पंजाब केसरी व जालंधर समूह में इस समय कानूनी लड़ाई का दांव-पेंच फंस गया हैं. इस बात का खुलासा तब हुआ हैं, जब आगरा की एक पार्टी आगरा से ही जो कि समाजवादी पार्टी के काफी नजदीक मानी जाती हैं, आगरा की पंजाब केसरी फ्रेंचायजी के बाबत दिल्ली गयी. बताया गया है कि जब आगरा से प्रकाशित करने के सम्बन्ध में पंजाब केसरी, दिल्ली के संपादक से बात करने की कोशिश की गयी, तब जाकर इस मामले का खुलासा हुआ. गौरतलब है कि पंजाब केसरी अखबार का टाइटल विजय कुमार के नाम है. ऐसे में इस समय पंजाब केसरी पर जालंधर समूह का कब्जा है, क्योंकि वह वर्तमान में जगवानी, (पंजाबी), हिंद समाचार (उर्दू) व पंजाब केसरी टीवी का संचालन करता हैं. ऐसे में अगर फैसला पंजाब केसरी, दिल्ली के विरोध में गया तो अपने समाचार पत्र में बड़ा-बड़ा लेख लिखने वाले पंजाब केसरी के संपादक अश्वनी कुमार केवल दिल्ली तक सीमित रह सकते हैं.
सूत्रों के मुताबिक यह पूरी लड़ाई देश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश को लेकर छिड़ी है, जिसमें पंजाब केसरी, जालंधर समूह हाल में ही दिल्ली समूह की ओर से लखनऊ में लगाई जाने वाली मशीन के फैसले के चलते न्यायालय की शरण में गया है, जिसमें जालंधर समूह का पलड़ा भारी दिखाई दे रहा हैं क्योंकि टाइटल विजय कुमार के नाम है. दिल्ली वाले पंजाब केसरी पर केवल दिल्ली तक का अधिकार ही सीमित है.


