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दामिनी की ऊर्जाशक्ति का नववर्ष!

प्रदूषित मानसिकता की शिकार ‘दामिनी’ दमक कर मानवीय चेतना को अपरिमित ऊर्जा-शक्ति देकर विलीन हो गई, जो नववर्ष 2013 के नव प्रभात की सुखद उमंग लेकर आ रहा है, जो मानसिक प्रदूषण को क्षार-क्षार कर सके। दामिनी का अर्थ है- बिजली, जिसकी ऊर्जाशक्ति असीम होती है। घनघोर घटा के बीच दमककर जब दामिनी गिरती है, तो अपनी ऊर्जाशक्ति से वातावरण को झकझोर देती है, ऐसा ही वर्ष 2012 के अंतिम दौर में चिकित्सा विज्ञान की छात्रा दामिनी आसुरी प्रवृत्ति की प्रदूषित सामाजिक चेतना की शिकार होकर शांत हो गई। विद्युत-छंटा की प्रतीक छात्रा दामिनी की ऊर्जा-शक्ति ने समूचे मानव समाज को झकझोर दिया। आज नव-वर्ष के स्वागत में दामिनी की ऊर्जा क्या मानवीयता की सुप्त-चेतना जागेगी। वर्ष 2012 के अंतिम पखवाड़े में कितनी ही ‘दामिनियां’ उस दामिनी के बाद अमानवीयता के मानसिक प्रदूषण की शिकार हुई। स्वार्थ और महत्वाकांक्षा से सराबोर राजनैतिक कारोबारियों से व्यवस्था परिवर्तन की उम्मीद छोड़कर अब नववर्ष की नूतन बेला में शक्ति स्वरूपा दामिनियों (महिला-वर्ग) को ही खड्ग और खप्पर लेकर अपने वास्तविक रूप में आना होगा।

प्रदूषित मानसिकता की शिकार ‘दामिनी’ दमक कर मानवीय चेतना को अपरिमित ऊर्जा-शक्ति देकर विलीन हो गई, जो नववर्ष 2013 के नव प्रभात की सुखद उमंग लेकर आ रहा है, जो मानसिक प्रदूषण को क्षार-क्षार कर सके। दामिनी का अर्थ है- बिजली, जिसकी ऊर्जाशक्ति असीम होती है। घनघोर घटा के बीच दमककर जब दामिनी गिरती है, तो अपनी ऊर्जाशक्ति से वातावरण को झकझोर देती है, ऐसा ही वर्ष 2012 के अंतिम दौर में चिकित्सा विज्ञान की छात्रा दामिनी आसुरी प्रवृत्ति की प्रदूषित सामाजिक चेतना की शिकार होकर शांत हो गई। विद्युत-छंटा की प्रतीक छात्रा दामिनी की ऊर्जा-शक्ति ने समूचे मानव समाज को झकझोर दिया। आज नव-वर्ष के स्वागत में दामिनी की ऊर्जा क्या मानवीयता की सुप्त-चेतना जागेगी। वर्ष 2012 के अंतिम पखवाड़े में कितनी ही ‘दामिनियां’ उस दामिनी के बाद अमानवीयता के मानसिक प्रदूषण की शिकार हुई। स्वार्थ और महत्वाकांक्षा से सराबोर राजनैतिक कारोबारियों से व्यवस्था परिवर्तन की उम्मीद छोड़कर अब नववर्ष की नूतन बेला में शक्ति स्वरूपा दामिनियों (महिला-वर्ग) को ही खड्ग और खप्पर लेकर अपने वास्तविक रूप में आना होगा।

देवासुर संग्राम में शक्ति (नारी) ही चंडी-दुर्गा के रूप में प्रकट होती है। आसन्न नववर्ष विकराल दामिनी-प्रकोप वर्ष बनेगा। जहां शक्ति को अशक्त भोग्या अबला मानकर कुदृष्टि डालने वाले ‘आसुरी-संतति’ का दमन उसी शक्ति के द्वारा किया जायेगा। नारी सशक्तीकरण का राग अलापना बंद हो, और ‘‘आंचल में दूध और आंखों में पानी’’ का गान करते हुए मात्र शक्ति को मात्र भोग्या मानना छोड़ो। एक दामिनी की अजर-अमर आत्मा समूचे नारी-समाज में असीम ऊर्जावान् चेतना के साथ विद्यमान होकर ऐसा तांडव करेगी, जो नववर्ष 2013 ही नये युग का पहला अध्याय होगा। यदि अब भी शक्ति समाज ने आत्म-तत्व से साक्षात्कार नहीं किया और अवला ही बनी रही, तो कितनी ही दामिनियां दागी जाती रहेंगी।

लेखक देवेश शास्‍त्री पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं.

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