केंद्र के लोगों की कारस्तानियों के चलते सुप्रीम कोर्ट से आए दिन लगने वाले फटकार ने आखिरकार सालिसीटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम को निगल ही लिया. इन फटकारों से आहत सुब्रमण्यम ने अपना इस्तीफा वापस नहीं लिया. वे काफी प्रयास के बाद भी नहीं माने. उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है. कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की ऐसी की तैसी करते हुए उसकी मंशा पर भी सवाल उठाया था. गोपाल सुब्रमण्यम पर केंद्र सरकार का पक्ष मजबूती से न रखने का आरोप भी लगा था, उनकी आलोचना भी की जा रही थी. जिसके चलते वे काफी आहत हुए थे. इधर, कई मामलों में सरकार के रवैये को लेकर सुप्रीम कोर्ट केंद्र को कई बार फटकार लगा चुका था.
इसके बाद ही सालिसीटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम ने सरकार से अपने इस्तीफे की पेशकश कर दी. बताया जा रहा है कि सुब्रमण्यम के इस्तीफा देने की मूल वजह टेलीकॉम मंत्रालय में कपिल सिब्बल के मामले में सुनवाई के लिए दूसरे वकील रोहिंगटन नरीमन की सेवाएं लेने का फैसला रहा. रिलायंस को फायदा पहुंचाने का आरोप झेल रहे कपिल सिब्बल के मामले को नरीमन देखेंगे. इस फैसले से ही गोपाल सुब्रमण्यम काफी आहत थे. इसके बाद ही इन्होंने पीएम और कानून मंत्री को अपना इस्तीफा भेज दिया था.
कानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने सुब्रमण्यम के इस्तीफे को नामंजूर कर दिया था. परन्तु सुब्रमण्यम अपना इस्तीफा किसी भी कीमत पर वापस लेने को तैयान नहीं हुए. प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह के समझाने और राष्ट्रपति की सलाह के बावजूद सालिसीटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम ने अपना इस्तीफा वापस नहीं दिया. अपने जवाब में उन्होंने इतना ही कहा कि अपने पद की गरिमा को बरकरार रखने के लिए उन्होंने इस्तीफा देना मुनासिब समझा. रविवार को उन्होंने राष्ट्रपति से भी लगभग 45 मिनट तक मुलाकात की थी.


