अपने जीवनकाल में सैंकड़ों दलितों और पिछड़ों की नरबलि देने का आरोपी ब्रह्मेश्वर मुखिया की आज हत्या कर दी गई. मिल रही जानकारी के अनुसार आज तड़के करीब 4 बजे वह बिहार के आरा जिले स्थित अपने आवास से बाहर टहलने के लिए निकला था. पहले से ही घात लगाये बैठे अपराधियों ने उस पर गोलियों की बारिश कर दी. ब्रह्मोश्वर को लगभग 40 गोलियां लगी हैं. अचानक हुए इस हमले में मुखिया की मौत घटनास्थल पर ही हो गयी. घटना की पुष्टि करने हुए आरा के एक वरीय पुलिस अधिकारी ने बताया कि ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या गोली मारकर कर दी गयी. मुखिया की हत्या के बाद गुस्साए समर्थकों ने जिले में कई जगह उपद्रव किया, जिसके बाद अतिरिक्त सुरक्षाबलों को तैनात कर दिया गया है. पुलिस के अनुसार हत्या से आक्रोशित लोग आरा में जमकर हंगामा कर रहे हैं. इस दौरान कई वाहनों के शीशे तोड़ दिए गए और सड़क जाम कर दिया गया. पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार विधि व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल मंगाया गया है.
ब्रह्मेश्वर सिंह उर्फ मुखिया ने ही रणबीर सेना की स्थापना की थी. ब्रह्मेश्वर की सीपीआई (एमएल) से पुरानी रंजिश थी. ब्रह्मेश्वर लम्बे समय तक जेल में बंद रहने के बाद हाल ही में रिहा हुए थे. रणबीर सेना बिहार में जाति के मुद्दे पर नरसंहार से जुड़ा रहा है और इसमें ब्रह्मेश्वर सिंह का बड़ा हाथ रहा था. ब्रह्मेश्वर की हत्या के बाद माहौल गरमाने के आसार हैं. फिलहाल पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है. ब्रह्मेश्वर सिंह को राज्य में हुए 22 नरसंहार के मामले में 2002 में पटना से गिरफ्तार किया गया था. ब्रह्मेश्वर को जहानाबाद की अदालत से जुलाई 2011 में जमानत मिल गई थी जिसके बाद उसे आरा के जेल से बरी कर दिया गया था.
रणवीर सेना की स्थापना 90 के दशक में मध्य बिहार के भोजपुर जिले में की गई थी. यह संगठन नक्सलियों के आतंक से बचने के लिए प्रतिरक्षा के रूप में बनाया गया था. इस संगठन के लोगों ने गांव-गांव जाकर किसानों को नक्सलियों के अत्याचारों के खिलाफ उठ खड़े होने के लिए प्रेरित किया. शुरुआत में इनके साथ लाईसेंसी हथियार वाले लोग ही जुटे, फिर अवैध हथियारों का जखीरा भी जमा होने लगा. गया, औरंगाबाद, जहानाबाद, भोजपुर सहित मध्य बिहार में इसका दबदबा बढ़ने लगा. जिस समय रणवीर किसान संघ बना उस वक्त नक्सलियों ने मध्यम और लघु किसानों के खिलाफ आर्थिक नाकेबंदी लगा रखा था. करीब पांच हजार एकड़ जमीन परती पड़ी थी, खेती पर रोक लगा दी गई थी और मजदूरों को खेतों में काम करने से जबरन रोक दिया जाता था. कई गांवों में फसलें जलाई जा रही थीं और किसानों को शादी-ब्याह जैसे समारोह आयोजित करने में दिक्कतें आ रही थी. इन स्थितियों ने जमीदारों को एकजुट होकर प्रतिरक्षा करने के लिए माहौल तैयार किया. ब्रह्मेश्वर मुखिया पर 3 दर्जन से ज्यादा नरसंहारों का आरोप है. ब्रह्मेश्वर मुखिया 9 महीने पहले ही जेल से छूटकर आया था.
1990 के दौर में जहानाबाद, औरंगाबाद और नवादा इलाके में हुए कई नरसंहारों के लिए रणबीर सेना और ब्रह्मेश्वर मुखिया को ही जिम्मेदार माना जाता है. 1996 में लक्ष्मणपुर बाथे में 61 दलितों की हत्या की गई थी. इस नरसंहार का मास्टरमाइंड भी ब्रह्मेश्वर मुखिया को ही माना जाता है. लेकिन बीते सालों में इसका आधार खत्म हो गया था. 2002 में मुखिया की गिरफ्तारी के बाद से संगठन धराशायी हो चुका था.


