झुंझुनूं। झुंझुनूं शहर के एक निजी स्कूल में शिक्षिका की पिटाई से आंख की रोशनी गंवाने वाली 9 साल की छात्रा पिया ने करीब ढाई साल जिंदगी और मौत से जूझने के बाद शुक्रवार रात को दम तोड़ दिया। बताया जा रहा है कि नजर बचाने की कोशिश में चले इलाज के दौरान वह कैंसर का शिकार हो गई। इसी से उसकी मौत हुई है। वेन फटने से पिया की आंख में प्रेशर आने से सूजन आने लगी। इस पर उसका आठ-दस बार ऑपरेशन भी किया गया। बार-बार ऑपरेशन से उसके चेहरे पर बाईं ओर गांठें बन गई। माथे से लेकर गर्दन तक भी जगह-जगह गांठें बन गईं। करीब ढाई महीने पहले जयपुर के महात्मा गांधी अस्पताल के डॉ. डीपी पूनिया ने उसे न्यूरो ब्लास्टोमा बताया। इस प्रकार का कैंसर एक लाख रोगियों में से एक को होता है। इसके ऑपरेशन पर 35-40 लाख रु. का खर्चा बताया गया। इस पर परिजन उसे दिल्ली के आर एंड आर अस्पताल में ले गए, जहां छह कीमोथैरेपी की गई।
इसके बाद एम्स में ऑपरेशन कर दो बार रेडियोथैरेपी दी गई। आठ घंटे चले ऑपरेशन के बाद डॉक्टर्स ने जवाब दे दिया और घर ले जाने की सलाह दी। कुछ दिनों बाद पिया के पैरों ने भी जवाब दे दिया। फिर उसे महावीर कैंसर अस्पताल ले जाया गया। वहां से भी उसे घर भेज दिया गया। अंतिम आस में उसे मुरलीपुरा (जयपुर) स्थित एमडीपी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां 16 नवंबर को रात साढ़े दस बजे पिया ने दम तोड़ दिया। शनिवार सुबह ननिहाल भालोठिया की ढाणी में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
जिले के बृजलालपुरा गांव के निवासी वीरेंद्र सिंह की बेटी पिया झुंझुनूं में मंडावा रोड स्थित द टैगोर स्कूल में पहली कक्षा में पढ़ती थी। वह बचपन से ही भालोठिया की ढाणी में नाना-नानी के पास रहती थी और वहीं से स्कूल आती-जाती थी। 3 जुलाई, 2010 को स्कूल टीचर प्रतिभा ने होमवर्क को लेकर पिया की तरफ वर्क पेड फेंका। पेड का कोना पिया की बांई आंख में लगा, जिससे उसकी आंख के ऊपर की नस फट गई। परिजन उसे पिलानी के महादेव सिंघी अस्पताल, झुंझुनूं के बीडीके अस्पताल, जयपुर के एसएमएस अस्पताल और दिल्ली के आर एंड आर आर्मी अस्पताल ले गए, लेकिन कहीं से भी रोशनी की उम्मीद नजर नहीं आई, लेकिन परिजनों ने हार नहीं मानी। वे उसे चंडीगढ़ के पीजीआई अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों को कोई सफलता नहीं मिली। पिया के पिता वीरेंद्र सिंह सेना में कार्यरत हैं।
बेटी के लिए मां ने छोड़ दी नौकरी : पिया की मां ओमवती जयपुर के महावीर कैंसर अस्पताल में नर्सिंग कंपाउंडर की नौकरी करती थीं। इसी वजह से उन्होंने बेटी को नाना-नानी के पास छोड़ रखा था। बेटी का इलाज कराने के लिए ओमवती ने दिन-रात एक कर दिए। नौकरी भी छोड़ दी। पिया की मौसी अंजू व नानी सावित्री ने भी उसके इलाज में जी-जान लगा रखे थे। 6 अगस्त 2011 झुंझुनूं कलेक्टर ने पिया की मदद के लिए एक लाख रु. की सहायता राशि भेजी। लेकिन ओमवती ने इसे लेने से इनकार कर दिया। कहा कि स्कूल पर कार्रवाई नहीं होने तक राशि नहीं लेंगी। 26 मई 2012 ओमवती ने जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। दो साल बाद भी स्कूल पर कार्रवाई नहीं होने तथा प्रशासनिक रवैये के खिलाफ भूख हड़ताल की चेतावनी दी।
झुंझुनूं के जिला पुलिस अधीक्षक कैलाश चंद्र बिश्नोई ने बताया कि पिया के साथ मारपीट करने वाली शिक्षिका बुडाना हाल रीको निवासी प्रतिभा पत्नी सतवीर सिंह को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में उसकी जमानत हो गई। फिलहाल मामला कोर्ट में चल रहा है। प्रतिभा के खिलाफ पिया की मां ओमवती ने उसके खिलाफ सात जुलाई 2010 को सदर थाने में मारपीट का मामला दर्ज कराया था। उसके खिलाफ भादंसं की धारा 323 व 341 में मामला दर्ज हुआ था। जांच में धारा 325 जोड़कर एक महीने में चालान पेश कर दिया गया था।
वह काफी दिनों से सीरियस थी। उसे न्यूरो ब्लास्टोमा (कैंसर का एक प्रकार) था, जिसका इलाज असंभव था। उसे कैंसर कैसे हुआ, यह तो कहा नहीं जा सकता। –डॉ. डीपी पूनिया, डीन व प्रोफेसर महात्मा गांधी अस्पताल, जयपुर
उसे कैंसर हो गया था, जो लाइलाज था। -डॉ. श्वेता, आर एंड आर अस्पताल दिल्ली
केस में कई महीनों तक चालान नहीं हुआ, जो सरकार की कार्यशैली पर प्रश्न चिह्न लगा रहा है। यह राजनीतिक दबाव में अपराधियों को बचाने का खुला उदाहरण है। न्याय के लिए हाईकोर्ट तक गुहार कर चुके हैं। –कविता, महासचिव, पीपल्स यूनियन फोर सिविल लिबर्टीज, जयपुर
पिया के मामले को सरकार के सामने ले जाएंगे। स्कूलों में ऐसा ना हो, इसके लिए कानून में कठोरता लाने, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की गाइड लाइन का सख्ती से पालना करने की कोशिश की जाएगी। –विजय गोयल, संयोजक, राजस्थान बाल अधिकार संरक्षण साझा अभियान, जयपुर
मार की शिकार हुई पिया की स्कूल वालों ने शुरू से ही सुध नहीं ली। करीब छह महीने पहले मुख्य सचिव सीके मैथ्यू के निर्देश पर कलेक्टर जोगाराम ने परिजनों की स्कूल संचालकों से मीटिंग कराई। इसमें स्कूल संचालकों ने पिया के इलाज का खर्च उठाने का आश्वासन दिया। पिया की चाचा नवीन ने बताया कि स्कूल प्रशासन ने कई महीनों तक चिकित्सा खर्चा भी दिया था। इसके बाद पिया की सुध लेनी बंद कर दी। बकौल नवीन, पिया की मौत की सूचना देने के बाद भी अंतिम संस्कार में स्कूल प्रशासन की ओर से कोई नहीं पहुंचा।
पिया की पिटाई करने वाली शिक्षिका और स्कूल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर पेरेंट्स वेलफेयर सोसायटी की ओर से शिक्षामंत्री को ज्ञापन सौंपा गया। सोसायटी के संयोजक दिनेश कांवट ने कहा कि हमने शिक्षा मंत्री से मांग की है कि स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
हमने इलाज के लिए 15 लाख रु. दे दिए : हमने पिया के इलाज के लिए परिजनों की मदद की है। बीते दिनों में कोर्ट के निर्देश पर कलेक्टर की मौजूदगी में 15 लाख रु. देने तय हुए थे। परिजनों ने लिखकर केस वापस लेने की बात कही थी। हमने पैसे ट्रांसफर भी कर दिए। -सुरेंद्र अहलावत, संस्था संचालक
झुंझुनूं से रमेश सर्राफ की रिपोर्ट.


