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नोएडा एक्सटेंशन पर फैसले से निवेशक और किसान खुश, मायावती सरकार और नोएडा अथारिटी को झटका

इलाहबाद हाई कोर्ट ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा जमीन अधिग्रहण मामले में एक महत्वपूर्ण फैसले के तहत शुक्रवार को तीन गांवों में हुआ भूमि अधिग्रहण रद्द कर दिया। इसके अलावा कोर्ट ने बाकी के गांवों के किसान को 64 प्रतिशत वृद्धि के साथ मुआवजा देने और विकसित जमीन देने के आदेश दिए। कोर्ट ने पिछले 30 सितंबर को ही इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था। कोर्ट के फैसले की जानकारी देते हुए किसानों के वकील पंकज दुबे ने कहा कि तीन न्यायाधीशों की पीठ ने 63 गांवों के किसानों की 480 से अधिक याचिकाओं पर यह फैसला सुनाया है। इस फैसले से उत्तरप्रदेश की मायावती सरकार को जोरदार झटक लगा है।  उधर, तीन गांवों में भूमि अधिग्रहण रद्दे करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का कनफेडरेशन आफ रीयल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन (क्रेडाई) ने स्वागत किया है।

इलाहबाद हाई कोर्ट ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा जमीन अधिग्रहण मामले में एक महत्वपूर्ण फैसले के तहत शुक्रवार को तीन गांवों में हुआ भूमि अधिग्रहण रद्द कर दिया। इसके अलावा कोर्ट ने बाकी के गांवों के किसान को 64 प्रतिशत वृद्धि के साथ मुआवजा देने और विकसित जमीन देने के आदेश दिए। कोर्ट ने पिछले 30 सितंबर को ही इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था। कोर्ट के फैसले की जानकारी देते हुए किसानों के वकील पंकज दुबे ने कहा कि तीन न्यायाधीशों की पीठ ने 63 गांवों के किसानों की 480 से अधिक याचिकाओं पर यह फैसला सुनाया है। इस फैसले से उत्तरप्रदेश की मायावती सरकार को जोरदार झटक लगा है।  उधर, तीन गांवों में भूमि अधिग्रहण रद्दे करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का कनफेडरेशन आफ रीयल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन (क्रेडाई) ने स्वागत किया है।

 

वकील पंकज दुबे ने बताया कि कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा और नोएडा के शाहबेरी, असदुल्लापुर और देवला गांवों में जमीन अधिग्रहण पूरी तरह रद्द कर दिया, जबकि दो गांवों की याचिकाएं खारिज कर दीं। उनके मुताबिक बाकी 58 गांवों के किसानों को कोर्ट ने अब तक मिले मुआवजे से 64 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा और 10 फीसदी विकसित जमीन देने के आदेश दिए हैं। दुबे ने कहा कि अदालत ने राज्य सरकार को ग्रेटर नोएडा और नोएडा में जमीन अधिग्रहण में हुई अनियमितताओं की जांच कराने के आदेश भी दिए हैं। नोएडा और ग्रेटर नोएडा के 63 गांवों के किसानों ने न्यायालय में याचिकाएं दायर कर राज्य सरकार के अधीन आने वाली नोएडा अथॉरिटी की तरफ से किए गए जमीन अधिग्रहण को चुनौती दी थी। किसानों का कहना है कि अथॉरिटी ने ‘अर्जेसी क्लॉज’ लगाकर उनकी जमीन औने-पौने भाव में ले ली थी और बाद में जमीन बिल्डरों को बेंच दी गई।

उत्तर प्रदेश के नोएडा, ग्रेटर नोएडा और नोएडा एक्सटेंशन इलाकों में तीन गावों में भूमि अधिग्रहण रद्दे करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के ‘संतुलित’ फैसले का स्वागत करते हुए रीयल एस्टेट डेवलपर्स के निकाय क्रेडाई ने दावा किया कि इस निर्णय से मकानों के खरीदार प्रभावित नहीं होंगे। कनफेडरेशन आफ रीयल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन (क्रेडा) के अध्यक्ष (एनसीआर) पंकज बजाज ने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दिया गया यह ‘संतुलित’ फैसला है। इससे नोएडा एक्सटेंशन में परियोजनाएं दोबारा आ सकेंगी। उन्होंने कहा कि नोएडा एक्सटेंशन परियोजनाओं में धन लगाने वाले निवेशक एवं मकानों के खरीदार अब सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि इस निर्णय के बाद किसानों को प्रति एकड़ डेढ़ करोड़ रुपए मुआवजा मिलेगा जो पहले 90 लाख रुपए प्रति एकड़ था।

उल्लेखनीय है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन गावों. देवला, चाक शाहबेरी और असदुल्लाहपुर में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किए गए 3000 एकड़ भूमि अधिग्रहण को रद्द कर दिया है। बजाज के मुताबिक, ‘इसका कोई व्यापक असर नहीं होगा क्योंकि शाहबेरी गाव के मकानों के खरीदार पहले ही अन्य परियोजनाओं की ओर रुख कर चुके हैं और अन्य दो गावों में कोई परियोजना नहीं है।’

बजाज ने कहा कि नोएडा एक्सटेंशन की बिल्डरों के प्रोजेक्ट में पैसा लगाने वाले निवेशकों को कोई परेशनी नहीं आएगी। फैसले के बाद किसानों को 90 लाख रुपए प्रति एकड़ के जगह अब प्रति एकड़ डेढ़ करोड़ रुपए मुआवजा मिलेगा।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फ़ैसले से अगर किसी की किरकिरी हुई है, तो वह है ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी और नोएडा अथॉरिटी। अदालत के मुताबिक, इन अथॉरिटी ने किसानों की ज़मीन के अधिग्रहण के मामले में बड़ी हेराफ़ेरी की है। क्या आपने किसी सरकारी महकमे को अपना लक्ष्य एक या दो नहीं पूरे दस साल पहले हासिल करते देखा है। जो न कभी सुना गया न देखा गया, उस नामुमकिन को मुमकिन किया है नोएडा अथॉरिटी ने। कौड़ियों के भाव किसानों की ज़मीन क़ब्ज़ा कर बिल्डर्स को देने में यूपी की सरकार और नोएडा अथॉरिटी इस क़दर जल्दबाज़ी में थी कि जितनी ज़मीन का अधिग्रहण 2021 तक किया जाना था, वह लक्ष्य क़रीब-क़रीब इसी साल यानी 2011 में ही पूरा हो गया।

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