मथुरा : पत्रकारिता के आयाम आज काफी बदल चुके हैं। वैसे तो चुनौतियां सदैव ही रही हैं, लेकिन अब उनका स्वरूप बदल चुका है। पहले पत्रकारिता का सामना बाहरी चुनौतियों से था लेकिन अब अन्दरूनी चुनौतियां भयावह रूप में सामने हैं। इसलिए सबसे बड़ा संकट अब पत्रकारिता की साख का है। वह बची रहेगी या हमारे अपने आचरण की वजह से डूब जायेगी इस पर चिन्तन किया जाना सबसे ज्यादा प्रासंगिक है। उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार यूनियन द्वारा पत्रकारिता दिवस पर ज्ञानदीप सभागार में ‘पत्रकारिता के बदलते आयाम’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में बोलते हुए वक्ताओं ने व्यक्त किये। मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार मोहन स्वरूप भाटिया ने कहा कि पत्रकारिता के लिए अध्ययन पहली शर्त है। यह केवल किताबों का नहीं बल्कि सम्पूर्ण वातावरण कर करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुरानी संस्कृति से बहुत कुछ ग्रहण किया जा सकता है। उनका मानना था कि पत्रकारिता में टेक्नोलाजी के उपयोग से काफी फायदे हुए हैं अन्यथा पहले कार्यों में काफी समय लगता था। भाषा की परिस्कृतता पर जोर देने के साथ ही उन्होंने प्रचलित शब्दों के इस्तेमाल को भी आवश्यक बताया। श्री भाटिया का मानना था कि पत्रकार अपने मान सम्मान का पूरा ख्याल रखें।
सी-एक्सप्रेस के जिला प्रभारी भारतेन्दु सिंह ने अध्यक्षीय सम्बोधन में कहा कि आज हालात बहुत कठिन हैं, लेकिन फिर भी अपने उद्देश्यों एवं आदर्शों की प्राप्ति को ईमानदारीपूर्वक लगातार प्रयास करते रहना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रशंसा के मायने तब हैं जबकि दूसरे लोग इसे करें। हमें आत्मप्रशंसा व आत्मप्रवंचना से बचना चाहिए। श्रीसिंह ने माना कि सच्ची रिपोर्टिंग करने पर काफी परेशानियों का सामना करना पडता है, लेकिन हमारा उद्देश्य जनहित में सभी कार्य करना है। उन्होंने कहा कि मीडिया का महत्व इसी से प्रदर्शित होता है कि वह वर्तमान में लोकतंत्र के तीनों स्तम्भों की आंखों की किरकिरी बना हुआ है। उन्होंने स्पष्ट रूप से स्वीकारते हुए कहा कि सच लिखने का मद्दा यदि हममें है तो किसी नेता, अधिकारी या धनपति की चाकरी की जरूरत नहीं पड़ेगी।
श्रमजीवी पत्रकार यूनियन मथुरा के सचिव प्रदीप राजपूत का मानना था कि पत्रकारिता के आयामों में काफी बदलाव आया है, किसी समय निष्पक्षता, त्याग, समपर्ण, देशप्रेम, जनहित, नैतिकता, ईमानदारी, साहस व बुद्धिमतता के मूल्यों का समावेश पत्रकारिता में था, लेकिन अब लोभ लालच, ईष्या, द्वेष, पद, पैसा व पावर जैसी बुराइयां व्याप्त होकर घुन की तरह उसे अन्दर से खोखला कर रही हैं। पत्रकारों के सामने अब उनके रोल मॉडल ऐसे लोग बनते जा रहे हैं, जिन्होंने पत्रकारिता का दुरुपयोग कर जल्द से जल्द पैसे व पद हासिल करने में कामयाबी पायी। उन्होंने अब इस बढ़ती कुप्रवृत्ति पर चिन्ता जाहिर करते हुए सोच बदलने की जरूरत पर बल दिया। सम्पादक छोटी से बात महेश रावत ने पत्रकारिता में नैतिक मूल्यों के क्षरण को स्वीकारते हुए कहा कि जिन्हें पत्रकारिता का ज्ञान नहीं, ऐसे लोग इस क्षेत्र में आ गये हैं। यही वजह है कि गलत तरीकों के इस्तेमाल की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिससे नैतिकता छीज रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में पत्रकारिता का बचाये रखना कठिन है। साथ ही गलत लोगों को पत्रकारिता से बाहर रखने की जरूरत पर उन्होंने बल दिया।
वरिष्ठ पत्रकार विवेक दत्त मथुरिया ने कहा कि पत्रकारिता पर बाजार के सरोकार हावी हैं, बाजार द्वारा पत्रकारिता के नये प्रतिमान, मूल्य और मानक गढ़े जा रहे हैं, जिसका सार केवल मुनाफा है। उन्होंने कहा कि रिपोर्टर की हैसियत तो दिहाड़ी मजदूर जैसी है, जबकि सम्पादक खबरों के ठेकेदार बन गये हैं। लीजेण्ड न्यूज के सम्पादक सूरेन्द्र चतुर्वेदी ने आत्म-चिन्तन व आत्मावलोकन की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि हमें सोचना होता कि हम अपनी सही पहचान बना पा रहे हैं अथवा नहीं। श्रीचतुर्वेदी का मानना था कि वर्तमान दौर में पत्रकारिता की बात बेमानी है। ब्रज उपहार के सम्पादक मुकेश अग्रवाल ने अधिकारियों, नेताओं और उद्योगपतियों के दरबारी के रूप में पत्रकारों के आचरण को निन्दनीय बताते हुए कहा कि पत्रकार की निष्ठा पत्रकार के प्रति होती है, हमें ऐसा कोई आचरण नहीं करना चाहिए जिससे निष्पक्षता प्रभावित होती हो।
डा. ओम जी ने कहा कि पत्रकारिता के आयाम तो खत्म हो गये, अब तो यह देखना है कि बाकी क्या बचा है। उन्होंने कहा कि पहले पत्रकार को सम्मान की नजर से देखा जाता था, जबकि आज हेय या भय की दृष्टि से देखा जाता है। आज लेखनी की निष्पक्षता प्रभावित हो चुकी है। कल्पतरु एक्सप्रेस के दिलीप यादव ने माना कि पत्रकारिता के समक्ष आज गम्भीर चुनौतियां हैं और समाज को अच्छे पत्रकार की जरूरत है। उन्होंने पत्रकारों को सलाह दी कि बहुत सी चीजों को समाज पर थोपने से बचें, और यह जानने की कोशिश करें कि समाज उनसे क्या चाहता था। कल्पतरु एक्सप्रेस के ही ए.एन. अनु का मानना था कि पत्रकारिता में नैतिकता, शुचिता व ईमानदारी के मूल्यों का पालन किया जाना चाहिए। दैनिक जागरण के डा. नन्दराम राजपूत ने कहा कि पत्रकारिता के मूल्यों में काफी गिरावट आई है। अब खबरें छुपाने, छापने-दिखाने के पीछे लाभ प्रभावी हो चला है। यही वजह है पत्रकारों और दरबारियों में अंतर करना मुश्किल होता जा रहा है। वरिष्ठ पत्रकार जितेन्द्र शर्मा व डा. धर्मराज का मानना था कि व्यवस्था ऊपर से नीचे की ओर चलती है, यदि खबरो के सौदे होंगे तो नीचे यह कुप्रवृत्ति भयावह असर डालेगी।
गोष्ठी वरिष्ठ पत्रकार सीके उपमन, रामगोपाल चैधरी, महेश शर्मा कल्पतरु एक्सप्रेस, बाबी मिश्रा, यतीश शर्मा, चन्द्रशेखर गौड़,- सी. एक्सप्रेस, दैनिक जागरण-रिंकू वर्मा, कल्पतरु एक्सप्रेस-बबलू शर्मा, आर.टी.आई. एक्टीविस्ट उमाशंकर शर्मा, चन्द्रप्रकाश ब्रजवासी दैनिक जागरण, विक्रम सैनी डीएलए, वंशीधर बंसल मीडिया मंच, अरविन्द शर्मा, भानुप्रकाश शर्मा अग्रभारत, मफतलाल अग्रवाल-विषवाण, जगदीशचन्द्र गोयल, संजय शर्मा, दीपचन्द दीप, मून टीवी, सौरभ वार्ष्णेय समय जगत, गोपाल शर्मा दाता संदेश, सुभाष सैनी ब्रजउपहार, खलील अहमद कृष्णवीर सिंह शाह टाइम्स, कुन्दनसिंह राघव-डीएलए, गुलशनकुमार गुप्ता, राजेश गुप्ता-सी एक्सप्रेस आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये। धन्यवाद ज्ञापन श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के अध्यक्ष मनवीर सिंह चौहान नवभारत टाइम्स द्वारा दिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतेन्दु सिंह व संचालन दीपक गोस्वामी द्वारा किया गया।


