चौमू: बहन रक्षाबन्धन पर भाई की कलाई पर इसी आशा से राखी बांधती है कि संकट के समय वह उसकी सहायता करेगा, हिम्मत बढ़ाएगा, लेकिन वही भाई दुःख की घड़ी में अपनी बहन को दर-दर की ठोकरें खाने को छोड़ दे तो बहन भाई के पवित्र रिश्ते पर कौन विश्वास करे? यही घटना घटी सुशीला शर्मा के साथ. वह आज चौमू के सामूदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में मानसिक रूप से परेशान होकर एक बिस्तर पर पड़ी है. वाकया है ए.एन.एम सुशीला देवी का जो कभी दूसरों को इलाज करती थी लेकिन आज वह खुद इलाज के लिए दूसरों पर मोहताज है.
इस बदनसीब का दुर्भाग्य तो देखो पति ने शादी के कुछ साल बाद ही छोड़ दिया और बेटा जवान हुआ तो किसी मामले मे जेल चला गया. भाई के यहां शरण ली तो उसने सारी जमा पूंजी हड़प ली और अस्पताल का रास्ता दिखा दिया. अब यह महिला अपना मानसिक संतुलन खोकर अस्पताल के एक बेड पर पड़ी जीवन की अन्तिम सांसे गिन रही है. दो माह तक वहीं नर्सिंग रूम में रही लेकिन कुछ दिनों पूर्व अस्पताल प्रशासन ने उसे यहां से हटाकर जनरल वार्ड में डाल दिया. अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यह महिला यहां भर्ती नहीं है ऐसे ही घूमती रहती है. हमने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है कि इस महिला को अन्यत्र स्थानान्तरित किया जाए. मानसिक स्थिति खराब होने से सुशीला अपने नियुक्ति स्थल राडावास में ड्यूटी भी नहीं दे पा रही है और उसका वेतन भी बकाया चल रहा है.
गौरतलब है कि अजीतगढ़ निवासी सुशीला का लड़का मनोज किसी प्रकरण में साढ़े चार साल पूर्व जेल चला गया. जेल जाने से पूर्व मनोज ने अपनी मां को चौमू में रहने वाले मामा रवि शर्मा के घर भेज दिया. मनोज अजीतगढ़ में एक अखबार के लिए काम करता था. मनोज का आरोप है कि उसके मामा रवि शर्मा ने उसकी मां सुशीला से दो लाख रुपये उधार लिए थे, बाद में एटीएम कार्ड से भी पैसे निकाल लिए. पति के छोड़ देने,जवान बेटे के जेल चले जाने से टूट चुकी सुशीला देवी भाई द्वारा किए गये इस जख्म को सहन नहीं कर पाई और सदमे का शिकार हो गई. उसके भाई रवि शर्मा का आरोप है कि उसने पहले भी बड़े भाई गोपाल शर्मा को प्रताडित कर घर से बाहर निकाल दिया और उसे सम्पत्ति में से हिस्सा नहीं दिया. जेल में सजा काट आये मनोज ने बताया कि वह अपनी मां कि स्थिति को देखकर बुरी तरह टूट चुका है, उसे न्याय चाहिए. उसने अपने मामा द्वारा की गई धोखाधड़ी की जानकारी पुलिस अधिक्षक जयपुर ग्रामीण को भी दी है. मनोज के ज्ञापन की एक प्रति मुख्यमंत्री, महिला आयोग को भी भेजी गई है.


