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जाटों और गैर जाटों की लड़ाई की आग में अन्ना का घी

हिसार लोकसभा उपचुनाव में आखिर वही हुआ जो जिसकी उम्मीद थी। जाटों और गैर जाटों के जबरदस्त ध्रुवीकरण के बीच हजकां के कुलदीप विश्नोई ने कड़ी टक्कर में इनेलो के अजय चौटाला को चुनाव हरा दिया। बेशक टीम अन्ना जनलोकपाल के बहाने इस उपचुनाव में कांग्रेस को हराने का क्रेडिट ले, लेकिन हरियाणा में आने वाले दिनों में जबरदस्त राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तन देखने को मिलेगा। जाटों और गैर जाटों के ध्रुवीकरण के बीच कांग्रेस को प्रदेश की राजनीति में जबरदस्त चुनौती मिलेगी। संभावना यह जतायी जा रही है कि यूपी और बिहार की तरह कहीं कांग्रेस का सारा सामजिक आधार ही खत्म न हो जाए। क्योंकि जिस तरह से गैर जाटों ने इकट्ठा होकर कुलदीप को वोट दिया और अंतिम समय में कांग्रेस के जाट मुख्यमंत्री को धोखा दे सारे जाट समुदाय ने अजय चौटाला को वोट दिया, वो कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी है। कांग्रेस की परेशानी यह है कि हमेशा से नॉन जाट की राजनीति करने वाली इस पार्टी ने गैर जाट के बजाए जाट राजनीति शुरू की थी। भूपेंद्र सिंह हुड्डा को मुख्यमंत्री बना दिया था। लेकिन जाट एक बार फिर ओम प्रकाश चौटाला को अपना नेता मानने का संकेत दे रहे हैं।

हिसार लोकसभा उपचुनाव में आखिर वही हुआ जो जिसकी उम्मीद थी। जाटों और गैर जाटों के जबरदस्त ध्रुवीकरण के बीच हजकां के कुलदीप विश्नोई ने कड़ी टक्कर में इनेलो के अजय चौटाला को चुनाव हरा दिया। बेशक टीम अन्ना जनलोकपाल के बहाने इस उपचुनाव में कांग्रेस को हराने का क्रेडिट ले, लेकिन हरियाणा में आने वाले दिनों में जबरदस्त राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तन देखने को मिलेगा। जाटों और गैर जाटों के ध्रुवीकरण के बीच कांग्रेस को प्रदेश की राजनीति में जबरदस्त चुनौती मिलेगी। संभावना यह जतायी जा रही है कि यूपी और बिहार की तरह कहीं कांग्रेस का सारा सामजिक आधार ही खत्म न हो जाए। क्योंकि जिस तरह से गैर जाटों ने इकट्ठा होकर कुलदीप को वोट दिया और अंतिम समय में कांग्रेस के जाट मुख्यमंत्री को धोखा दे सारे जाट समुदाय ने अजय चौटाला को वोट दिया, वो कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी है। कांग्रेस की परेशानी यह है कि हमेशा से नॉन जाट की राजनीति करने वाली इस पार्टी ने गैर जाट के बजाए जाट राजनीति शुरू की थी। भूपेंद्र सिंह हुड्डा को मुख्यमंत्री बना दिया था। लेकिन जाट एक बार फिर ओम प्रकाश चौटाला को अपना नेता मानने का संकेत दे रहे हैं।

हिसार उपचुनाव में अन्ना टीम के आने से पहले ही जाटों और गैर जाटों के बीच ध्रुवीकरण हो गया था। उसका मुख्य कारण था मिर्चपुर कांड और गैर जाट ब्राहमणों, बनिया और पंजाबी लोगों को उपेक्षित महसूस करना। चुनाव प्रचार के शुरुआत में ही गैर जाट जातियां कुलदीप विश्नोंई के पक्ष में लामबंद हो गई थी। उधर मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के लागातार कैंपेन के बावजूद जाट बहुल बेल्ट से जबरदस्त लीड अजय चौटाला ने ली और कांग्रेस को इन इलाकों में नाममात्र के वोट मिले। गैर जाटों और जाटों का ध्रुवीकरण इतना तेज था कि कुलदीप विश्नोई और अजय चौटाला में हार जीत का अंतर मात्र 6323 वोटों का रहा। जाट बहुल विधानसभा हल्के में अजय चौटाला ने कुलदीप को पीछे कर दिया तो गैर जाट बहुल इलाके में कुलदीप ने अजय को बुरी तरह से पछाड़ा। जबकि बावनीखेड़ा ही एक विधानसभा हल्का रहा जहां कांग्रेस तीसरे नंबर पर रहने के बावजूद सम्मानित वोट पा सकी।

कुलदीप विश्नोई को कुल 355941 वोट मिले जबकि अजय चौटाला को 349618 वोट मिले। जबकि जयप्रकाश जो कांग्रेस के उम्मीदवार थे 149785 वोट लेकर अपनी जमानत तक गवां बैठे। जो इलाके जाटों के दबदबे वाले थे वहां पर अजय को लीड मिली और जो गैर जाट बहुल विधानसभा थे वहां पर कुलदीप लीड लेकर गए। जाट बहुल विधानसभा उचाना कलां, नारनौंद और उकलाना में अजय चौटाला को अच्छी लीड कुलदीप पर मिली। जहां उचानाकलां में अजय चौटाला ने कुलदीप पर 34479 वोटों की लीड ले ली, वहीं उकलाना में अजय ने कुलदीप पर लगभग 22295 वोटों की लीड ले ली थी। इन इलाकों मे जाटों ने अजय के पीछे जोरदार लामबंदी की। वहीं नारनौंद में भी कुलदीप पर लगभग 23186 वोटों की लीड अजय ने ले ली। लेकिन बाकी के विधानसभा हल्कों में कुलदीप ने अजय को पछाड़ दिया। आदमपुर जैसे गैर जाट बहुल इलाके में कुलदीप ने अजय चौटाला को लगभग 23607 हजार वोटों से पीछे कर दिया। हिसार में कुलदीप विश्नोई 34391 वोटों से आगे रहे जबकि नलवा में भी अजय चौटाला को 11130 वोटों से पीछे कर दिया। बरवाला में भी कुलदीप ने अजय को 12116 वोटों से पीछे किया। ये वो इलाके है जहां पर गैर जाट हावी है। हांसी में भी कुलदीप ने लगभग 7246 वोटों की लीड अजय चौटाला पर बनायी। कांग्रेस किसी भी विधानसभा हल्के में दूसरे नंबर पर आने में कामयाब नहीं हो पायी।

हिसार उपचुनाव परिणाम जहां कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए यूपी में चिंता का विषय बन गया है, वहीं हरियाणा में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की भी चिंता बढ़ गई है। गैर जाट नेता अब कांग्रेस में माहौल बनाने में लग गए है कि हुड्डा के मीठे जाटपन के कारण गैर जाटों का कांग्रेस से मोहभंग हो गया है। जबकि जाट अब चौटाला की तरफ वापस जा रहे है। अगर यही हाल रहा तो पूरे हरियाणा में गैर जाट और जाट कुलदीप और चौटाला के बीच बंट जाएंगे। इससे कांग्रेस को भारी नुकसान हो जाएगा। सामान्य से रुप से भजनलाल के समय तक कांग्रेस गैर जाट की राजनीति करती थी। लेकिन हुड्डा के सतासीन होने के बाद कांग्रेस की राजनीति भी साफ्ट जाटवाद की तरफ बढ़ी। प्रदेश में सामान्य रुप से यह आरोप लगने लगा कि हुड्डा मीठे जाट है और मीठे तरीके से गैर जाटों को काट रहे हैं। नौकरियों में नॉन जाटों को काट कर जाटों को प्राथमिकता मिल रही है। जबकि दलितों पर अत्याचार बढ़ गया है।

दिलचस्प बात है कि कांग्रेस विधायक संपत सिंह के विधानसभा नलवा में कांग्रेस को मात्र 14365 वोट मिले। जबकि कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव वीरेंद्र सिंह के हल्के उचाना कलां में जहां से अभी ओमप्रकाश चौटाला विधायक है, में कांग्रेस को मात्र 12880 वोट मिले। यहां पर जाटों का ध्रुवीकरण इतना ज्यादा चौटाला के पक्ष में था कि अजय चौटाला 68 हजार से ज्यादा वोट ले गए। भूपेंद्र सिंह हुड्डा और वीरेंद्र सिंह का युद्व विराम भी कांग्रेस को जाट वोट नहीं दिला सका। उधर हिसार उपचुनाव परिणाम आने के बाद अन्ना के भी इस चुनाव परिणाम पर प्रभाव का आकलन किया जा रहा है। हालांकि टीवी चैनल सारी जीत का श्रेय टीम अन्ना को दे रहे है। जबकि हरियाणा के लोगों का मानना है कि टीम अन्ना ने सिर्फ आग में घी डाला। अगर सिर्फ भ्रष्टाचार ही मुद्दा होता तो अजय चौटाला, जो दिल्ली की अदालत में भ्रष्टाचार के मामले में चार्जशीट हो गए, इतना ज्यादा वोट नहीं ले जाते। सच्चाई सिर्फ यही है कि अन्ना टीम ने कांग्रेस के पहले से खराब हुए कैंपेन को और खराब कर दिया और न्यूट्रल वोटों को गैर कांग्रेसी राजनीतिक दलों की तरफ जाने के लिए प्रभावित किया। लेकिन कांग्रेस को पता है कि जमीनी सच्चाई हिसार की कुछ हो और जातिवादी राजनीति ने चुनाव परिणाम को प्रभावित किया है, लेकिन हरियाणा से बाहर टीम अन्ना को ही इस हिसार के चुनाव में निर्णायक माना जाएगा। इसका सीधा प्रभाव उतर प्रदेश में पड़ेगा।

लेखक संजीव पांडेय पत्रकार हैं.

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