पिछले दिनों ओडीशा के एक निजी न्यूज़ चैनेल ने राउरकेला स्थित हाईटेक मेडिकल कॉलेज एण्ड हास्पिटल में चल रहे फर्ज़ीवाड़े का भांडाफोड़ किया तो, पूरे राज्य में खलबली मच गई.. राउरकेला के संस्थान के पास मेडिकल कॉउन्सिल ऑफ इन्डिया की गाइडलाइन्स के मुताबिक न तो जरूरी चिकित्सा उपकरण थे, न ही जांच मशीनें.. यहां तक की प्रशिक्षित स्टाफ भी नहीं था..खबरिया चैनेल के मुताबिक स्टिंग ऑपरेशन के दौरान संस्थान के चेयरमैन ने खुद कुबूला कि अभी तो संस्थान की इमारत निर्माणाधीन है..स्टिंग ऑपरेशन के बाद एमसीआई ने संस्थान का दौरा किया और उसकी कॉलेज मान्यता को लाल झंडी दिखा दी.
तीन महीने की अपनी अवस्था का ये संस्थान अभी अपने पैरों पर खड़ा भी नहीं हुआ.. और दौड़ने की इसकी ख्वाहिश ने इसे ज़मीन पर ला पटका.. चैनेल के स्टिंग ऑपरेशन के बाद एमसीआई ने आनन-फानन में राउरकेला के मेडिकल संस्थान हाईटेक मेडिकल कॉलेज एण्ड हास्पिटल को मेडिकल कॉलेज खोलने की इजाज़त नहीं दी.. अंजाम ये हुआ कि संस्थान ने पश्चिम बंगाल के एक कॉलेज को उन्हीं मापदण्डों के आधार पर एमसीआई द्वारा मान्यता दिए जाने पर कटक हाई कोर्ट में याचिका दायर की..इस याचिका में संस्थान ने पश्चिम बंगाल के उस कॉलेज को मान्यता दिए जाने को आधार बनाया.. इस मामले में कटक हाई कोर्ट ने एमसीआई को निर्देश जारी किया कि वह राउरकेला स्थित हाईटेक मेडिकल कॉलेज एन्ड हास्पिटल को आगामी सत्र में मेडिकल छात्रों को प्रवेश दिए जाने संबंधी आदेश प्रदान करें.
इस संबंध में एमसीआई सचिव डॉ. संगीता शर्मा से जब हमने बात की तो उन्होंने बताया कि बोर्ड की बैठक में ही तय किया जाएगा कि आगे क्या कदम उठाना है.. बातों ही बातों में उन्होंने ये भी कहा कि हो सकता है कि हम इस मामले को ले कर सुप्रीम कोर्ट भी जाएं.. यानी फिलहाल गेंद एमसीआई के पाले में है.. गौरतलब है कि एमसीआई ने नए मेडिकल कॉलेज खोले जाने के लिए देश भर से प्राप्त 86 आवेदनों में से मात्र 21 संस्थानों को नए कॉलेज खोलने के लिए मान्यता प्रदान की.. बाकि 65 आवेदनों को निरस्त कर दिया गया था..


