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दिसपुर की हिंसक घटना के पीछे सरकारी साजिश

गुवाहाटी। बुधवार को हुए हिंसक प्रदर्शन की भर्त्सना करते हुए गुवाहाटी माटी पट्टाकरण संग्राम समिति ने कहा है कि इस घटना के पीछे एक गंभीर साजिश है। संगठन ने इस साजिश में राज्य सरकार के शामिल होने की आशंका भी जताई है। संगठन का मानना है कि मामले की दिशा को बदल देने के
लिए सरकार घटना को प्रश्रय दे सकती है। आज यहां गुवाहाटी प्रेस क्लब में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में समिति के अध्यक्ष प्रणव गोस्वामी तथा  सचिव प्रवीण ज्योति कलिता ने घटना को लेकर कृषक मुक्ति संग्राम समिति के नेता अखिल गोगोई की कड़ी निंदा की। वहीं इस पूरे घटनाक्रम के पीछे सरकारी साजिश की आशंका भी व्यक्त की।

गुवाहाटी। बुधवार को हुए हिंसक प्रदर्शन की भर्त्सना करते हुए गुवाहाटी माटी पट्टाकरण संग्राम समिति ने कहा है कि इस घटना के पीछे एक गंभीर साजिश है। संगठन ने इस साजिश में राज्य सरकार के शामिल होने की आशंका भी जताई है। संगठन का मानना है कि मामले की दिशा को बदल देने के
लिए सरकार घटना को प्रश्रय दे सकती है। आज यहां गुवाहाटी प्रेस क्लब में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में समिति के अध्यक्ष प्रणव गोस्वामी तथा  सचिव प्रवीण ज्योति कलिता ने घटना को लेकर कृषक मुक्ति संग्राम समिति के नेता अखिल गोगोई की कड़ी निंदा की। वहीं इस पूरे घटनाक्रम के पीछे सरकारी साजिश की आशंका भी व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि अखिल गोगोई ने पूरे मामले को एक दूसरे तरफ मोड दिया है और संभव है कि इसमे सरकार की भी साजिश हो। उन्होंने कहा कि उनका संगठन करीब दो दशकों से माटी पट्टा की मांग को लेकर गणतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहा है,  लेकिन बुधवार को जो कुछ भी हुआ वह इस मांग के मायने को बदल दिया है। श्री गोस्वामी ने कहा कि अब सरकार भूमिहीनों को जमीन देने की बात कह कर माटी पट्टा की मांग का दबाने की कोशिश में जुट गई है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास कोई भूमि नीति नही है और यही कारण रहा कि कुछ संगठनों के बहकावे में आकर लोग प्रदर्शन के दौरान हिंसक हो गए। उनका यह भी कहना था कि प्रदर्शन करने वाला संगठन असंगठित लोगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे,  जिसके कारण उनका नियंत्रण नहीं रहा और ऐसे लोग जो हिंसक घटनाओं को बढ़ावा दे रहें हों वे कैसे समाज के लोगों का नेतृत्व दे सकते हैं।

श्री गोस्वामी ने सरकार से एक भूमि नीति तय करने की मांग करते हुए कहा कि सरकार जब चाहती है तब किसी को जमीन आवंटित कर देती है और जब चाहती है तो हटाना शुरू कर देती है। उनका कहना था कि नगर में कृत्रिम बाढ़ का कारण सरकार पहाड़ों का अतिक्रमण बता रही है जबकि सच्चाई यह है कि तलाबों और जलाशयों को आवंटित कर देने के कारण जलमाव हो रहा है। उन्होंने यहां कहा कि हितेश्वर सइकिया के जमाने में सबसे पहले मणि कुमार सुब्बा और केसी दास कामर्स कालेज को जलाशय की जमीन देने की शुरुआत हुई थी जो अब तक चल रही है और जब तक इससे रोका नहीं जाएगा तब तक कृत्रिम बाढ की समस्या खत्म नहीं होगी।

गुवाहाटी से नीरज झा की रिपोर्ट.

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