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नामधारी मामले में सीबीआई जांच से पल्‍ला क्‍यों झाड़ रहे हैं सीएम?

देहरादून। पोंटी चड्ढा हत्याकांड को लेकर अब कांग्रेस में घमासान तेज हो गया है। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री प्रीतम सिंह ने जहां विधानसभा के अन्दर इस मामले में सूबे के कुछ अफसरों की संलिप्तता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सीबीआई जांच की मांग उठाकर भूचाल मचा दिया था, वहीं प्रीतम सिंह की इस मांग के 24 घंटे बाद ही प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस हत्याकांड में प्रदेश के अफसरों को क्लीन चिट देते हुए यह मामला उत्तराखण्ड का न होकर दूसरे प्रदेश का है, कहकर सीबीआई जांच कराने से साफ इंकार कर दिया। जबकि मामला उत्तराखण्ड से भी जुड़ा है क्योंकि नामधारी जैसा शख्स उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक आयोग का पूर्व अध्यक्ष था। और पिछली भाजपा सरकार में उसे नियुक्त किया गया था। और जब पोंटी हत्याकांड जैसे हाईप्रोफाइल मामले में नामधारी का नाम आया तो तुरन्त सरकार ने किरकिरी से बचने के लिए नामधारी को अध्यक्ष पद से निकाला दिया और जिस मामले ने प्रदेश की सियासत में तूफान मचा रखा है।

देहरादून। पोंटी चड्ढा हत्याकांड को लेकर अब कांग्रेस में घमासान तेज हो गया है। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री प्रीतम सिंह ने जहां विधानसभा के अन्दर इस मामले में सूबे के कुछ अफसरों की संलिप्तता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सीबीआई जांच की मांग उठाकर भूचाल मचा दिया था, वहीं प्रीतम सिंह की इस मांग के 24 घंटे बाद ही प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस हत्याकांड में प्रदेश के अफसरों को क्लीन चिट देते हुए यह मामला उत्तराखण्ड का न होकर दूसरे प्रदेश का है, कहकर सीबीआई जांच कराने से साफ इंकार कर दिया। जबकि मामला उत्तराखण्ड से भी जुड़ा है क्योंकि नामधारी जैसा शख्स उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक आयोग का पूर्व अध्यक्ष था। और पिछली भाजपा सरकार में उसे नियुक्त किया गया था। और जब पोंटी हत्याकांड जैसे हाईप्रोफाइल मामले में नामधारी का नाम आया तो तुरन्त सरकार ने किरकिरी से बचने के लिए नामधारी को अध्यक्ष पद से निकाला दिया और जिस मामले ने प्रदेश की सियासत में तूफान मचा रखा है।

अब सवाल यह उठता है कि जब मामला उत्तराखण्ड से जुड़ा है तो आखिर क्यों मुख्यमंत्री इस मामले को दूसरे प्रदेश का बताकर इससे पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहे हैं? वहीं दिल्ली पुलिस इसकी जांच में जुटी है अगर दिल्ली पुलिस की जांच में उत्तराखण्ड के अफसर और नेता दोषी पाए गए तो क्या तब सरकार की इस मामले में किरकिरी नहीं होगी? जबकि सरकार में शामिल मंत्री द्वारा इसकी सीबीआई जांच की मांग उठाई गई है। फिर भी मुख्यमंत्री इस मामले से क्यों अपना हाथ पीछे खींचने की कोशिश कर रहे हैं? चाहे कुछ भी हो मुख्यमंत्री के इस मामले से बचने से यह मामला अब सवालों का विषय बन गया है। वहीं इस मामले को भाजपा द्वारा तूल दिए जाने के बाद अब भाजपा के भी स्वर इसमें धीमे पड़ गए हैं। इस बात को लेकर यहां तरह तरह की चर्चाऐं हैं। इसमें यह माना जा रहा है कि यदि मामले में कोई भी जांच शुरू हुई तो इसका सर्वाधिक खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ सकता है। क्योंकि नामधारी को प्रदेश का अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष भाजपा के ही शासनकाल में बनाया गया था। इस मामले में मुख्यमंत्री से प्रदेश के एक मंत्री प्रीतम सिंह द्वारा भी प्रश्न पूछा गया था जिसका जवाब मुख्यमंत्री ने इसी तरह दिया है। मुख्यमंत्री का स्पष्ट कहना है कि मामले के जांच संस्तुति करने की जरूरत इसलिए नहीं क्योंकि मामला प्रदेश से जुड़ा नहीं है। इसलिए जिस प्रदेश में मामला हुआ वहीं इस बावत कोई मांग कर सकता है।

लेखक ललित भट्ट देहरादून में एक समाचार पत्र में कार्यरत हैं.

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