आपको मैं एक गंभीर विषय से अवगत कराना चाहता हूँ | भारत में कई विदेशी कंपनियां है जो दूरसंचार की सेवाएं प्रदान करती हैं | लेकिन प्राय: देखा गया है की भारत में जो भी सेल्यूलर कंपनियां हैं वो ग्राहकों को सेवा लेने से पहले ढेरों झूठे वचन देकर अपने जाल में फांसते हैं और फिर किसी न किसी बहाने से जनता का पैसा लूटते रहते हैं |
सबसे दुखद बात तो ये है की अवैध तरीके से ग्राहकों से बिल के भुगतान में किसी भी सरकारी कर्मचारी के ओहदे की पहचान देकर लोगों को डराया जाता है धमकाया जाता है | ग्राहक के अदालतों के दरवाजे खटखटाने पर भी कोई सुनवाई नहीं होती, ऐसा बहुत बार देखा गया है | हमारे देश में चल रहे ब्यूरोक्रेसी के होते हुए आम आदमीको इन्साफ समय पर मिले ये तो शायद ही मुमकिन है | कुछ दिनों पहले ही एक बड़ा ही अजीब वाकिया हुआ कि मेरे किसी मित्र ने आइडिया सेल्यूलर कम्पनि से एक सिम कार्ड ख़रीदा था, बाद में उनकी माली हालत बिगड़ने की वजह से उन्हें शहर छोड़ना पड़ा | हालाकि उनका कोई भी बकाया नहीं था |
रेफ़रेन्स में मेरा नंबर होने की वजह से ३ साल बाद मुझे दिल्ली से फ़ोन नंबर ०११६५८३१५३० से फोन आता है | और सामने से एक महोदय बोलते है की मैं सब इन्स्पेक्टर शशिकांत इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट डिस्ट्रिक कोर्ट दिल्ली से बोल रहा हूँ | आप के मित्र के नाम सेक्शन ३७ के तहत केस दर्ज हुआ है जिसका केस नंबर १५९/१० है | अगर आप अपने इस मित्र को हाजिर नहीं करते हैं तो हम आप पर भी कार्यवाही करेंगे | आई.डी.या कंपनी ने २०००००/- का क्लेम किया है, अगर आप इस मुसीबत से छुटकारा चाहते हो तो हमें उनका एड्रेस दें वर्ना हमारे वकील आर.के.शर्मा जो हाईकोर्ट दिल्ली से हैं, से संपर्क कर इस विषय को कोर्ट के बाहर सुलझाएं तो आपके लिये अच्छा होंगा वर्ना हम आपको उठा ले जायेंगे |
इस तरह से कई बार धमकी मिलने लगी, ना तो उन्हें बोलने की तहजीब थी और नाही उन्हें इस का लिहाज़ था की सामने बात कर रहा व्यक्ति कोई अपराधी नहीं है | तब हमने फ़ोन नंबर ०११६५८३१५३० के विषय में गूगल पर सर्च किया तो जानने को मिला की इस फ़ोन नंबर के खिलाफ २००९ से अवैध उपयोग और डराने धमकाने के ग्राहक सुरक्षा कोर्ट में कई मामले दर्ज हैं | लेकिन इस नंबर के उपयोगकर्ता के खिलाफ आज तक कोई भी कार्यवाही नहीं की गई, ये बड़े ही आश्चर्य की बात है | ऐसी कंपनियों के खिलाफ क्यों कोई ऐजेंसी कदम नहीं उठाती ये सचमुच सोचने का विषय है | भारत ने दिए हमें संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन कर ऐसी कंपनियां किस कानून का पालन करते हैं ये समझ में नहीं आता | लोगों को गलत जानकारी दे समाज में भय और उपद्रव फैला कर किस का भला कर रहे हैं। ये सच में बेहद शर्म की बात है | हमारा कानून इन जैसों के खिलाफ कोई कड़ा कदम नहीं उठाती जिससे की आम नागरिक जो इस देश के सर्वोपरि हैं और जिनके टैक्स से इस देश का तंत्र चलता है उन्हें ऐसे लोग और ऐसी एजेंसीओं से निजात मिल सके | स्वतंत्रता का ये कैसा घिनौना स्वरुप है जो सरेआम कानून का उल्लंघन होते देख भी मौन है |


