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नीरज ग्रोवर हत्‍याकांड : कन्‍नड़ अभिनेत्री मारिया जेल से रिहा

टीवी प्रोड्यूसर नीरज ग्रोवर हत्‍याकांड में सबूतों को मिटाने की दोषी कन्‍नड़ अभिनेत्री मारिया सुसराज जेल से रिहा हो गई है. अदालत ने मारिया को तीन साल तथा उसके मंगेतर को दस साल की सजा सुनाई थी. परन्‍तु तीन साल से ज्‍यादा समय में जेल में बिता चुकी मारिया को रिहा कर दिया गया. इस न्‍याय से नीरज के परिजन काफी दुखी हैं. नीरज के पिता ने हाई कोर्ट जाने की बात कही है. उन्‍होंने नीरज की हत्‍या को तात्‍कालिक घटनाक्रम नहीं बल्कि साजिश बताया.

टीवी प्रोड्यूसर नीरज ग्रोवर हत्‍याकांड में सबूतों को मिटाने की दोषी कन्‍नड़ अभिनेत्री मारिया सुसराज जेल से रिहा हो गई है. अदालत ने मारिया को तीन साल तथा उसके मंगेतर को दस साल की सजा सुनाई थी. परन्‍तु तीन साल से ज्‍यादा समय में जेल में बिता चुकी मारिया को रिहा कर दिया गया. इस न्‍याय से नीरज के परिजन काफी दुखी हैं. नीरज के पिता ने हाई कोर्ट जाने की बात कही है. उन्‍होंने नीरज की हत्‍या को तात्‍कालिक घटनाक्रम नहीं बल्कि साजिश बताया.

गौरतलब हो कि मई 2008 में नीरज की मारिया के फ्लैट पर उसके मंगेतर जेरोम मैथ्‍यू ने हत्‍या कर दी थी. इसके बाद उसके लाश को ठिकाने लगाने के लिए इन लोगों ने बाजार से चाकू लाकर उसके तीन सौ टुकड़े किए तथा जंगल में ले जाकर उसे जला दिया. परन्‍तु नीरज की मां ने चेन और अंगूठी से नीरज के शव की पहचान कर ली. जिसके बाद जांच में मारिया और जेरोम का नाम सामने आया था.

शुक्रवार को मुंबई की एक अदालत ने जेरोम को गैर इरादतन हत्‍या का दोषी तथा मारिया को सबूत मिटाने का दोषी करार दिया था, और इन दोनों को क्रमश: दस साल और तीन साल की सजा सुनाई. सजा का ऐलान होने तक मारिया ने जेल में तीन साल गुजार चुकी है, लिहाजा कोर्ट ने उसे रिहा करने का फैसला सुना दिया. शनिवार को कन्‍नड़ अभिनेत्री मारिया को जेल से रिहा कर दिया गया. 

नीरज के परिजन कोर्ट के इस न्‍याय से काफी आहत हैं. उसके पिता ने कहा कि कम से कम उतने महीने की सजा तो मिलती जितने टुकड़े इन लोगों ने मेरे बेटे के किए थे. उन्‍होंने कहा कि इस न्‍याय से मेरा पूरा परिवार आहत है. उन्‍होंने इस फैसले को रिव्‍यू करने की अपील की. उन्‍होंने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की बात भी कही है. उन्‍होंने कहा कि कोर्ट ने मारिया को यूं ही छोड़ दिया वो भी जेरोम के साथ नीरज की हत्‍या में बराबर की दोषी थी.  

मुकदमे के दौरान क्राइम ब्रांच ने सरकारी वकील के जरिए दर्जनों गवाह और सैकड़ों पेज सबूत दोनों हत्‍यारोपियों के खिलाफ अदालत में रखे. परन्‍तु बचाव पक्ष के जिरह और बहस के दौरान‍ दिए गए तर्क सरकारी पक्ष को भारी पड़े, जिरह के दौरान सरकारी पक्ष हत्‍या को साजिश सिद्ध करने में नाकाम रहा,  जिसके बाद कोर्ट ने इस हत्‍या को गैर इरादतन मानते हुए अपना फैसला सुना दिया.

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