नई दिल्ली। दशहरा के त्योहार के बाद से ही दुर्गा और महिषासुर के विवादों से उबल रहे जेनयू के विभिन्न छात्र संगठनों ने सोमवार को यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक भवन के सामने प्रर्दशन कर महिषासुर की शहादत दिवस मनाने की घोषणा की। प्रदर्शन में शामिल ऑल इंडिया बैकवर्ड स्टूडेंटस फोरम (एआइबीएसएफ), आइसा, एसएफआई, डीएसयू, एसएफआर आदि छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की गुण्डा ताकतें कैंपस के महौल को हिंसक बना रही हैं तथा हिंदुवादी, जातिवादी, मनुवादी ऐजेंडा का लागू करने की कोशिश में है। प्रदर्शन में शामिल छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने कुलपति से मुलाकात कर पिछले दिनों एआईबीएसएफ के अध्यक्ष जितेंद्र कुमार, उपाध्यक्ष विनय कुमार व कार्यकारिणी सदस्य मुन्नी कुमारी पर हमले करने वाले एबीवीपी के कार्यकर्ताओं को यूनिवर्सिटी से बाहर करने की मांग की।
गौरतलब है कि जेएनयू में दुर्गापूजा के बाद से ही लगातार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद तथा ऑल इंडिया बैकवर्ड स्टूडेंट फोरम के बीच तनाव बना हुआ है। दुर्गापूजा के दिन एआईबीएसएफ ने जेएनयू परिसर में ‘फारवर्ड प्रेस’ में छपा लेख ‘दुर्गा : किसकी पूजा कर रहे हैं बहुजन’ का पोस्टर बनाकर लगाया था। बिहार के लेखक व राजनेता प्रेमकुमार मणि ने अपने इस लेख में महिषासुर को भारत का मूलनिवासी (ओबीसी) बताया है तथा कहा है कि बंग देश में दुर्गा को वेश्याएं अपने कुल का बताती हैं। इससे नाराज एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने न सिर्फ इस लेख के आधार पर बनाया गया एआईबीएसफ के पोस्टर फाड डाला बल्कि उनके कार्यकर्ताओं पर हमला भी किया।
एबीवीपी का आरोप है कि एआईबीएसएफ ने हिंदू देवी दुर्गा का अपमान किया है जबकि एआईवीएसएफ का कहना है जिस पत्रिका में यह लेख छपा है, उससे देश और विदेश के कई बडे़ एकेडमिशियन कांचा अइलैया, टॉम वुल्फ, गेल ऑमवेट आदि जुडे हैं। हमने यह लेख उक्त पत्रिका से ले लिया है तथा हम इस लेख के तथ्यों से सहमत हैं। उन्होंने कहा कि हम दुर्गा को दलित पिछड़ों का संहार करने वाली देवी मानते हैं तथा महिषासुर को वंचित तबकों का नायक। वाम छात्र संगठन इस पूरे मामले में एआईबीएसएफ के साथ हैं। उन्होंने इस अवसर पर, फारवर्ड प्रेस में प्रकाशित एक लेख के आधार पर 25 अक्टूबर को लार्ड मैकाले की जयंती मनाने की भी घोषणा की। उधर, फारवर्ड प्रेस के संपादक (हिंदी) प्रमोद रंजन ने कहा कि हमारी पत्रिका इस विवाद में शामिल नहीं है। हमने यह लेख तथ्यों के आधार पर प्रकाशित किया है। इस का छात्र कैसे उपयोग कर रहे हैं, यह उनकी अपनी विचारधारा पर निर्भर करता है। प्रेस रिलीज


