Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

ये दुनिया

नीतीश जी, अपने सुशासन का देखिए हाल

जब रक्षक ही भक्षक की भूमिका में आ जाए, तब आप क्या करेंगे? लेकिन बिहार में तो ऐसा ही चल रहा है। बिहार से लेकर देश में सुशासन बाबू के नाम से चर्चित सूबे के मुखिया नीतीश कुमार राज्य की विकास दर को 13 फीसदी तक पहुंचाने की बात जितनी भी कर लें, आंकड़े बता रहे हैं कि बिहार में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। लालू के विरोधी के अलावा सरकार के समर्थक भी अब खुलकर कहने लगे हैं कि नीतीश के शासन में खोट है और भ्रष्टाचार की वजह से लोगों का जीना मुहाल है। ‘आरटीआई’ से मिली जानकारी की बिनाह पर सूबे की जो तस्वीर उभरकर आ रही है, यह कहने में किसी को कोई गुरेज नहीं कि बिहार को अपराधी, उदंड और अनुशासनहीन पुलिस अधिकारी हांक रहे हैं।

जब रक्षक ही भक्षक की भूमिका में आ जाए, तब आप क्या करेंगे? लेकिन बिहार में तो ऐसा ही चल रहा है। बिहार से लेकर देश में सुशासन बाबू के नाम से चर्चित सूबे के मुखिया नीतीश कुमार राज्य की विकास दर को 13 फीसदी तक पहुंचाने की बात जितनी भी कर लें, आंकड़े बता रहे हैं कि बिहार में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। लालू के विरोधी के अलावा सरकार के समर्थक भी अब खुलकर कहने लगे हैं कि नीतीश के शासन में खोट है और भ्रष्टाचार की वजह से लोगों का जीना मुहाल है। ‘आरटीआई’ से मिली जानकारी की बिनाह पर सूबे की जो तस्वीर उभरकर आ रही है, यह कहने में किसी को कोई गुरेज नहीं कि बिहार को अपराधी, उदंड और अनुशासनहीन पुलिस अधिकारी हांक रहे हैं।

भ्रष्टाचार से लेकर अनुशासनहीनता के आरोप में जिन लोगों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और सलाखों के पीछे होना चाहिए, वे तरक्की पाकर जनता पर शासन करते आ रहे हैं। हम आपको बिहार के कुछ ऐसे आईपीएस अफसरों से परिचय कराते हैं, जिन पर सालों से विभागीय कार्रवाई चल रही है, लेकिन आज तक उनका बाल भी बांका नहीं हो सका है। अब तक 25 आईपीएस विभिन्न आरोपों के घेरे में हैं, लेकिन समयानुसार वे प्रोन्नति पाकर ऊंचे ओहदों पर पहुंचते जा रहे हैं।

इसके अलावा गणेश प्रसाद यादव, श्रीनारायण मिश्रा, डीपी ओझा, एसके सक्सेना, बीबी प्रसाद ऐसे सेवानिवृत आईपीएस हैं, जिन पर भी कई तरह के आरोप लगे हैं। 25 आरोपियों की कुल सूची में अमिताभ दास सभी आरोपों से बरी हो चुके हैं। विभिन्न आरोपों में घिरे यही अधिकारी आज भी ‘सुशासन’ को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं, जबकि राज्य के कई बेहतरीन अधिकारियों को ‘साइड लाइन’ कर दिया गया है। मामला केवल दागी आईपीएस तक का ही नहीं है। सूबे में 15 ऐसे भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं, जिन पर कई तरह के मामले चल रहे हैं। इन अधिकारियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें प्रोन्नत करके विभिन्न जिलों और महकमों में तैनात कर दिया गया है। अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार में लिप्त ये अधिकारी जनता को कितना न्याय देंगे, आप इसकी कल्पना कर सकते हैं।

राज्य में कथित सुशासन की कहानी यहीं तक नहीं है। पटना में काम करने वाले सैकड़ों सरकारी कर्मचारी सरकारी आवास के लिए सालों से दर-दर की ठोकरें खाते फिर रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ सैकड़ों सरकारी आवासों पर अवैध कब्जा बरकरार है। सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के मुताबिक पटना में अब तक 390 सरकारी आवास खाली पड़े हुए हैं। अगर आवास खाली हैं, तो फिर जो लोग आवास के लिए भटक रहे हैं उन्हें आवास क्यों नहीं मिल रहे हैं? सच्चाई यह है कि कहने के लिए सरकार के 390 आवास तो खाली हैं, लेकिन भ्रष्ट और वजनदार सरकारी कर्मियों ने ले-देकर सभी खाली आवासों को भर रखा है। पटना में एक आवास का किराया कम से कम 4 हजार रुपये प्रति माह है। इस प्रकार प्रतिमाह 15 लाख 60 हजार रुपये राजस्व की हानि सरकार को हो रही है। पटना के शास्त्री नगर के सरकारी आवासों में 51 ऐसे लोग कब्जा किए हुए हैं, जो 2008 -2010 के बीच सेवानिवृत हो चुके हैं।

इसी कॉलोनी के एक सरकारी आवास में रहने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारी के परिजन कहते हैं कि हम मुफ्त में तो रहते नहीं हैं। सरकारी कर्मचारी हमसे हर माह दो हजार रुपये ले रहे हैं। जब सारे लोग ऐसे ही रह रहे हैं, तो फिर हम क्यों मकान छोड़ें?’ इसी प्रकार राजबंशी नगर में सेवानिवृत्त हो चुके 11 कर्मचारी अभी भी मकानों पर कब्जा बनाए हुए हैं। इनकी सूची इस प्रकार है-मोहन प्रसाद, मकान नंबर 7/400, उपेंद्र सिंह, मकान नंबर 47/400, बृजकिशोर प्रसाद, मकान नंबर178/400, आनंद बिहारी श्रीवास्तव, मकान नंबर 379/400, ओमप्रकाश श्रीवास्तव 345/400, राजेंद्र राम 249/400, हितेंद्र चौधरी 282/400, नवल किशोर 322/400, बालकृष्ण राम 341/400, चरित्र यादव 398/400 और कृष्णदेव झा 3/400। ये सभी ऐसे लोग हैं, जो दो साल पहले सेवानिवृत्त तो हो गए, लेकिन अभी भी सरकारी आवास का आनंद ले रहे हैं।

इस मसले पर राजद सांसद रामकृपाल यादव की राय कुछ और ही है। यादव कहते हैं कि सबसे पहले तो राज्य में विपक्ष नाम की कोई चीज अभी बची नहीं है। हम लोग आवाज भी उठाते हैं, तो कोई सुनने वाला नहीं है। जब भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारी दंडित न हो और भ्रष्टाचार के दम पर सरकार चल रही हो, तो फिर राज्य सरकार को कम बोलना चाहिए। आप भ्रष्टाचार पर सर्वे करा लीजिए, किसी भी विभाग में बिना पैसे लिए कोई काम नहीं हो रहा है।

आरटीआई एक्टिविस्ट शिवप्रकाश कहते हैं, ‘लालू के जमाने में चोरी होती थी, लेकिन यहां तो डकैतों का जमावड़ा है। सूबे का ऐसा कोई महकमा नहीं है, जहां लुटेरों की जमात खड़ी नहीं है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और जदयू सांसद कैप्टन जय नारायण निषाद प्रदेश में चल रहे भ्रष्टाचार के खेल से बेहद दुखी हैं। निषाद कहते हैं कि बिहार आज भी भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा हुआ है। सरकारी कर्मचारी से लेकर राजनीति में पैठ रखने वाले लोग भी भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं।

मनरेगा का हाल? : मनरेगा में हो रहे भ्रष्टाचार को लेकर राज्य सरकार के पास 105 शिकायतें आई हैं, लेकिन अभी तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि पिछले 7 सालों में मनरेगा में हो रही धांधली की 13 शिकायतें देश के प्रमुख वीआइपी लोगों ने की हैं, लेकिन उन शिकायतों को भी राज्य सरकार नहीं निपटा सकी है। इन्हीं वीआईपी शिकायतकर्ताओं में एक हैं सीवान के सांसद ओम प्रकाश यादव। ओम प्रकाश यादव कहते हैं कि मनरेगा में लूट की शिकायत 2010 में ही की गई, लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। लगता है, सरकार के लोग ही इस लूट में शामिल हैं।

आरोपित आईपीएस अधिकारियों की सूची : नाम और आरोप

(1) अनिल किशोर–निलंबित अधिकारियों को मुक्त और पदस्थापन करना।

(2) अमरेंद्र कुमार सिंह–अनुशासनहीनता, कर्तव्यहीनता, गैर-जिम्मेदाराना आचरण का आरोप।

(3) अजय कुमार वर्मा–अनुशासनहीनता और आदेशों के उल्लंघन का आरोप।

(4) मेघनाथ राम–काम में ढिलाई और आदेशों के उल्लंघन का आरोप।

(5) अजीत ज्वॉय–अनधिकृत अनुपस्थिति का आरोप।

(6) अमरेंद्र अंबेदकर–गैरजिम्मेदाराना आचरण।

(7) एचएन देवा–बिना टिकट यात्रा करने का आरोप।

(8) पारस नाथ–हत्या के मामले में अभियुक्तों को लाभ पहुंचाने का आरोप।

(9) वीवी प्रसाद–घोर अनुशासनहीनता,आदेशों के उल्लंघन का आरोप।

(10) शफी आलम–बिना अनुमति विदेश यात्रा करने का आरोप।

(11) मनोज नाथ—आदेशों के उल्लंघन और अमर्यादित पत्राचार का आरोप।

(12) निर्मल चंद्र ढोंढियाल–कार्यालय से लगातार अनुपस्थित रहने का आरोप।

(13) रमेश चंद्र सिन्हा–आरोपित।

(14) धु्रव नारायण गुप्ता–अनुसंधान में लापरवाही का आरोप।

(15) अजय कु. वर्मा–अवकाश लिए बगैर काम से नदारद।

(16) इंद्रनंद मिश्र–काम में लापरवाही का आरोप।

(17) क्षत्रणील सिंह–अभियंता को अंगरक्षक नहीं देने का आरोप।

(18) रघुनाथ प्रसाद सिंह–सत्यापन बगैर गन लाइसेंस देने का आरोप।

लूट-खसोट का अड्डा श्रम संसाधन विभाग

राज्य का श्रम संसाधन विभाग लूट-खसोट का अड्डा बना हुआ है और सरकार उनके विरुद्ध कोई भी कार्रवाई करने में रुचि नहीं ले रही है। सूचना का अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार राज्य के श्रम विभाग से जुड़े आईटीआई कॉलेजों के 30 से ज्यादा अधिकारियों और कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं और आरोप के बावजूद ये राजपत्रित और गैर-राजपत्रित कर्मचारी प्रोन्नति पाकर सरकार के सुशासन की पोल खोल रहे हैं। यहां कुछ आरोपित अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची आपके सामने रखी जा रही है, जिससे पता चल जाएगा कि नीतीश की सरकार किस रास्ते पर चल रही है।

– सत्येंद्र कुमार (नियोजन अधिकारी) : सरकारी राशि के गबन का आरोप। अनुशासनहीनता का भी मामला।

– सुदर्शन सिंह (श्रम नियोजन विभाग में प्राचार्य) : राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने का मामला। छात्रवृत्ति की राशि का गलत इस्तेमाल।

– मनोज मानकर (परीक्षा नियंत्रक): आय से अधिक संपत्ति रखने का आरोप है।

– चंद्रशेखर सिंह (प्रचार्य): अनियमित नामांकन, गलत प्रतीक्षा सूची का निर्माण, अपंजीकृत छात्रों को परीक्षा में बैठाने का आरोप। इनके अलावा धनंजय तिवारी, विजय कुमार, केदारनाथ सिंह, केशरीनंदन, नागेश्वर यादव, रघुनाथ प्रसाद, कुशेश्वर प्रसाद, परमानंद कुमार, निय कुमार, संतलाल चौधरी, गिरेंद्र कुमार, मुकुल कुमार ऐसे राजपत्रित कर्मचारी हैं, जो सालों से आरोपों के घेरे में हैं, लेकिन अपनी पहुंच की वजह से काम करते जा रहे हैं।

लेखक अखिलेश अखिल वरिष्‍ठ पत्रकार हैं तथा राष्‍ट्रीय साप्‍ताहिक हमवतन से जुड़े हुए हैं. उनका यह लेख हमवतन से साभार लेकर यहां प्रकाशित किया जा रहा है.

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs

You May Also Like

ये दुनिया

रामकृष्ण परमहंस को मरने के पहले गले का कैंसर हो गया। तो बड़ा कष्ट था। और बड़ा कष्ट था भोजन करने में, पानी भी...

सोशल मीडिया

यहां लड़की पैदा होने पर बजती है थाली. गर्भ में मारे जाते हैं लड़के. राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्र में बाड़मेर के समदड़ी क्षेत्र...

दुख-सुख

: बस में अश्लीलता के लाइव टेलीकास्ट को एन्जॉय कर रहे यात्रियों को यूं नसीहत दी उस पीड़ित लड़की ने : Sanjna Gupta :...

ये दुनिया

बुद्ध ने कहा है, कि न कोई परमात्मा है, न कोई आकाश में बैठा हुआ नियंता है। तो साधक क्या करें? तो बुद्ध ने...