उरई (जालौन)। जालौन में हिंदी पत्रिकारिता दिवस पर पत्रकारिता से हटकर चर्चायें होती रही और कुछ पत्रकार अपराधियों की महिमा मण्डन करने में लगे रहे और सारी सीमायें लांघ दी। स्वयंभू होकर मीडिया और प्रशासन को अपने ढंग से दबाव में लेने का प्रयास किया ताकि अन्य लोगों को यह संदेश पहुंचे कि हम पत्रिकारता के माध्यम से कितने ताकतवर हैं। बुधवार को विकास भवन सभागार में हिन्दी पत्रिकारता दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें आयोजन करने वालों ने पत्रकारों से हटकर गली कूचों के लोगों को बुलाया तथा पत्रकारों की समस्या को अपने ढंग से रखने का प्रयास किया। जिन लोगों ने इसका आयोजन किया वह पुलिस विभाग के खिलाफ रखा गया था। इस गोष्टी में पत्रकारिता से हटकर अपराधियों की तरफदारी का मुद्दा छाया रहा, जिसमें नेताओं ने पत्रकारों पर तीखी टिप्पणी की जिसे कुछ पत्रकार आसानी से पचा नहीं पाए।
हिन्दी पत्रिकारिता दिवस को वर्ष में एक बार आयोजित किया जाता है, वह भी अपराधियों की भेंट चढ़ गया। कुछ पत्रकारों ने इसे मुद्दा बना लिया वहीं अन्य दलों के बैठे नेताओं ने भी आक्रोश प्रकट किया कि हिन्दी दिवस के मौके पर इन मुद्दों को उछालने का कोई मतलब नहीं है। आज देश के अन्दर राष्ट्रीय भाषा हिन्दी ज्यादा से ज्यादा प्रचलित हो इस पर हिन्दी दिवस पर वार्ता होना चाहिये थी, साथ ही पत्रकारों के मुद्दे उठाये जाने चाहिये थे, वह इस दिवस में नहीं दिखायी पड़े। यह कार्यक्रम मानो प्रायोजित ढंग से निर्धारित था और उन्हीं वक्ताओं को बोलने का मौका दिया गया, जो सिर्फ जी हजूरी में ही विश्वास रखते हैं। कहीं पर भी निष्पक्ष पत्रकारिता को लेकर कोई चर्चा नहीं छिड़ी। गोष्ठी में भी चुनिंदा पत्रकारों को भी अपनी बात कहने का मौका नहीं दिया गया, अगर कहा जाये तो गलत नहीं होगा कि गोष्ठी में पत्रकार कम अख़बार के व्यवसायी ज्यादा नजर आये।
ऐसे में कई नये चेहरे नजर आये जिन्हें इसके पहले कभी भी गोष्ठियों में देखा ही नहीं गया, जबकि पिछले वर्ष हिन्दी दिवस के अवसर पर सपा सांसद घनश्याम अनुरागी ने पत्रकारों के लिये कुछ घोषणा की थी। प्रेस क्लब बनवाये जाने का मुद्दा भी जोरशोर से उठाया गया था, परन्तु इस बार सारे मुद्दे ठंडे बस्ते में पड़े रहे। अपनी टीस भुनाने के लिये जरूर कुछ पत्रकार माइक पकड़े बड़े बोल बोलकर मेजें थपथपाने में ही सन्तुष्ट नजर आये। बता दें कि बुधबार को उरई के विकास भवन में हिंदी पत्रिकारिता दिवस की गोष्टी आयोजित की गयी थी, जिसमें अमर उजाला के व्यूरोचीफ़ अनिल शर्मा पुलिस पर भड़ास निकलते रहे। क्योंकि 6 दिन पूर्व जनपद के पुलिस कप्तान नवनीत कुमार राणा ने ककहरा के पूर्व प्रधान कृष्णपाल सिंह गुर्जर उर्फ़ सुन्नू को शिक्षक शिवकुमार सोनी के अपरहण में लिप्त पाए जाने पर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जिसमें पुलिस कप्तान से अमर उजाला के ब्यूरो का झगड़ा हो गया था। यही कारण रहा कि मुख्य अतिथि के लिए आमंत्रित किये गए पुलिस कप्तान को हिंदी पत्रिकारिता दिवस का आयोजन कराने वाले के ब्यूरोचीफ़ अनिल शर्मा ने बुलाया तक नहीं।


