छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर और आदिवासी जाति के युवाओं के लिए 2007 में पायलट प्रशिक्षण योजना का शुरू की थी। लेकिन राज्य सरकार के साथ करार करने वाली कंपनी के गायब हो जाने से यह योजना खट्टाई में पड़ गई है। जिस कारण से हजारों युवाओं का भविष्य अधर में है। पड़ोसी राज्य झारखंड से भी 30 बच्चों को पायलट प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था लेकिन उन बच्चों का भी प्रशिक्षण अधूरा ही रह गया।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने 2007 में साईं फ़्लाईटेक नामक कंपनी के साथ क़रार किया और बाक़ायदा परीक्षा आयोजित कर के हज़ारों ग़रीब नौजवानों में से योग्य प्रतिभागियों को डेढ़ साल के प्रशिक्षण के लिए चुना था। जिसके लिए सरकार ने लगभग 14 लाख रुपए का भुगतान कंपनी को हरेक प्रशिक्षु पायलट के लिए किया था। लेकिन प्रशिक्षण पूरा हो पाता, उससे पहले ही प्रशिक्षण देने वाली कंपनी साईं फ़्लाईटेक एक दिन अपना बोरिया बिस्तर बांध कर गायब हो गई। इस वजह से राज्य सरकार की इस योजना ने अब दम तोड़ दिया है। राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह अब भी गाहे-बगाहे अपने भाषणों में पायलट प्रशिक्षण योजना का उल्लेख करते हैं लेकिन हालत ये है कि बंद हो चुकी प्रशिक्षण योजना के पूरे दस्तावेज़ भी सरकार के पास उपलब्ध नहीं है। यहां तक कि प्रशिक्षण ले रहे पूरे बच्चों की संख्या और नाम-पता भी आदिवासी विभाग के पास नहीं है। हालांकि आदिवासी विभाग की सहायक आयुक्त द्वारा प्रशिक्षण बीच में ही छोड़ने वाली साईं फ़्लाईटेक के ख़िलाफ़ पिछले छह महीने में कई बार थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाने की कोशिश की गई लेकिन हर बार उन्हें काग़ज़ात का हवाला दे कर वापस लौटा दिया जाता है। कुछ सरकारी अफ़सरों का कहना है कि सरकार फिर से इस प्रशिक्षण योजना को शुरू कर सकती है। पायलट बनने की उम्मीद मन में पाले बच्चों को भी अफ़सर और नेता यही भरोसा दिला रहे हैं। इसी सप्ताह कुछ प्रशिक्षु पायलटों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘स्किल डेवेलपमेंट’ का हवाला देते हुए, इस योजना को शुरू करने का अनुरोध किया है।
लेकिन ऐसे समय में, जबकि राज्य सरकार आदिवासियों और किसानों की तमाम योजनाओं के बजट में भारी कटौती कर रही है। उसमें हवाई जहाज़ उड़ाने का प्रशिक्षण अधूरा छोड़ चुके नौजवानों को सरकारी की यह उम्मीद भी हवा-हवाई ही लग रही है।


