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नेपाल में राजा के दौरे से सियासत तेज, योगी आदित्‍यनाथ से की गुफ्तगू

नेपाल में इस वक्त भले ही लोकतांत्रिक व्यवस्था चल रही हो, लेकिन पूर्व में नेपाल में राजतंत्र शासन के पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र वीर विक्रम शाह देव की लगातार धार्मिक यात्राओं से नेपाल की सियासत में तेजी आ गयी है। राजा समर्थकों के उमड़ रहे मेलों से राजा के सियासत में आने के आसार बढ़े है। उधर राजा समर्थक उन्हें राष्ट्रीय प्रजातंत्र पाट्री के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रुप में भी देख रहे है। मंगलवार को भारत के धार्मिक पीठ गोरक्षपीठ के पीठाधीश्रवर महंत अवेद्यनाथ और उत्तराधिकारी योगी आदित्य नाथ के आमंत्रण पर नेपाल के नवलपरासी जिले के गोपालपुर में गोरक्षपीठ के मंदिर में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान में पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र शरीक हुए। यहां दोनो के बीच काफी देर तक गुफ्तगू हुई। इससे पहले सोमवार को राजा काठमांडू से भैरहवा पहुंचे तब वहां नेपाली जनता का रेला लग गया। हर जगह राजा का स्वागत और राजतंत्र वापसी का नारा लगा। और उन्हें सीधे सियासत में दखल देने की बात कहीं गई। उधर नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री एंव माओवादी के राष्‍ट्रीय अध्यक्ष पुष्प कमल दहाल उर्फ प्रचंड ने बताया कि राजा की गतिविधि ठीक नहीं है। नेपाली जनता जान चुकी है राजा कि किसी योग्य नहीं हैं। नेपाल सरकार राजा के उपर खर्च हो रहे धन की कमी करेगी।

नेपाल में इस वक्त भले ही लोकतांत्रिक व्यवस्था चल रही हो, लेकिन पूर्व में नेपाल में राजतंत्र शासन के पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र वीर विक्रम शाह देव की लगातार धार्मिक यात्राओं से नेपाल की सियासत में तेजी आ गयी है। राजा समर्थकों के उमड़ रहे मेलों से राजा के सियासत में आने के आसार बढ़े है। उधर राजा समर्थक उन्हें राष्ट्रीय प्रजातंत्र पाट्री के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रुप में भी देख रहे है। मंगलवार को भारत के धार्मिक पीठ गोरक्षपीठ के पीठाधीश्रवर महंत अवेद्यनाथ और उत्तराधिकारी योगी आदित्य नाथ के आमंत्रण पर नेपाल के नवलपरासी जिले के गोपालपुर में गोरक्षपीठ के मंदिर में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान में पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र शरीक हुए। यहां दोनो के बीच काफी देर तक गुफ्तगू हुई। इससे पहले सोमवार को राजा काठमांडू से भैरहवा पहुंचे तब वहां नेपाली जनता का रेला लग गया। हर जगह राजा का स्वागत और राजतंत्र वापसी का नारा लगा। और उन्हें सीधे सियासत में दखल देने की बात कहीं गई। उधर नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री एंव माओवादी के राष्‍ट्रीय अध्यक्ष पुष्प कमल दहाल उर्फ प्रचंड ने बताया कि राजा की गतिविधि ठीक नहीं है। नेपाली जनता जान चुकी है राजा कि किसी योग्य नहीं हैं। नेपाल सरकार राजा के उपर खर्च हो रहे धन की कमी करेगी।

 

राजा ने भी गोपालपुर के आयोजन में सियासत में धार्मिक हिंदू कार्ड का पासा अपने भाषण में फेंका। जो उनकी यात्राओं से साबित हो रहा है। इससे नेपाल में सियासत तेज हो गयी है। नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र ने बीते डेढ़ साल से लगातार पूर्वी व पश्चिमी नेपाल के साथ ही देश के अन्य हिस्सों में धार्मिक आयोजनों में शिरकत करना शुरू कर दिया है। पिछले साल जुलाई, अगस्त एवं मार्च व अप्रैल में पूर्वी नेपाल के जनकपुर वीरगंज सहित नेपालगंज सहित अन्य इलाकों में स्थित मंदिरों व मठों में जाकर विधिवत पूजा अर्चन करना व जनता से सीधा संवाद करना इसमें शुमार है। भैरहवा में विभिन्न वर्गों की महिलाओं व कुंवारी कन्याओं के जरिये जो स्वागत हुआ, उससे पूर्व राजा भी गदगद नजर आए। ज्ञनेन्द्र के पहुंचने पर नेपाल के राजा समर्थक हाम्रों राजा हाम्रों देश प्यार से प्यारे भंदा छ, का नारा दे रहे हैं। इसके साथ ही राजा किसका जनता का जनता किसकी राजा की। यह भी नारा नेपाल में गूंजने लगा है। सूत्रों के अनुसार पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र यात्राओ के दौरान जिन इलाकों में राजा का आने का कार्यक्रम बनता है। वहां पहले से ही जनता को जानकारी राजा के समर्थक कही जाने वाली पार्टी राप्रपा के कार्यकर्ता देने का काम करते हैं। दूसरी तरफ राजा के पुत्र पारस शह व पुत्रवधु हिमानी शाह भी लगातार धार्मिक यात्राएं तेज कर दी हैं। यह काठमांडू के अलावा पूर्वी व पश्चिम नेपाल के विभिन्न मठों व मंदिरों की तरफ रूख कर रहे हैं। हर जगह राजा आओ देश बचाओ का नारा लग रहा है। नेपाल में राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रशु शमसेर जबरा व केन्द्रीय महामंत्री दीपक बोहरा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रकाश चन्द्र रोहणी कहते हैं कि हमारी पार्टी पूर्व राजा की समर्थक है। हम राजशाही की वापसी चाहते हैं। राजा के धार्मिक कार्यक्रमों में पहुंचने पर उन्हें देश की बागडोर संभालने के लिए सियासत में आने के लिए अनुरोध किया जा रहा है। उधर बेलहिया के अनिल कंडेल, हेम बहादुर कर्की, श्याम क्षेत्री, विनोद राज भंडारी, डा0 शांत कुमार शर्मा कहते हैं कि नेपाल में राजतंत्र की बहाली विकास के लिए जरुरी है। नेपाल में जो हालत है वह ठीक नहीं है। इससे अच्छा राजा का ही शासन था।

नेपाल के पूर्व प्रधान मंत्री एंव राष्‍ट्रीय कृत माओवादी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ने बताया कि राजा धर्म के नाम पर ढोंग कर रहे हैं। नेपाली जनता उनको जान चुकी है। इसी का नतीजा रहा नेपाल में लोकतंत्र आया। राजा अपने निवास स्थल काठमांडू स्थित निर्मल आवास में भी सरकार विरोधी मीटिंग कर रहे हैं जो देश के लिए हितकर नहीं है। नेपाल सरकार द्वारा जारी क्लास वन की सुरक्षा व्यवस्था भी अब हटा ली जायेगी। तथा जो धन नेपाल सरकार उनके उपर खर्च कर रही है उसे भी समाप्त कर दिया जायेगा। अगर नेपाल के पूर्व राजा लोकतंत्र विरोधी कोई कार्य करते है तो कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी।

 

महराजगंज से ज्ञानेद्र त्रिपाठी की रिपोर्ट. इनसे संपर्क न0- 09621583583 के जरिए किया जा सकता है.

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