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डा. कृष्ण कुमार रत्तू हिंदी साहित्य शिरोमणि पुरस्कार से सम्मानित

हिंदी के जाने-माने लेखक, चिंतक और मीडिया विशेषज्ञ डा. कृष्ण कुमार रत्तू को पंजाब के प्रतिष्ठित शिरोमणि साहित्यकार पुरस्कार वर्ष 2011 से सम्मानित किया गया है। शनिवार को चंडीगढ़ के पंजाब भवन में हुए राज्य स्तरीय कार्यक्रम में उन्हें यह सम्मान मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने दिया। पुरस्कार में ढाई लाख रुपए, प्रशस्ति पत्र और शाल ओढाकर सम्मानित किया गया। डा. रत्तू इससे पहले राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं। उन्होंने हिंदी और पंजाबी में पांच दर्जन से ज्यादा किताबें भी लिखी हैं। उनकी कुछ पुस्तकें देश के कई विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में भी शामिल हैं। सम्मान प्राप्ति के बाद रत्तू ने एक विशेष मुलाकात में बताया कि उन्हें हिंदी साहित्य में अनुकरणीय सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया है, यह दरअसल उनका नहीं हिंदी का ही सम्मान हुआ है। 

हिंदी के जाने-माने लेखक, चिंतक और मीडिया विशेषज्ञ डा. कृष्ण कुमार रत्तू को पंजाब के प्रतिष्ठित शिरोमणि साहित्यकार पुरस्कार वर्ष 2011 से सम्मानित किया गया है। शनिवार को चंडीगढ़ के पंजाब भवन में हुए राज्य स्तरीय कार्यक्रम में उन्हें यह सम्मान मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने दिया। पुरस्कार में ढाई लाख रुपए, प्रशस्ति पत्र और शाल ओढाकर सम्मानित किया गया। डा. रत्तू इससे पहले राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं। उन्होंने हिंदी और पंजाबी में पांच दर्जन से ज्यादा किताबें भी लिखी हैं। उनकी कुछ पुस्तकें देश के कई विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में भी शामिल हैं। सम्मान प्राप्ति के बाद रत्तू ने एक विशेष मुलाकात में बताया कि उन्हें हिंदी साहित्य में अनुकरणीय सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया है, यह दरअसल उनका नहीं हिंदी का ही सम्मान हुआ है। 

 

यह देश की अस्मिता और बदलते भारत की नई सरंचना का भी एक तरह से सम्मान है। आज हिंदी का वैश्विक परिदृश्य इसकी नई उड़ान और नई सोच को परिभाषित करता है। डा. रत्तू विभिन्न राष्ट्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में नियमित स्तंभकार भी है। सामाजिक सरोकारों के अलावा वे अन्य विधाओं पर बेबाकी से लिखने के लिए जाने जाते हैं। पंजाब के जिला होशियारपुर के रहने वाले डा.रत्तू ने अपना करियर दूरदर्शन के साथ शुरू किया। जलंधर दूरदर्शन में काफी समय रहने के बाद वे जयपुर (राजस्थान) चले  गए थे। इन दिनो ंवह चंडीगढ़ दूरदर्शन में कार्यक्रम प्रमुख के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि उनका लेखन पुरस्कारों के लिए नहीं बल्कि अनवरत चलने वाला सिलसिला है। उनकी साहित्य यात्रा इसी तरह जारी रहेगी। इन दिनों वह एक पुस्तक पर काम कर रहे हैं। बताया कि राष्ट्रभाषा के प्रचार-्प्रसार और इसके मान-सम्मान के लिए वे शुरू से प्रतिबद्ध रहे हैं।

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