गाजीपुर : विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हुई इलेक्ट्रानिक मीडिया एसोसिएशन की बैठक में गुरुवार को वक्ताओं ने कहा कि अपने दर्शकों तक खबरों को पहुंचाने के लिए कई बार पत्रकारों को अपनी जान पर खेलना पड़ता है। वर्ष 2011 में ही विश्व के 64 पत्रकार अपनी जान गवां चुके हैं, जिसमें देश के दो वरिष्ठ पत्रकार भी शामिल हैं। ऐसे में पत्रकारों की चुनौतियां बढ़ जाती है। सिटी रेलवे स्टेशन मार्ग पर स्थित एक निजी चैलन के कार्यालय में आयोजित इस बैठक में वक्ताओं ने कहा कि आजादी के बाद से पत्रकारों के दमन और उत्पीड़न का क्रम शुरू हुआ था जो अब भी जारी है। वर्ष 2011 तक के आंकडों की माने तो विश्व के 179 पत्रकार अब भी जेलों में हैं, हालांकि देश का कोई पत्रकार जेल में नहीं है। वक्ताओं ने कहा कि मौजूदा समय में माफियाओं के बढ़ते हस्तक्षेप, तस्करों और भू माफियाओं की सक्रियता, नक्सल कार्रवाईयां में आई तेजी के बाद पत्रकारों की चुनौतिया व चिंताएं बढ़ गई है।
वक्ताओं ने इस मौके पर शपथ लिया कि परिस्थितियां जैसी भी हों विश्वसनीय और पारदर्शी पत्रकारिता के मानक पर आंच नही आने दिया जाएगा। बैठक में बताया गया कि इलेक्ट्रानिक मीडिया एसोसिएशन की सदस्यता का कार्य जनपद में दो माह से चल रहा है। जनपदीय संगठन के पदाधिकारियों का चयन भी कर लिया गया है। जिसकी घोषणा मई माह में कर दी जाएगी। इस मौके पर प्रिंट और अन्य मीडिया से जुडे लोगों का आह्वान किया गया कि बदलते समाज की नई आवाज बनकर अपने कर्तव्य का पालन करें। बैठक को मनीष मिश्रा, सुनील कुमार, आशुतोष सिंह, शिवम पाण्डेय, कमलेश राय, अश्वनी राय, अंजनी तिवारी, संजीव कुमार, सोनू, मेराज अहमद आदि ने सम्बोधित किया। अध्यक्षता राकेश पाण्डेय व संचालन कृपा कृष्ण ‘केके’ ने किया।


