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नारायण-नारायण! ‘मार-कांड काट जो’ साहब मीडिया की स्‍वतंत्रता पर नकेल कसना चाहते हैं

नारद जी सनसनाकर आकाश से धरती की ओर चले. लगा मानो आज कुछ कांड करेंगे. एशिया महाद्वीप के ‘महाभारत’ नामक देश में रिपोर्टिंग का जिम्मा लिए नारद जी चले जा रहे थे. हवा के संग बहे जा रहे थे और मन ही मन कुछ कहे जा रहे थे. उन्हें सूचना मिली थी इस देश में मीडिया ने घोटालों पर ऐसी रिपोर्टें पेश की जिससे शासन-सत्ता के सरकंडे उछलने लगे. इस देश की जनसद में ऐसे ऐसे महारथी घुसे हैं जो मीडिया का पूर्ण मर्दन करने के लिए अवतरित हुए हैं. कई दिशाओं से मीडिया पर शब्दभेदी बाणों की बौछार हो रही है. क्या होगा? क्या नहीं होगा और क्यों? यही वस्तुस्थिति जानने नारद जी ने महाभारत देश भ्रमण किया. जब वे इस देश की राजधानी पहुंचे तो देखा की एक सम्मानित माननीय मोहतरमा मीडिया पर अंकुश लगाने वाले अत्याधुनिक तीर-कमान व्यक्तिगत रूप से तैयार कर रही थी. उनका बस चले बस भैय्या जी के अलावा कुछ भी दिखाने या लिखने वाले मीडिया को वे अपने पर्स में ठूंस लें. खैर अभी उनका पर्स इतना बड़ा नहीं हुआ है.

नारद जी सनसनाकर आकाश से धरती की ओर चले. लगा मानो आज कुछ कांड करेंगे. एशिया महाद्वीप के ‘महाभारत’ नामक देश में रिपोर्टिंग का जिम्मा लिए नारद जी चले जा रहे थे. हवा के संग बहे जा रहे थे और मन ही मन कुछ कहे जा रहे थे. उन्हें सूचना मिली थी इस देश में मीडिया ने घोटालों पर ऐसी रिपोर्टें पेश की जिससे शासन-सत्ता के सरकंडे उछलने लगे. इस देश की जनसद में ऐसे ऐसे महारथी घुसे हैं जो मीडिया का पूर्ण मर्दन करने के लिए अवतरित हुए हैं. कई दिशाओं से मीडिया पर शब्दभेदी बाणों की बौछार हो रही है. क्या होगा? क्या नहीं होगा और क्यों? यही वस्तुस्थिति जानने नारद जी ने महाभारत देश भ्रमण किया. जब वे इस देश की राजधानी पहुंचे तो देखा की एक सम्मानित माननीय मोहतरमा मीडिया पर अंकुश लगाने वाले अत्याधुनिक तीर-कमान व्यक्तिगत रूप से तैयार कर रही थी. उनका बस चले बस भैय्या जी के अलावा कुछ भी दिखाने या लिखने वाले मीडिया को वे अपने पर्स में ठूंस लें. खैर अभी उनका पर्स इतना बड़ा नहीं हुआ है.

दूसरी तरफ मोर्चा संभाले हैं श्रीमान ‘मार-कांड काट जो’ साहब ने. महाशय आज के ही अख़बार में लिखते हैं की जब डॉक्टर, वकील, जज सब पर नकेल कसने वाली संस्था है तो फिर मीडिया स्वतंत्र क्यों? बुद्धि को जीतने वाले ये महापुरुष बड़े दबंगई में लिखते हैं कि मीडिया क्यों वही करे जो वह चाहती है. मतलब ये कि अब मीडिया को भी वाही चाहना होगा जो सत्ता-प्रतिष्ठान चाहता है. बकौल इन साहब के हम मीडिया को रेगुलेट करना चाहते हैं कंट्रोल नहीं. मगर कोई इनसे पूछे की भाईसाहब आप मीडिया को भी रेगुलेट करके भ्रष्‍टाचार को बढ़ावा देना चाहते हैं क्या? आपका एजेंडा तो वही लगता है. क्योंकि इस देश का इतिहास गवाह है जहाँ जहाँ रुल मढे़ गए वहां वहां भ्रष्‍टाचार की बैतरणी बह रही है. क्योंकि जहाँ नियम हैं वहीं उन्हें मानने वाला कानून भी और आप तो साहब खूब जानते हैं कि इसी नियम और कानून के बहच भ्रष्‍टाचार की बैतरणह बहती है, जिसमे तमाम महान आत्माएं गोता लगाती हैं. तो क्या आप चाहते हैं के अभी जो जो बैतरणह मीडिया में नहीं बह रही है वह बहनी चाहिए?

नारद जी देख रहे हैं. ये ‘मार-कांड काट जो’ साहब मीडिया वालों से पूछ रहे हैं कि आपके सेल्फ-रेगुलेशन के पीछे लाजिक क्या है? नारद जी जानना चाहते हैं कि मीडिया पर कानून बनाने के पीछे आपका लाजिक क्या है? क्या आप लोकतंत्र में राजतन्त्र जैसे हालत पैदा करना चाहते हैं. आप कहते हैं कि मीडिया अतिवादी हो गया है. देश की समस्या नहीं दिखाता, सिर्फ क्रिकेट, सेलिब्रिटी और सनसनी के सहारे मीडिया मुनाफा कमा रहा है. क्यों न कमाए भैय्या. दस हजार रुप्पल्ली की नौकरी करने वाले पत्रकार से आप आशा करते हैं कि करोडपति भ्रष्‍टों के बारे में ईमानदारी से लिखे? जबकि मीडिया वाले लिखते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पत्रकारों की सोच को कैसे स्वतंत्र किया जाये? आप कहते हैं कि मीडिया मालिक मुनाफा कमाने के लिए जन सरोकारों से मुंह मोड़ रहे है. मगर क्या आपने सोचा है कि इन्हीं मीडिया मालिकों की बदौलत देश में आज एक सशक्त, असरदार और काफी हद तक स्वतंत्र प्रेस की मौजूदगी है. भले ही वे पत्रकारों का खून चूस कर कमा रहे हैं लेकिन कम से कम मानसिक रूप से स्वतंत्र और स्वाभाविक पत्रकारों की दाल-रोटी भी वे ही चला रहे हैं. आप नहीं.

आप कहते हैं कि एक डॉक्टर, एक वकील यदि कुछ गलत करते हैं तो उनके लाइसेंस रद्द हो जाते हैं मगर आपकी जानकारी के लिए नारद जी रिपोर्ट बताती है कि आज से समय में सबसे ज्यादा भ्रष्‍ट और अमानवीय रवैया इन डॉक्टरों और वकीलों का ही है. नब्बे जेनेटिक बीमारियों के लिए नौ लाख से ज्यादा ब्रांड की दवाएं क्यों मौजूद हैं? पूरे देश में नकली दवाओं से होने वाली मौतों का आंकड़ा जानेंगे तो रात को नींद नहीं आएगी. फर्जी कागजात के बंदोबस्त से लेकर झूठ को सच करने का खुल्ला खेल खेलने वाले वकील कितने जन सरोकारी हैं ये आप भी जानते हैं और देश भी. यह तब हो रहा है जब इनको रेगुलेट करने वाली संस्था मौजूद है. खैर आपसे क्या उम्मीद रखें आपका खुद अपना एक एजेंडा है, जिसे लागू करवाने के लिए चौतरफा काम हो रहा है और आप सफल भी हो जायें तो कोई आश्चर्य नहीं.

मीडिया पर माननीयों की मनमानी देख नारद जी काफी दुखी हुए. कुछ समय पहले ही एक माननीय ने टीवी मीडिया को डब्बा कहा था तो दूसरे ने इसे बंद करने की सलाह दे डाली थी. आज के एक नेता हैं जो नेताओं के नाम के आगे श्री और पीछे जी लगवाने के लिए लालायित है? फ़िलहाल तो ऐसा लगता है कि मीडिया मर्दन करने वाली टीम को ‘मार-कांड काट जो’ जैसा कैप्टन मिल गया है, सो इन्हें लगता है की बिल्ली के गले में घंटी बंधने में कामयाबी मिल जाएगी. नारद जी सभी चीजें नोट कर रहे हैं और ऊपर जाकर इसका सही विश्लेषण करेंगे. मगर नारद जी कहते गए हैं कि नारायण-नारायण में रमे रहो. कोई कभी हमारी राह नहीं रोक पायेगा. अब तो महाभारत देश के पत्रकारों को नारद जी से ही उम्मीद बची है क्योंकि यहाँ तो उन्ही पर प्रतिबन्ध लगाने की तैयारी चल रही है. भगवन विष्णु जागो प्रभु जागो..धरती पर अकट संकट आ गया है.

लेखक नारदानंद विश्वाश स्वतंत्र पत्रकार हैं.

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