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…तो मनमोहन सिंह को क्यों ढो रहे हैं?

प्रदेश के गांधीवादी नेता व आमतौर पर संजीदा रहने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गत दिवस जयपुर में कांग्रेस के प्रवक्ता सम्मेलन में एक वाहियात सा बयान दिया। वो ये कि पीएम के रूप में राहुल को देश स्वीकार कर चुका है। राहुल गांधी किस्मत वाले व्यक्ति हैं, पूरा देश उन्हें स्वीकार कर रहा है। ये वाहियात इसलिए है क्योंकि इसका कोई अर्थ नहीं है। जो भी अर्थ निकाला जाएगा, वह भी वाहियात ही होगा।

प्रदेश के गांधीवादी नेता व आमतौर पर संजीदा रहने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गत दिवस जयपुर में कांग्रेस के प्रवक्ता सम्मेलन में एक वाहियात सा बयान दिया। वो ये कि पीएम के रूप में राहुल को देश स्वीकार कर चुका है। राहुल गांधी किस्मत वाले व्यक्ति हैं, पूरा देश उन्हें स्वीकार कर रहा है। ये वाहियात इसलिए है क्योंकि इसका कोई अर्थ नहीं है। जो भी अर्थ निकाला जाएगा, वह भी वाहियात ही होगा।

ओर उससे भी बड़ी बात ये कि इस प्रकार का बयान प्रवक्ताओं के सम्मेलन में दिया गया है। कल्पना की जा सकती है कि जब मुख्यमंत्री जैसे जिम्मेदार पदाधिकारी ही इस प्रकार का बयान दे रहे हैं तो प्रवक्ताओं का तो भगवान ही मालिक है।

सवाल ये उठता है कि अगर देश ने राहुल को पीएम के रूप में स्वीकार कर लिया है तो डॉ. मनमोहन सिंह क्या हैं? राहुल को प्रधानमंत्री बना कर कांग्रेस उन्हें हटा क्यों नही देती? क्यों बैठे हैं सिंह अब तक कुर्सी पर?  जीते-जी इतनी जलालत के बाद भी कुर्सी पर क्यों चिपके हुए हैं? क्या यह जलालत नहीं है कि एक शख्स, जो कि पिछले आठ साल से पीएम की कुर्सी पर बैठा हो और उसकी पार्टी के जिम्मेदार नेता यह कहें कि जनता की नजर में तो राहुल पीएम हैं?

गहलोत ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह खुद कई बार राहुल गांधी के सामने ऑफर रख चुके हैं। अब खुद उन्हें ही फैसला करना है। उनका यह कथन सरासर झूठ है। सच ये है कि मनमोहन सिंह ने कभी भी राहुल को प्रधानमंत्री पद की कुर्सी ऑफर नहीं की है। हां, इतना सच जरूर है कि वे सार्वजनिक रूप से बयान दे कर उन्हें मंत्री बनने की ऑफर दे चुके हैं, मगर राहुल अभी निर्णय नहीं कर पा रहे हैं। और उनकी इसी झिझक की वजह से राहुल के आत्मविश्वास पर संदेह जाहिर किया जाने लगा है।

गहलोत का बयान इसलिए भी गलत है क्योंकि उसका कोई आधार नहीं है। हमारे देश में ऐसा कोई सिस्टम नहीं है, जिससे कि ये पता लगाया जा सकता हो कि जनता राहुल को पीएम के रूप में स्वीकार कर चुकी है। ये भी सब को पता है कि न तो कांग्रेस संसदीय बोर्ड ने और न ही कांग्रेस कार्यसमिति ने उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में स्वीकार किया है। इस प्रकार का कोई भी प्रस्ताव अब तक नहीं आया है, स्वीकार होना तो बाद की बात है।

गहलोत का बयान इस मायने में भी गलत है कि कांग्रेस ने अब तक यह तय नहीं किया है कि आगामी चुनाव किसे प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करते हुए लड़ा जाएगा, जिस प्रकार पिछला चुनाव मनमोहन सिंह को चेहरा आगे करके लड़ा गया था। मीडिया की गप्पबाजी में जरूर राहुल का नाम आता है, मगर कांग्रेस के स्तर पर कभी भी यह तय नहीं हुआ है कि आगामी चुनाव राहुल को पीएम के रूप में प्रोजेक्ट करते हुए लड़ा जाएगा। अगर गहलोत ने अंदरखाने की खबर दे दी है तो सवाल ये भी उठ खड़ा होता है कि क्या कांग्रेस ने आगामी चुनाव में मनमोहन सिंह को खारिज करने का मानस बना लिया है?

वस्तुत: नेहरू-गांधी परिवार मात्र पर टिकी कांग्रेस के नेताओं को उसकी विरासत को सलाम करना ही होता है। और इस मिजाजपुर्सी में इस प्रकार के वाहियात बयान जारी हो जाते हैं। अलबत्ता, हाईकमान की नजर में नंबर जरूर बढ़ जाते हैं।

-तेजवानी गिरधर

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