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पंद्रहवें अम्बिका प्रसाद पुरस्‍कार से नवाजे जाएंगे कई पत्रकार एवं साहित्‍यकार

पन्द्रहवां अम्बिका प्रसाद दिव्य पुरस्कार अमेरिका की सुधा ओम ढींगरा की कहानी संग्रह ”कौन सी ज़मीन अपनी” और कनाडा से प्रकाशित पत्रिका ”हिन्दी चेतना” के मुख्य सम्पादक श्री श्याम त्रिपाठी को श्रेष्ठ संपादन हेतु अम्बिका प्रसाद दिव्य रजत अलंकरण प्रदान करने की घोषणा 20 अप्रैल 2012 को भोपाल स्थित, साहित्य सदन में आयोजित एक समारोह में की गई। दिव्य पुरस्कारों के संयोजक एवं प्रसिद्ध रचनाकार जगदीश किंजल्क ने पुरस्कारों की घोषणा करते हुए बताया कि दिल्ली के वेद प्रकाश कंवर के उपन्यास ”सेरीना”, बैरसिया के श्री कैलाश पिचौरी के काव्य संग्रह ”सन्नाटे की सुराही में” को भी अम्बिकाप्रसाद दिव्य पुरस्कार और श्री श्याम त्रिपाठी के साथ आठ और रचनाकारों को अम्बिकाप्रसाद दिव्य रजत अलंकरण प्रदान किए जाएँगे।

पन्द्रहवां अम्बिका प्रसाद दिव्य पुरस्कार अमेरिका की सुधा ओम ढींगरा की कहानी संग्रह ”कौन सी ज़मीन अपनी” और कनाडा से प्रकाशित पत्रिका ”हिन्दी चेतना” के मुख्य सम्पादक श्री श्याम त्रिपाठी को श्रेष्ठ संपादन हेतु अम्बिका प्रसाद दिव्य रजत अलंकरण प्रदान करने की घोषणा 20 अप्रैल 2012 को भोपाल स्थित, साहित्य सदन में आयोजित एक समारोह में की गई। दिव्य पुरस्कारों के संयोजक एवं प्रसिद्ध रचनाकार जगदीश किंजल्क ने पुरस्कारों की घोषणा करते हुए बताया कि दिल्ली के वेद प्रकाश कंवर के उपन्यास ”सेरीना”, बैरसिया के श्री कैलाश पिचौरी के काव्य संग्रह ”सन्नाटे की सुराही में” को भी अम्बिकाप्रसाद दिव्य पुरस्कार और श्री श्याम त्रिपाठी के साथ आठ और रचनाकारों को अम्बिकाप्रसाद दिव्य रजत अलंकरण प्रदान किए जाएँगे।

अम्बिकाप्रसाद दिव्य रजत अलंकरण प्राप्त करने वाले रचनाकार हैं–डॉ. श्रीमती नताशा अरोड़ा ( नोएडा ) के उपन्यास ‘युगांतर’, श्री कुमार शर्मा अनिल (चंडीगढ़) के कहानी संग्रह ‘रिश्ता रोज़ी से’, श्री कुंवर किशोर टंडन (भोपाल) के काव्य संग्रह ‘सुबह से सुबह तक’, श्री राजेन्द्र शर्मा ‘अक्षर’ (भोपाल) के निबंध संग्रह ‘शब्द वैभव’, डॉ. एम. एल. खरे (भोपाल) के व्यंग्य संग्रह ‘मुझ से भला न कोए’, डॉ. अशोक गुजराती (दिल्ली) के बाल साहित्य ‘ख़ुशी के लिए’, श्री संतोष सुपेकर (उज्जैन) के लघुकथा संग्रह ‘बंद आँखों का समाज’, श्रीमती आशमा कौल (फरीदाबाद) के काव्य संग्रह ‘बनाए हैं रास्ते’। श्री जगदीश किंजल्क ने यह भी बताया कि नाटक विधा के लिए उत्कृष्ट कृतियाँ प्राप्त न होने के कारण दिव्य रजत अलंकरण नहीं दिया जा रहा।

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