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दक्षिण के न्‍यूज कारोबारी नेता

समाचार पत्रों के जरिए राजनीति में दखल देने वाले नेताओं के दिन अब लद से गए हैं। अगर आप इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं हैं तो इसकी गारंटी तो आपको दी ही जा सकती है कि समाचार पत्रों के कारोबारियों के लिए अब राजनीति में कोई खास जगह नहीं हैं। उत्तर और मध्य भारत के अब कुछ ही समाचार कारोबारी रह गए है जिनका प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से राजनीति में दखल है या कुछ ले देकर राजनीति करने की मजबूरी है। मजबूरी इसलिए कि अगर राजनीति उनसे दूर चली गई तो वे नंगे होकर जेल चले जाऐंगे। लेकिन जरा दक्षिण को तो देखिए।

समाचार पत्रों के जरिए राजनीति में दखल देने वाले नेताओं के दिन अब लद से गए हैं। अगर आप इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं हैं तो इसकी गारंटी तो आपको दी ही जा सकती है कि समाचार पत्रों के कारोबारियों के लिए अब राजनीति में कोई खास जगह नहीं हैं। उत्तर और मध्य भारत के अब कुछ ही समाचार कारोबारी रह गए है जिनका प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से राजनीति में दखल है या कुछ ले देकर राजनीति करने की मजबूरी है। मजबूरी इसलिए कि अगर राजनीति उनसे दूर चली गई तो वे नंगे होकर जेल चले जाऐंगे। लेकिन जरा दक्षिण को तो देखिए।

दक्षिण में समाचार कारोबारियों की राजनीति में खूब चल रही हैं। दक्षिण के चारो राज्यों में एक फार्मूला फलता फूलता दिख रहा है कि अगर किसी को राजनीति में जाना है या राजनीति को कारोबार बनाना है तो पहले उसे न्यूज का कारोबार करना होगा और वह भी चमक दमक वाले सैटेलाईट न्यूज से। साल भर पहले हमें न्यूज कारोबारी नेताओं के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी लेकिन पिछले विधान सभा चुनाव के दौरान यह साबित हो गया कि दक्षिण में राजनीति वही कर रहे हैं जो चैनल चला रहे हैं, और राजनीति इसलिए कर रहे है कि उसके जरिए देश को लूट सकें। कुछ इसी तरह का खेल करूणानिधि की बेटी कनिमोझी ने ए राजा के साथ मिलकर किया था। आज कल दोनों जेल में हैं। कपडा मंत्री दयानिधि मारन को भी सन टीवी के लिए चोरी करने या घूस लेने के आरोप में मंत्रिमंडल से गर्दनिया पड़ गई है और तय मानिए इस घूसखोर नेता को भी जेल जाना है। मारन संचार मंत्री रहते हुए काफी कुछ गुल खिलाए थे, अब जांच के घेरे में हैं।

आइए, आपको ले चलते हैं दक्षिण के उन चारो राज्यों की ओर, जहां न्यूज कारोबारियों की अपनी धमक है और उनकी विशेष राजनीति शैली भी। हैदराबाद शहर को तो आप जानते ही होंगे और शायद घूमा भी होगा। यही पर चारमीनार है और मजे की बात आप को बता दें कि इस इलाके में दुनिया के सभी देशों की करेंसियां यहां मिल जाती हैं। और हैदराबाद से पहले का इलाका है सिकंदराबाद। ये दोनों इलाके को आप अखबार और चैनलों के हब सेंटर कह सकते हैं। अखबारों के पुराण पर मत जाइए। यहां चल रहे चैनलों को गिनती कर आप हांफ भी सकते हैं। और अगर नहीं हांफेंगे तो आप यह सोचने को मजबूर तो हो ही जाऐंगे कि आखिर इन चैनलों के मालिक कौन है, उनके आय के स्त्रोत क्या हो सकते हैं और इन चैनलों के दर्शक कौन है?

खैर, आंध्रा में कोई 14 न्यूज चैनल हैं। 2 चैनलों को छोड़ दें तो बाकी के सारे चैनल के मालिक- संपादक राजनीति करने वाले हैं । और राजनीति भी ऐसी वैसी नहीं, दुश्मनी की हद से पार। टीडीपी के नेता हैं चंद्रबाबू नायडू। नायडू जहां भी जाते हैं और जो भी बोलते हैं उसका सीधा प्रसारण होता है। हालाकि ये प्रसारण राज्य के सभी चैनल नहीं करते। एबीएन, आंध्रा ज्योति, इटीवी2, स्टूडियो एन और महा टीवी नायडू के समर्थक हैं और कहा जाता है कि इन चैनलों में नायडू जी की अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी भी। इसके अलावा इन चैनलों के जो मालिक सामने दिख रहे हैं वे या तो टीडीपी की राजनीति करते हैं या फिर टीडीपी का प्रचार। इधर जब से जगनामहन रेड्डी की राजनीति शुरू हुई है राज्य के कई चैनल उनके पक्ष में उतर आए हैं। साक्षी, एन टीवी और टीवीएस चैनल या तो नायडू और उससे जुड़ी खबर को दिखाते नहीं है और दिखाते भी हैं तो काट छांट कर। पिछले महीने किसानों के मसले पर नायडू भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनके समर्थक चैनलों ने जहां उनके सांस लेने और सांस छोड़ने तक की खबरों का लाइव किया वहीं जगन मोहन समर्थक चैनलों ने उनके भूख हड़ताल को महज एक नाटक करार दिया।

उधर, जब जगन मोहन ने जब भूख हड़ताल किया तो उनके समर्थक चैनलों ने ऐसा समा बांधा मानो इस भूख हड़ताल से पूरी दुनिया उलट जाएगी। और नायडू के समर्थक चैनल जगनमोहन के भूख हड़ताल को महज दिखावा बता रहे थे। हैदराबाद के एक स्थानीय संपादक इस मसले को थोड़ा और रोचकपूर्ण बताते हैं। कहते हैं कि कभी कभी यहां के चैनलों पर आ रही खबरों को देखकर तो ऐसा लगता है कि उन चैनलों की खबरों को न लिया जाए तो अगले दिन उनका अखबार ही पीट जाएगा। हम अखबार वाले भी कई बार भ्रमित हो जाते हैं। इसी आंध्रा में एक चैनल राज टीवी के नाम से है। इसके मालिक चंद्रशेखर राव हैं। इनका चैनल तेलंगाना से आगे नहीं देखता। इस चैनल की शुरुआत तेलंगाना से शुरू होती है और देर रात इसी पर जाकर खत्म हो जाती है। तेलंगाना राज्य के समर्थन में खड़ा यह चैनल तेलंगाना के विरोध करने वालों का खबर लेता है और इन सबके बदले में चैनल की कमाई की कल्पना आप नहीं कर सकते। तेलंगाना समर्थकों की सहानुभूति पाकर राव साहब की राजनीति भी खूब फल फूल रही है।

और तामिलनाडु की तो बात ही कुछ और है। उत्तर भारत में बटमार राजनेताओं के कारण राजनीति कलंकित हुई है लेकिन तामिलनाडु के अधिकतर राजनेता को आप सुल्ताना डाकू कह सकते हैं। सुल्ताना डाकू की एक खूबी थी- अमीरों को लूटना और गरीबों को बांटना। यही काम तामिलनाडु के सफेदपोश लोग कर रहे हैं। झकास सफेद कपड़ों में लिपटे यहां के नेताओं को देखकर भले ही आप ललचाते होंगे लेकिन इनके मन बडे़ ही काले होते हैं। जनता को ठगने की जितनी कला यहां के नेताओं को ईश्वर ने दी है वह कहीं और नहीं। यह कारोबारी नेताओं को ही कमाल है कि करूणानिधि की बेटी कनीमोझी क्लैग्नार टीवी के लिए दलाली करने के आरोप में ए राजा के साथ तिहाड़ जेल में बंद हुई और अब सन टीवी के लिए दलाली करने के खेल में ठिगना सुंदर और सलोना दिखने वाला केंद्रीय मंत्री और द्रमुक नेता दयानिधि मारन को अपना पद छोड़ना पड़ा हैं। इस डपोरशंखी नेता की नंगई जेल जाने के बाद और खुल कर सामने आएगी। मामला यहीं तक नहीं है। चेन्नई में राजनीति कारोबार के रूप में पसरी है। और राजनीति के इस कारोबार में यहां की तमाम दल शामिल हैं और इन दलों के सभी नेता भी।

इस कारोबार का खुलासा 2009 के लोक सभा चुनाव के दौरान एक संगठन ने केबल के जरिए भी कर चुका है। केबल में दिखाया गया था कि किस तरह तामिलनाडु की सभी राजनीतिक पार्टियां वोट के बदले नोट का इस्तेमाल करती हैं। करूणानिधि और मोहतरमा जयललिता ने तो अभी हाल के विधान सभा चुनाव में लोगों को रिझाने के लिए टीवी, मंगलसूत्र आदि देने की घोषणा की थी। इस राज्य में पैसों के आधार पर खबरें बनती हैं और इस कारोबार में नेता से लेकर पत्रकार एक साथ शामिल होते हैं। इस राज्य में टीवी केबल का सारा काम कुछ नेताओं के ही कब्जे में है। मारन बंधुओं का केबल कारोबार पर एकाधिकार है और इसके लिए नेता- पत्रकार मिलकर एक साथ जनता को लूटते हैं।

कर्नाटक में आजकल न्यूज कारोबारी लोग ही राजनीति को हांक रहे हैं। एक ओर रेड्डी बंधुओं का बोलबाला है तो दूसरी ओर कुमारस्वामी के पैंतरे। रेड्डी बंधु जनसारी न्यूज चलाते हैं और प्रदेश की जनता को अपने मतलब लायक खबरों से वाकिफ कराते रहते हैं। रेडडी बंधुओं के खेल से आजीज आ चुके कुमारस्वामी अब खुद का या अपने किसी आदमी के नाम पर चैनल लाने की तैयारी कर रहे हैं। और अगर केबल के बारे में बात करेंगे तो आपको बता दें कि बेलारी का केबल नेटवर्क जहां रेड्डी बंधुओं के हाथ में है वहीं हसन इलाके का केबल नेटवर्क कुमारस्वामी के इशारे पर चलता है। आलम ये है कि ये दोनों महानुभाव जनता को वही कुछ दिखाना चाहते हैं जिसमें उनका फायदा होता है। कर्नाटक में कांग्रेस के एक नेता भी खबरों के कारोबारी हैं और इनका भी अपना अंदाज है। सतीश जर्की नामक इस नेता का समय नाम से चैनल चलता है और इनकी मर्जी के बगैर खबरें नहीं चलती।

सुदूर दक्षिण के हरे भरे राज्य केरल को देखकर आप जिस तरह रसिक मिजाज के हो जाते हैं, ठीक उसी तरह वहां की जातीय और भ्रष्ट राजनीति को देखकर आप उल्टी के शिकार हो सकते हैं। इसे आप चंद्रमा में दाग भी कह सकते हैं। राज्य छोटा है लेकिन दर्जनों चैनल यहां चल रहे हैं। और सबके सब

अखिलेश अखिल

ठीक ठाक हालत में। यहां सात चैनल पहले से हैं जो परोक्ष या अपरोक्ष रूप से नेताओं के हैं या यह कहें कि चैनल चलाने वाले नेतागिरी कर रहे हैं। इंडियन मुस्लिम लीग, मातृभूमि, कुमौदी और मंगलम चैनल लेकर आ रहे हैं तो करूणाकरण के बेटे मुरलीधरन भी एक चैनल की योजना पर काम कर रहे हैं। दक्षिण के राज्यों में चैनल एक व्‍यवसाय ही नहीं है, यह राजनीति में आने का या इसके जरिए राजनीति करने का मुख्य रास्ता है। जांच का विषय यह है कि इन चैनलों के लिए धन कहां से आ रहे हैं।

वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश अखिल बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के निवासी हैं. पटना-दिल्ली समेत कई जगहों पर कई मीडिया हाउसों के साथ कार्यरत रहे. इन दिनों हमवतन से जुड़े हुए हैं. मिशनरी पत्रकारिता के पक्षधर अखिलेश अखिल से संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है.

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