: जिला सूचना अधिकारी, उत्तराखण्ड की मुहर बनाकर फर्जीवाड़ा करने का लग चुका है आरोप : देहरादून। सिंचाई विभाग का यांत्रिक उपकरण एवं भण्डार खण्ड का कार्यालय आये दिन घोटालों के कारण चर्चाओं में बना रहता है। सूचना आयोग में भी यांत्रिक उपकरण का एक के बाद एक फर्जीवाड़ा उजागर हो रहा है। समाचार पत्रों में विज्ञापन सूचना विभाग के माध्यम से छपवाने के मामले में ‘‘जिला सूचना अधिकारी उत्तराखण्ड’’ की मुहर बनवाकर फर्जीवाड़ा करने का मामला सूचना आयोग में पकड़ा जा चुका है। जिसमें राज्य सूचना आयुक्त विनोद नौटियाल ने प्राथमिकी दर्ज करने का सुझाव देने के साथ-साथ 15 हजार जुर्माने का नोटिस जारी किया है।
उपरोक्त प्रकरण के अलावा एक अन्य फर्जीवाड़ा मुख्य सूचना आयुक्त नृप सिंह नपलच्याल की अदालत में सुनवाई के दौरान उजागर हुआ। आर.टी.आई. मिशन द्वारा 23 सितम्बर को स्पीड पोस्ट के माध्यम से एक आवेदन प्रेषित यांत्रिक उपकरण एवं भण्डार खण्ड के अधिशाषी अभियन्ता कार्यालय से तत्कालीन अधिशासी अभियन्ता बिजेन्द्र कुमार की सम्पत्ति आदि विवरण की सूचना मांगी गई थी। यांत्रिक उपकरण ने 22 सितम्बर का उपरोक्त आवेदन 22 अक्टूबर को प्राप्त होना दर्शाकर निःशुल्क सूचना प्रदान करने से इंकार कर दिया। सूचना न मिलने पर मामला आयोग की दहलीज पर पहुंचा। सुनवाई के दौरान मुख्य सूचना आयुक्त ने भी इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि स्थानीय स्पीड पोस्ट की डाक के वितरण में एक माह की अवधि कैसे लग गई। आयोग ने इस मामले में पोस्ट आफिस से रिपोर्ट मंगवाई। सीनियर पोस्ट मास्टर ने 30 मार्च को अपनी रिपोर्ट देते हुए अवगत कराया कि उपरोक्त स्पीड पोस्ट 26 सितम्बर को यांत्रिक उपकरण के कार्यालय में वितरित हो गई थी।
पोस्ट आफिस की रिपार्ट आ जाने पर यांत्रिक उपकरण कार्यालय का फर्जीवाड़ा उजागर हो गया। मुख्य सूचना आयुक्त ने इस फर्जीवाड़े पर कठोर रूख अपनाते हुए जहां लोकसूचना अधिकारी/अधिशासी अभियन्ता पर दो हजार रुपये का जुर्माना आरोपित किया वहीं अधिशासी अभियन्ता को आदेशित किया कि 26 सितम्बर को प्राप्त आवेदन को अभिलेखों में 22 अक्टूबर को दर्ज करने के लिये जिम्मेदार कार्मिकों पर कार्रवाई करें।
सुरेंद्र अग्रवाल की रिपोर्ट.


