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दिग्विजय से नहीं, अब अहमद पटेल से पालिटिक्स सीखेंगे राहुल गांधी

उत्तर प्रदेश की करारी हार के बाद कांग्रेस आलाकमान ने टीम राहुल की कार्यशैली से नाराज होकर राहुल को सुरक्षित हाथों में सौंपने की तैयारी कर रहा है। विधानसभा चुनाव के बाद दिग्विजय सिंह के हाथ से राहुल की बागडोर वापस ले ली गई है और अब राहुल गांधी की बागडोर अनुभवी अहमद पटेल के हाथों में सौंप दी गई है। सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल दस जनपथ के सबसे ताकतवर आदमी माने जाते हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश चुनाव के वक्त जब दिग्विजय सिंह ने राहुल पर डाका डाला और उन्हें ले उड़े तो अहमद चुपचाप देखते रहे। बताते हैं कि जिस दिन चुनाव परिणाम आये और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की हार हुई उस दिन कांग्रेस में एक खेमे ने खुशियां मनाई थीं. ऐसा इसलिए क्योंकि दिग्विजय के हाथ से राहुल को निकालने का मौका मिल गया था। वह मौका आ गया और अब दस जनपथ के भविष्य की कमान भी अहमद पटेल के हाथ में आ गई है।

उत्तर प्रदेश की करारी हार के बाद कांग्रेस आलाकमान ने टीम राहुल की कार्यशैली से नाराज होकर राहुल को सुरक्षित हाथों में सौंपने की तैयारी कर रहा है। विधानसभा चुनाव के बाद दिग्विजय सिंह के हाथ से राहुल की बागडोर वापस ले ली गई है और अब राहुल गांधी की बागडोर अनुभवी अहमद पटेल के हाथों में सौंप दी गई है। सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल दस जनपथ के सबसे ताकतवर आदमी माने जाते हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश चुनाव के वक्त जब दिग्विजय सिंह ने राहुल पर डाका डाला और उन्हें ले उड़े तो अहमद चुपचाप देखते रहे। बताते हैं कि जिस दिन चुनाव परिणाम आये और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की हार हुई उस दिन कांग्रेस में एक खेमे ने खुशियां मनाई थीं. ऐसा इसलिए क्योंकि दिग्विजय के हाथ से राहुल को निकालने का मौका मिल गया था। वह मौका आ गया और अब दस जनपथ के भविष्य की कमान भी अहमद पटेल के हाथ में आ गई है।

सुना जा रहा है कि राहुल की युवा उर्जा और पटेल जैसे अनुभवी व वफादारों के भरोसे कांग्रेस 2014 में होने वाले लोकसभा की तैयारी करने जा रही है। इसके लिए अब तक दो बार बैठकें की जा चुकी हैं और पिछले एक महीने से राहुल गांधी को नये सिरे से तैयार करने की कवायद जारी है। राहुल गांधी के पब्लिक अपियरेन्स पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। अब राहुल जब मैदान में होंगे तो अहमद पटेल की कथनी को करनी में बदलने की तैयारी के साथ होंगे। इसलिए इंतजार करिए और देखिए कि अहमद भाई के नेतृत्व में राहुल गांधी क्या नया गुल खिलाते हैं।

अगर एक ओर राहुल को अखिलेश बनाने की तैयारी है तो दूसरी ओर अखिलेश मुख्यमंत्री बनते ही राहुल की तर्ज पर काम कर रहे हैं। अखिलेश द्वारा उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते ही उनकी युवा टीम अब पार्टी पर हावी हो रही है। अखिलेश के साथ उनके रेडिओ जॉकी मित्र हर उस जगह फोटो में दिखाई देते हैं, जहां उनका होना कई सवालों को जन्म देता है। उदाहरण के तौर पर अखिलेश जब प्रधानमंत्री से पहली बार मिलने गए तो वहां भी यह सज्जन साथ पाए गए। वही हाल पार्टी के एक युवा प्रवक्ता का है, जो स्वयं को प्रोजेक्ट करने में लगा रहता है। समाजवादी पार्टी की नींव मजबूत करने वाले पुराने समाजवादियों को यह बात सताने लगी है कि सालों की मेहनत से जिस पार्टी को उन्होंने बढ़ाया उस का हश्र कांग्रेस जैसा न हो, क्योंकि कांग्रेस की युवा टीम, टीम राहुल ने ही कांग्रेस का उत्तर प्रदेश में बंटाधार किया।

लेखक अशोक वानखेड़े वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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