वाधिक दाम देने वालों देश में प्रथम राज्य बना। नई चीनी नीति के तहत 28 चीनी मिलों की स्थापना हुई। गन्ना उत्पादन वृद्धि के लिए 7 नई गन्ना प्रजातियां विकसित की गई। समाजवादी पार्टी की सरकार ने अखिलेश यादव के नेतृत्व में पिछले आठ महीनों में बहुत तेजी से किसानों, गरीबों, नौजवानों और अल्पसंख्यकों के साथ किए गए अधिकांश चुनावी वायदों को पूरा करने का काम किया है। उत्तर प्रदेश अब विकास के एक नए मार्ग पर अग्रसर है। जिसमें किसानों के लाभ पर सर्वाधिक ध्यान दिया गया है।

लखनऊ से संजय सक्‍सेना की रिपोर्ट.

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