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टीवी चैनल शुरू करने की दौड़ में मंत्रालय भी कूदे

नई दिल्ली : टी.वी. चैनल कारोबार की आजकल धूम मची हुई है। न केवल प्राइवेट खिलाड़ी बल्कि केन्द्र सरकार के विभाग एवं मंत्रालय तक अपना-अपना चैनल लांच करने को एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। इसके समर्थन में यह दलील प्रस्तुत की जा रही है कि सरकार विभिन्न स्कीमों एवं कार्यक्रमों के अंतर्गत जनकल्याण हेतु करोड़ों रुपए खर्च करती है,  फिर भी इन बातों की जानकारी आम लोगों तक नहीं पहुंच रही। देश में इस समय लगभग 750 टी.वी. चैनल चल रहे हैं जबकि शीघ्र ही 50 अन्य भी चालू होने वाले हैं। टी.वी. चैनल शुरू करने की दौड़ में शामिल होने वालों में कुमारी शैलजा के अंतर्गत कार्य कर रहा संस्कृति मंत्रालय सबसे ताजा है।

नई दिल्ली : टी.वी. चैनल कारोबार की आजकल धूम मची हुई है। न केवल प्राइवेट खिलाड़ी बल्कि केन्द्र सरकार के विभाग एवं मंत्रालय तक अपना-अपना चैनल लांच करने को एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। इसके समर्थन में यह दलील प्रस्तुत की जा रही है कि सरकार विभिन्न स्कीमों एवं कार्यक्रमों के अंतर्गत जनकल्याण हेतु करोड़ों रुपए खर्च करती है,  फिर भी इन बातों की जानकारी आम लोगों तक नहीं पहुंच रही। देश में इस समय लगभग 750 टी.वी. चैनल चल रहे हैं जबकि शीघ्र ही 50 अन्य भी चालू होने वाले हैं। टी.वी. चैनल शुरू करने की दौड़ में शामिल होने वालों में कुमारी शैलजा के अंतर्गत कार्य कर रहा संस्कृति मंत्रालय सबसे ताजा है।

24 घंटे चलने वाला यह प्रस्तावित चैनल देश की कला व संस्कृति को दुनिया भर में बढ़ावादेगा। जयराम रमेश के अंतर्गत ग्रामीण विकास, विलास राव देशमुख के अंतर्गत विज्ञान एवं टैक्नोलॉजी और शरद पवार के अंतर्गत कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालयों ने अपना-अपना टी.वी. चैनल शुरू करने के प्रस्तावों पर पहले ही काम शुरू कर दिया है। कपिल सिब्बल के विज्ञान एवं टैक्नोलॉजी मंत्रालय ने 24 घंटे चलने वाला मौसम चैनल लांच करने की सभी जरूरी तैयारियां कर ली थीं।

इससे आम जनता और खास तौर पर किसानों को हर समय मौसम की जानकारी उपलब्ध होनी थी लेकिन मंत्रालय की बागडोर विलास राव देशमुख के हाथ आते ही इन प्रयासों को ब्रेक लग गई। दूसरी ओर जयराम रमेश अपने प्रस्ताव पर अडिग हैं। उनका कहना है कि विभिन्न राज्यों के ग्रामीण किसानों को टी.वी. सैट और बिजली मुफ्त प्रदान की जा रही है परन्तु एक भी ऐसा चैनल नहीं है जो उनकी जरूरतों एवं अपेक्षाओं पर खरा उतरता हो। लेकिन योजना आयोग को इन प्रस्तावों की कोई विशेष ङ्क्षचता नहीं। शैलजा के संस्कृति मंत्रालय ने तो यह भी तैयारी कर ली है कि यदि उसे चैनल की मंजूरी नहीं मिलती तो वह स्वयं स्तरीय कार्यक्रम तैयार करवा कर विभिन्न टी.वी. चैनलों को भेजा करेगा। साभार : पंजाब केसरी

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