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जयप्रकाश नगर : यात्रा एक तीर्थ स्थल की (पदमपति शर्मा की लाइव रिपोर्ट)

: लोकनायक का अधूरा सपना साकार करने की टीम अन्ना पर महती चुनौती : पांच जून की एक तपती सुबह जब हम बलिया के लिए रवाना हुए तब जेहन में आज से ३३ वर्ष पहले की खुशनुमा यादें तिरने लगी थी. तब ऐसी ही मई की एक सुबह बनारस से एक बरात रवाना हुई थी राममोहन (वरिष्ठ पत्रकार श्री राम मोहन पाठक) की. क्या खुशी का मंज़र था वो. हुआ धूम धडाका आज भी गुदगुदाता है. लम्बे अंतराल बाद मंगल पांडे और चित्तू पांडे सरीखे शहीदों और लोकनायक जयप्रकाश नारायण जैसे संत क्रांतिवीर की धरती को नमन करने का विरल अवसर हाथ लगा था. बताने की जरूरत नहीं कि यह यात्रा एक ऐसे मुकाम की अलख जगाने की कोशिशों को लेकर हो रही थी जो जेपी का अधूरा सपना बन कर रह गया था. जी हां, वही जनमानस को झकझोरने-उद्द्वेलित करने वाला चिरकालिक मुद्दा था भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग छेड़ने वाले वर्तमान सदी के गाँधी अन्ना हजारे के कर्मठ सिपाहियों का जन जागरण अभियान.

: लोकनायक का अधूरा सपना साकार करने की टीम अन्ना पर महती चुनौती : पांच जून की एक तपती सुबह जब हम बलिया के लिए रवाना हुए तब जेहन में आज से ३३ वर्ष पहले की खुशनुमा यादें तिरने लगी थी. तब ऐसी ही मई की एक सुबह बनारस से एक बरात रवाना हुई थी राममोहन (वरिष्ठ पत्रकार श्री राम मोहन पाठक) की. क्या खुशी का मंज़र था वो. हुआ धूम धडाका आज भी गुदगुदाता है. लम्बे अंतराल बाद मंगल पांडे और चित्तू पांडे सरीखे शहीदों और लोकनायक जयप्रकाश नारायण जैसे संत क्रांतिवीर की धरती को नमन करने का विरल अवसर हाथ लगा था. बताने की जरूरत नहीं कि यह यात्रा एक ऐसे मुकाम की अलख जगाने की कोशिशों को लेकर हो रही थी जो जेपी का अधूरा सपना बन कर रह गया था. जी हां, वही जनमानस को झकझोरने-उद्द्वेलित करने वाला चिरकालिक मुद्दा था भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग छेड़ने वाले वर्तमान सदी के गाँधी अन्ना हजारे के कर्मठ सिपाहियों का जन जागरण अभियान.

 

समूचे उत्तर प्रदेश को मथने की कवायद का आगाज़ जाहिर है जेपी की जन्मस्थली सिताब दियारा (आज का जयप्रकाश नगर) से एक और कारण से भी इसलिए होना था कि आज से ३८ बरस पहले  पांच जून को ही लोकनायक ने समग्र क्रांति का उद्घोष किया था. तब जेपी तानाशाह केंद्रीय सत्ता को तीन साल बाद उखाड़ने में तो कामयाब हो गए थे पर व्यवस्था परिवर्तन का उनका ख्वाब उनके सत्तासीन चेलों की महत्वाकांक्षा की भेंट चढ़ गया था और तिकड़मी कांग्रेस ने फिर से वापसी कर ली थी.  लेकिन इस बार जन लोकपाल यानी व्यवस्था परिवर्तन का एक सुविचारित ब्लू प्रिंट लेकर भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़ने वाले  अन्ना और सिविल सोसाइटी के उनके साथी बीते एक वर्ष से जो कर रहे हैं, उसे बताने की जरूरत नहीं. सरकार, संसद और प्रधान मंत्री तक ने इस मुद्दे पर टीम अन्ना और देश को किस कदर धोखा दिया, यह भी जनमानस देखता रहा है.

टीम अन्ना ने तय किया कि अब सीधे जनता के पास जाना होगा और उससे ही सीधा संवाद करना होगा. अन्ना निकले हुए हैं लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर पूरे महाराष्ट्र के  दौरे पर तो इधर उनकी टीम ने अन्ना के सन्देश को घर-घर तक पहुँचाने के उद्देश्य से देश के सबसे अहम् प्रदेश यूपी को मथने का संकल्प लिया. काशी से चला हमारा  जत्था चार बजे जब जेपी के गृह नगर पहुंचा तब इस तीर्थ स्थली में सभा चल रही थी. हर कोई लोकनायक स्मारक और उसकी गैलरी देख कर अभिभूत था. टीम अन्ना की राष्ट्रीय कोर कमेटी के सदस्य संजय सिंह, इलियास आज़मी, मनीष सिसौदिया और गोपाल राय ट्रेन लेट होने के चलते विलम्ब से पहुंचे थे, इसलिए जेपी की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद काफिला निकल पड़ा बलिया की ओर. रास्ते में दो स्थानों पर टीम ने लघु सभा में इस यात्रा का उद्देश्य उत्साहित और प्रतीक्षारत जन समुदाय को बताया और साथ ही २५ जुलाई को दिल्ली चलने का उससे आह्वान भी किया.

वक्ताओं ने जब बताया कि कैसे ३४ में प्रधान मंत्री सहित १६ केंद्रीय मंत्री भ्रष्टाचार में लिप्त हैं तो हर जगह श्रोताओं ने जोशीले नारों के साथ टीम का उत्साह  वर्धन किया. वैसे ही खचाखच भरा मिला बलिया का बापू हाल , जहाँ यदि गोपालजी ने भावनात्मक उद्बोधन से लोगों के दिलों में पैठ बनायीं तो पूर्व सांसद इलियास आज़मी भी कम सार  गर्भित नहीं रहे. मनीष ने सड़े गले भारतीय कानूनों की जब धज्जियाँ उडाई तो लोगों का रोष उनकी जोरदार तालियों में उमड़ पड़ा था. संजय ने अपने वरिष्ठ साथी डायबिटिक अरविन्द केजरीवाल के कृतित्व और त्याग की जब चर्चा की तब लोगों की आँख भर आयी. २५ जुलाई से अपने साथियों गोपाल राय और संजय सिंह के साथ अनिश्चित कालीन अनशन पर बैठने जा रहे अरविन्द की शारीरिक स्थिति  उनकी माँ, पत्नी और भाई जानते हैं. उनको पता है कि हर चार घंटे में अरविन्द को कुछ खाना पड़ता है सुगर के चलते अनशन करने से उनकी जान भी जा सकती है. मगर अरविन्द हैं कि मानते ही नहीं. हर जगह लोगों में अपूर्व उत्साह दिखा. सन्देश यात्रा रात्रि विश्राम के पश्चात अगली सुबह पूर्वी उत्तर प्रदेश को छानने निकल पडी तो हमारा काफिला लौट चला काशी की ओर जहाँ यह यात्रा ११ जून को पहुँचने वाली है और उस दिन बनारस की जनता रूबरू होगी देश की प्रथम महिला आईपीएस किरण बेदी से.

लेखक पदमपति शर्मा देश के जाने-माने खेल पत्रकार रहे हैं. कई अखबारों व चैनलों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं. इन दिनों अपने गृह नगर वाराणसी में रहते हुए कई तरह की सामाजिक व पत्रकारीय गतिविधियों से रूबरू हैं.

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