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जनलोकपाल बिल तक ही सीमित न रहे अन्‍ना की लड़ाई

माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के छात्रों ने अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के समर्थन में आज रैली निकालकर यह तो जताया कि वे सब अन्ना के लोकपाल आंदोलन में उनके साथ हैं,  लेकिन अन्ना हजारे ने जिस भ्रष्टाचार के विरुद्ध राष्ट्र की आत्मा को जगाने की कोशिश की है, उसकी परिभाषा सिर्फ लोकपाल बिल तक सीमित नहीं है। भारत में जिस किसी कोने में भ्रष्टाचार है वहां इसके खात्मे के लिए आंदोलन हो तभी अन्ना के आंदोलन को व्यापक अर्थ मिलेगा।

माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के छात्रों ने अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के समर्थन में आज रैली निकालकर यह तो जताया कि वे सब अन्ना के लोकपाल आंदोलन में उनके साथ हैं,  लेकिन अन्ना हजारे ने जिस भ्रष्टाचार के विरुद्ध राष्ट्र की आत्मा को जगाने की कोशिश की है, उसकी परिभाषा सिर्फ लोकपाल बिल तक सीमित नहीं है। भारत में जिस किसी कोने में भ्रष्टाचार है वहां इसके खात्मे के लिए आंदोलन हो तभी अन्ना के आंदोलन को व्यापक अर्थ मिलेगा।

इस अर्थ को व्यापक बनाने की महती जिम्मेदारी हम पत्रकार बिरादरी पर है, जिसे अब यहां से जनसरोकारों की पत्रकारिता से खुद को जोड़ना शुरु कर देना चाहिए। अन्ना का यह आंदोलन भारतीय इतिहास में आजादी के बाद सबसे बड़ी घटना है जिसके बाद अब एक नए भारत की सोच की तरफ आगे बढ़ा जा सकता है। इस सोच को आगे ले जाने के लिए पत्रकारों को, वे जहां भी हैं, वहीं के भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना होगा। भारत में किस क्षेत्र में भ्रष्टाचार नहीं है।

खुद माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की खबरें आए दिन अखबारों औऱ इंटरनेट मीडिया में देखने को मिलता है। रैली निकालने वाले विद्यार्थी बधाई के पात्र हैं कि वे देश के एक बड़े मुद्दे पर अपनी जागरुकता प्रदर्शित करने के लिए सड़क पर निकले हैं। लेकिन सिर्फ प्रदर्शन से काम नहीं चलने वाला। जब तक वे परिसर में चल रहे तानाशाही, शिक्षकों की राजनीति, विश्विद्यालय फंड में हो रहे घोटालों, जरुरी सुविधा के अभावों के विरुद्ध आवाज नहीं उठाएंगे और आंदोलन नहीं करेंगे तब तक अन्ना के लिए प्रदर्शित यह समर्थन रैली सफल नहीं मानी जा सकती।

 

श्रीधर पंडित की रिपोर्ट.

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