ज्वालामुखी : देश दुनिया में अपनी दिव्यता के लिये मशहूर ज्वालामुखी मंदिर में हुई नीलामी में इलाके के राजनेओं व पत्रकारों को इस कदर उपकृत किया कि सुनने वाले भी हैरान रह जायें। इलाके में इस नीलामी को लेकर हर कोई हैरान है। सुप्रसिद्ध शक्तिपीठ में हुई नीलामी सवालों के घेरे में आ गई है। दरअसल मंदिर के चढ़ावे में आये सामान की इस कदर बंदर बांट हुई कि जिसके जो हाथ लगा वह औने पौने दामों में लूट ले गया। हालांकि नीलाम किये गये सामान की बाजारी कीमत लाखों रूपये आंकी जा रही है। लेकिन मंदिर में गुपचुप तरीके से लाखों के सामान की नीलामी रखी गई थी। जिससे यह काम आसान हो गया। चूंकि इस नीलामी की कहीं कोई प्रचार नहीं किया गया। खुद मंदिर न्यास के अधिकारी तहसीलदार मनोज ठाकुर ने माना है कि इस बाबत अखबारों में कोई विगयापन नहीं दिया गया था।
हैरानी की बात है कि सरकारी नियंत्रण वाले ज्वालामुखी मंदिर में इस नीलामी में भाजपा नेताओं से लेकर चंद पत्रकारों को भी फायदा मिला। ताकि मंदिर के कारनामें उजागर न हो पायें। अखिल भारतीय ब्राहम्ण सभा के स्थानीय संयोजक वी के उपमन्यु ने यहां आरोप लगाया कि यह सब अधिकारियों व मंदिर न्यास के लोगों की आपसी मिलीभगत के साथ किया गया। नीलामी को मैनेज किया गया था। बकौल उनके इस मामले पर प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल जो कि खुद मंदिर व्यवस्था में व्यापक सुधार के हिमायती रहे हैं। को तुरंत दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश देना चाहिये। ताकि दोषियों को सबक सिखाया जा सके। काबिलेगौर है कि नीलामी में ज्वालामुखी के एक पत्रकार ने करीब 63 कंबल मात्र बारह हजार में खरीदे। जिनकी बाजार में कीमत इससे कई गुणा अधिक हो सकती है। लेकिन उनका तर्क है कि बोली लगाकर उन्होंने सामान खरीदा है यही नहीं भाजपा नेता एवं ज्वालामुखी नगर पंचायत की पूर्व अध्यक्षा के पति ने 345 बेड शीट मात्र तीस हजार छह सौ रूपये में खरीदे। जबकि एक अन्य भाजपा नेता ज्वालामुखी मंडल भाजपा महासचिव के भाई ने चार कंबल 3100 में व नौ चांदनी 1350 रूपये में खरीदे।
ज्वालामुखी मंदिर में लगरं को ठेके पर चलाने वाले एक अन्य भाजपा नेता ने करीब 55 रजाईयां 3500 रूपये में जबकि 53 दलीचे 2300 रूपये में लिये। गौरतलब है कि लंगर को ठेके पर देने को लेकर पहले ही विरोध के स्वर उठते रहे हैं। लेकिन इलाके के कबीना मंत्री की मेहरबानी से यह काम आसान हो गया। वहीं ज्वालामुखी कालेज के एस सी ए के अध्यक्ष रहे एक शख्स ने नब्बे पिल्लो तीन हजार में 35 तलाई आठ हजार रुपये में खरीदे। वहीं प्रदेश के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री रमेश धवाला के राजनैतिक सलाहकार ने छह हजार चार सौ अस्सी चुनरी सात हजार में 53 लहंगा चोली 5500 रूपये में खरीदे। शहर के एक दुकानदार ने 250 शाल 4300 रूपये में खरीदे। व 114 कंबल 8200 रूपये में लिये। कांग्रेस नेता संजय रतन ने इस नीलामी को मंदिर के खजाने की लूट करार दिया है। व कहा है कि राज्य सरकार को इस मामले की जांच करा कर दोषी अधिकारी के खिलाफ कदम उठाने चाहिये। इस बीच मंदिर न्यास के चैयरमेन देहरा के एस डी एम शिव कृष्ण पराशर ने कहा कि उन्हें इसके बारे में जानकारी नहीं है। लेकिन वह मंदिर अधिकारी से रिर्पोट मंगवा रहे हैं। लिहाजा गलत पाया गया तो कानून सम्मत कदम भी उठाये जायेंगे। जबकि सामान खरीदने वालों का तर्क है कि उन्होंने बोली लगाकर सामान खरीदा है कुछ भी गलत नहीं किया।


