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निशंक की ऐसी विदाई होगी, किसी ने सोचा न था

आखिर निशंक चले ही गए. या यूँ कहें कि उन्हें जाना ही पड़ा। कोशियारी, बचदा जैसे दिग्गजों के मात देकर मुख्यमंत्री की कुर्सी कब्जाने और दो साल तक उत्तराखंड पर निरंकुश राज करने वाले निशंक की ऐसी विदाई किसी ने सोची भी नहीं होगी। वो तो भला हो अडवाणी साहब का कि उन्हों ने रथयात्रा का मन बना लिया। भाजपा के भीतर मंथन शुरू हुआ। अभी कुछ दिनों पहले कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदुरप्पा का पत्ता साफ़ किया था भाजपा आलाकमान ने भ्रष्टाचार के नाम पर। उसी दिन निशंक पर भी तलवार लटक गयी थी विदाई की। ऐसा इसलिए भी कहा जा सकता है क्योंकि जब-जब भ्रष्टाचार या भ्रष्ट मुख्यमंत्री की बात होती तो कांग्रेसी, येदुरप्पा के साथ निशंक का नाम भी सामने ले आते। अब भाजपा आलाकमान को तलाश थी तो एक अदद मौके की। सो अडवाणी जी की रथयात्रा के बहाने ही सही, निशंक साहब की कुर्सी गयी।

आखिर निशंक चले ही गए. या यूँ कहें कि उन्हें जाना ही पड़ा। कोशियारी, बचदा जैसे दिग्गजों के मात देकर मुख्यमंत्री की कुर्सी कब्जाने और दो साल तक उत्तराखंड पर निरंकुश राज करने वाले निशंक की ऐसी विदाई किसी ने सोची भी नहीं होगी। वो तो भला हो अडवाणी साहब का कि उन्हों ने रथयात्रा का मन बना लिया। भाजपा के भीतर मंथन शुरू हुआ। अभी कुछ दिनों पहले कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदुरप्पा का पत्ता साफ़ किया था भाजपा आलाकमान ने भ्रष्टाचार के नाम पर। उसी दिन निशंक पर भी तलवार लटक गयी थी विदाई की। ऐसा इसलिए भी कहा जा सकता है क्योंकि जब-जब भ्रष्टाचार या भ्रष्ट मुख्यमंत्री की बात होती तो कांग्रेसी, येदुरप्पा के साथ निशंक का नाम भी सामने ले आते। अब भाजपा आलाकमान को तलाश थी तो एक अदद मौके की। सो अडवाणी जी की रथयात्रा के बहाने ही सही, निशंक साहब की कुर्सी गयी।

दिल्ली जाकर आलाकमान के सामने विरोध भी प्रकट किया निशंक साहब ने। लेकिन इतना नहीं जितना येदुरप्पा ने किया था। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने निशंक की दलीलें तो सुनी, लेकिन उनको हटाने का फैसला बरकरार रखा। भाजपा आलाकमान को उत्तराखंड में मुख्यमंत्री निशंक को इस्तीफा देने के लिए तैयार करने से ज्यादा दिक्कत खंडूड़ी को नया नेता चुनने में आई। इसका विरोध निशंक ने तो किया ही, पार्टी के कुछ केंद्रीय नेता भी इससे सहमत नहीं थे। पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी को निशंक को इस्तीफा देने के लिए तैयार करने के लिए दो दौर की बैठकें करनी पड़ी।

पूरी तैयारी से दिल्ली आए निशंक ने अपनी सरकार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की सीडी व अन्य दस्तावेज भी दिखाए। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खंडूड़ी के गैर पार्टी मंच से सरकार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का भी उल्लेख था। हालांकि पार्टी नेतृत्व पर निशंक की दलीलों का ज्यादा असर नहीं पड़ा और उसने मुख्यमंत्री को साफ-साफ इस्तीफा देने के लिए कह दिया। आजकल उत्तराखंड में एक मजाक चल रहा है कि निशंक साहब ने मुख्यमंत्री रहते हुए बहुत सी किताबें लिखीं। तब तो मजबूरी में उन्हें पढ़ा गया, लेकिन अब कौन पढ़ेगा.

वेद प्रकाश भदोला की रिपोर्ट.

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