Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

विविध

20 साल की रूबी ने दिल्ली की सभी राजनैतिक पार्टियों को घसीटा कोर्ट में

 

नई दिल्ली: 20 साल की रूबी आज एक ऐसा नाम बन चुकी है, जिसे दिल्ली की कोई राजनैतिक पार्टी नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती। दिल्ली विश्वविद्यालय में लॉ की फाइनल इयर की छात्रा रूबी मलिक ने कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर दिल्ली की सभी राजनैतिक पार्टियों पर आरोप लगाया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ ( डूसू ) के लिए हो रहे चुनाव में सभी राजनैतिक पार्टियां चुनावी नियम तोड़ रही हैं।

 

नई दिल्ली: 20 साल की रूबी आज एक ऐसा नाम बन चुकी है, जिसे दिल्ली की कोई राजनैतिक पार्टी नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती। दिल्ली विश्वविद्यालय में लॉ की फाइनल इयर की छात्रा रूबी मलिक ने कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर दिल्ली की सभी राजनैतिक पार्टियों पर आरोप लगाया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ ( डूसू ) के लिए हो रहे चुनाव में सभी राजनैतिक पार्टियां चुनावी नियम तोड़ रही हैं।

रूबी द्वारा कोर्ट में दाखिल की गई याचिका में कहा गया है कि 11 सितंबर को डूसू में होने वाले चुनाव में सभी राजनैतिक पार्टियों के प्रत्याशी तय-नियम और कानूनों का उल्लघंन कर रहे हैं। सभी दलों के प्रत्याशी कॉलेजों में चुनावी प्रचार-प्रसार के लिए बड़ी कार रैलियों का आयोजन कर रहे हैं। जबकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुमोदित नियमों के अनुसार, कॉलेज-स्तरीय चुनाव के लिए कोई भी प्रत्याशी अधिकतम 5 हजार रुपये खर्च कर सकता है। इसके साथ ही प्रचार सामग्री तथा नारों के लिए सार्वजनिक संपत्ति का इस्तेमाल भी नहीं किया जा सकता। इसके अलावा वाहनों का जुलूस भी छपे हुए पोस्टरों के साथ नहीं निकाला जा सकता। कॉलेज चुनाव में हाथ से बने पोस्टरों का ही प्रयोग किया जा सकता है। जबकि यहां हस्तलिखित शैली में प्रिंटिड पोस्टरों का खुलेआम प्रयोग किया जा रहा है।

   इसके साथ ही डूसू चुनाव में पहली बार शामिल होने वाली एक नई राजनैतिक पार्टी ने तो छात्रों को लुभाने के लिए तालकटोरा स्टेडियम में फ्रैशर पार्टी के नाम पर एक रॉक कसंर्ट का आयोजन भी किया था। पूरी दिल्ली डूसू चुनाव से संबंधित पोस्टरों से भरी पड़ी है। लेकिन इसके बावजूद संबंधित पक्षों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। रूबी का दावा है कि किसी भी राजनैतिक दल से उनका कोई संबंध नहीं है और न ही वह राजनीति में करियर बनाने की इच्छुक हैं। उनके मुताबिक, उनका एकमात्र मकसद यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव के दौरान सभी को बराबरी का मौका मिले, और चुनाव निर्देशों का पालन किया जाए।

 

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs

You May Also Like

ये दुनिया

रामकृष्ण परमहंस को मरने के पहले गले का कैंसर हो गया। तो बड़ा कष्ट था। और बड़ा कष्ट था भोजन करने में, पानी भी...

सोशल मीडिया

यहां लड़की पैदा होने पर बजती है थाली. गर्भ में मारे जाते हैं लड़के. राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्र में बाड़मेर के समदड़ी क्षेत्र...

दुख-सुख

: बस में अश्लीलता के लाइव टेलीकास्ट को एन्जॉय कर रहे यात्रियों को यूं नसीहत दी उस पीड़ित लड़की ने : Sanjna Gupta :...

ये दुनिया

बुद्ध ने कहा है, कि न कोई परमात्मा है, न कोई आकाश में बैठा हुआ नियंता है। तो साधक क्या करें? तो बुद्ध ने...