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दुख-सुख

जेएनयू में मनाया गया महिषासुर का शहादत दिवस

: अगले सप्ताह ‘महिषासुर-दुर्गाः एक मिथक का पुनर्पाठ’ वि‍षय पर पुस्तिका जारी की जाएगी : इतिहास में जो छल करते रहे उन्हीं को देवत्व का तमगा मिल गया है और जिन्होंने अपनी सारी उर्जा समाज सुधार और वंचित तबकों के उत्थान के लिए झोंक दी, उन्हें असुर या राक्षस करार दे दिया गया : जेएनयू 30 अक्‍टूबर 2012 : विवादित विषयों पर बहस की अपनी पुरानी परंपरा को बरकरार रखते हुए जेएनयू के पिछडे समुदाय के छात्रों के संगठन ऑल इंडिया बैकवर्ड स्टूडेंट् फोरम (एआईबीएसएफ) के बैनर तले सोमावार (29 अक्‍टूबर) रात को महिषासुर का शहादत दिवस मनाया गया. देर रात तक चले इस समारोह में देश भर से आए विद्वानों ने महिषासुर पर अपने विचार रखे. इस अवसर पर प्रसिद्ध चित्रकार लाल रत्नाकर द्वारा बनाये गये महिषासुर के तैलचित्र पर माल्यार्पण किया गया.

: अगले सप्ताह ‘महिषासुर-दुर्गाः एक मिथक का पुनर्पाठ’ वि‍षय पर पुस्तिका जारी की जाएगी : इतिहास में जो छल करते रहे उन्हीं को देवत्व का तमगा मिल गया है और जिन्होंने अपनी सारी उर्जा समाज सुधार और वंचित तबकों के उत्थान के लिए झोंक दी, उन्हें असुर या राक्षस करार दे दिया गया : जेएनयू 30 अक्‍टूबर 2012 : विवादित विषयों पर बहस की अपनी पुरानी परंपरा को बरकरार रखते हुए जेएनयू के पिछडे समुदाय के छात्रों के संगठन ऑल इंडिया बैकवर्ड स्टूडेंट् फोरम (एआईबीएसएफ) के बैनर तले सोमावार (29 अक्‍टूबर) रात को महिषासुर का शहादत दिवस मनाया गया. देर रात तक चले इस समारोह में देश भर से आए विद्वानों ने महिषासुर पर अपने विचार रखे. इस अवसर पर प्रसिद्ध चित्रकार लाल रत्नाकर द्वारा बनाये गये महिषासुर के तैलचित्र पर माल्यार्पण किया गया.

 

समारोह को संबोधित करते हुए आदिवासी मामलों की विशेषज्ञ और ‘युद्धरत आम आदमी’ की संपादक रमणिका गुप्ता ने कहा कि ‘इतिहास में जेा छल करते रहे उन्हीं को देवत्‍व का तमगा मिल गया है और जिन्होंने अपनी सारी उर्जा समाज सुधार और वंचित तबकों के उत्थान के लिए झोंक दी उन्हें राक्षस करार दे‍ दिया गया. ब्रह्मणवादी पुराणकारों/ इ‍तिहासकारों ने अपने लेखन में इनके प्र‍ति नफरत का इजहार का भ्रम का वातावरण रच दिया है. आखिर समुद्र मंथन में जो नाग की मुंह की तरफ थे और जिन्हें विष मिला वे राक्षस कैसे हो गए? कामधेनु से लेकर अमृत के घडों को लेकर भाग जाने वाले लोग किस आधार पर देवता हो सकते हैं? ‘ उन्‍होंने कहा कि ‘वंचित तबका इन मिथकों का, अगर पुर्नपाठ कर रहा है तो किसी को दिक्कत क्यों हो रही है?’

जेएनयू की प्रो. सोना झरिया मिंज ने कहा कि हिन्दू धर्मग्रंथों में वर्णित कहानियों के समानांतर आदिवासी समाज में कई कहानियां प्रचलित हैं. इन कहानियों के नायक तथाकथित असुर या राक्षस कहे जाने वाले लोग ही हैं जिन्हें कलमबद्ध करने की जरूरत है. प्रसिद्ध समाजशास्त्री प्रो. विवेक कुमार ने कहा कि मिथकों की राजनीति और राजनीति का मिथक पर बहस बहुत जरूरी है. हमारे नायकों को आज भी महिषासुर की भांति बदनाम करने की साजिश चल रही है. इतिहास-आलोचक ब्रजरंजन मणि ने कहा कि शास्त्रीय मिथकों से कहीं ज्याजदा खतरनाक आधुनिक विद्वानों द्वारा गढे जा रहे मिथक हैं. पौराणिक मिथकों के साथ-साथ हमें आधुनिक मिथकों का भी पुर्नपाठ करना होगा.

मंच का संचालन करते हुए  एआईबीएसएफ के अध्यीक्ष जितेंद्र यादव ने कहा कि पिछडा तबका जैसे-जैसे ज्ञान पर अपना अधिकार जमाता जाएगा वैसे-वैसे अपने नायकों को पहचानते जाएगा. महिषासुर की शहादत दिवस इसी कडी में है. संगठन महिषासुर शहादत दिवस को पूरे देश में मनाने के लिए प्रयत्‍नशील है. संगठन के जेएनयू प्रभारी विनय कुमार ने कहा कि अगले सप्‍ताह ‘महिषासुर-दुर्गा:एक मिथक का पुनर्पाठ’ वि‍षय पर पुस्तिका जारी की जाएगी, जिसका संपादन अकाद‍मिक जगत में लोकप्रिय पत्रिका ‘फारवर्ड प्रेस’ के संपादक प्रमोद रंजन ने किया है।

गौरतलब है कि ‘फारवर्ड प्रेस’ में ही पहली बार वे महत्‍वपूर्ण शोध प्रका‍शित हुए थे, जिससे यह साबित होता है ‘असुर’ एक (आदिवासी) जनजाति है, जिसका अस्तित्‍व अब भी झारखंड व छत्‍तीसगढ में और महिषासुर राक्षस नहीं थे बल्कि इस देश के बहुजन तबके के पराक्रमी राजा थे। उन्‍होंने कहा कि पुस्तिका में महिषासुर और असुर जा‍ति के संबंध में हुए नये शोधों को प्रकाशित किया जाएगा तथा इसे विचार-विमर्श के लिए उत्‍तर भारत की सभी प्रमुख यु‍निवसिटियों में वितरित किया जाएगा। इस मौके पर ‘इन साइट फाउंडेशन’ द्वारा महिषासुर पर बनाई गई डाक्युशमेंट्री भी दिखाई गई. समारोह को एआईबीएसएफ कार्यकर्ता रामएकबाल कुशवाहा, आकाश कुमार, मनीष पटेल, मुकेश भारती, संतोष यादव, श्री भगवान ठाकुर आदि ने भी संबोधित किया. 

प्रेषक :

विनय कुमार

जेएनयू अध्यक्ष

एआईबीएसएफ

158, साबरतमी जेएनयू

मोबाइल – 09871387326

अन्‍य फोन नंबर…

प्रोफेसर विवेक कुमार (समाजशास्‍त्री, जेएनयू्) – 09871674955

प्रमोद रंजन (संपादक, फारवर्ड प्रेस) – 09810300255

रमणिका गुप्‍ता (संपादक, युद्धरत आम आदमी) – 09312239505

ब्रजरंजन मणि (इतिहास- आलोचक) – 09818832311

जितेंद्र यादव, अध्‍यक्ष, राष्‍ट्रीय एआईबीएसएफ- 08459439496

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