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पत्रकार संगठनों पर मठाधीश हावी

शाहजहाँपुर। उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन में एक बार फिर मठाधीश हावी होने के लिए रणनीति बना रहे हैं। पत्रकारों के बीच चुनाव से परहेज करने वाले यह मठाधीश चुपचाप अपने ही बीच के लोगों को अध्यक्ष व महामंत्री घोषित कर देते हैं। इस बात से पत्रकारों में रोष है। पत्रकारों ने उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष से विधिवत प्रक्रिया से चुनाव कराने की मांग की है। इसके साथ प्रेस क्लब का भी चुनाव करने की मांग की गई है।

शाहजहाँपुर। उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन में एक बार फिर मठाधीश हावी होने के लिए रणनीति बना रहे हैं। पत्रकारों के बीच चुनाव से परहेज करने वाले यह मठाधीश चुपचाप अपने ही बीच के लोगों को अध्यक्ष व महामंत्री घोषित कर देते हैं। इस बात से पत्रकारों में रोष है। पत्रकारों ने उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष से विधिवत प्रक्रिया से चुनाव कराने की मांग की है। इसके साथ प्रेस क्लब का भी चुनाव करने की मांग की गई है।

 

बता दें कि शाहजहांपुर में कई साल से उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन का चुनाव नहीं हुआ है। प्रेस क्लब शाहजहांपुर का चुनाव भी 2007 के बाद नहीं हुआ। गत दिवस शहर के एक होटल में मठाधीशों की बैठक हुई। इसमें गुपचुप ढंग से अध्यक्ष व महामंत्री चुनने की रणनीति तय की गई। यही नाम यहां से लखनऊ भेज दिए जाएंगे। इस तरह की प्रक्रिया अपनाकर मठाधीश कई दशक से संगठन के पदों पर अपना कब्जा जमाए बैठे हैं। इन पदाधिकारियों को पत्रकारों की समस्याओं से कभी कोई लेना देना नहीं रहता। पद का दुरुपयोग चंदाखोरी या प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए किया जाता है। पत्रकारों को यह पता चलता है कि फलां पत्रकार संगठन का पदाधिकारी चुन लिया गया। कभी चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने का पत्रकारों को मौका ही नहीं मिलता।

इस बाद ग्रामीण, तहसील व जिला स्तर के पत्रकार मठाधीशी प्रक्रिया के खिलाफ हैं। पत्रकारों ने मांग की है कि चुनाव प्रदेश पदाधिकारीयो की देखरेख में संपन्न कराए जाएं। जिससे चुना हुआ पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारी को समझे और पत्रकारों की समस्याओं में उनके साथ रहे। राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर पर संगठन के पदाधिकारियों की बैठक व सम्मेलनों में कहा जाता है कि संस्था शुल्क जमा कराकर हर साल विधिवत ढंग से चुनाव कराए जाएं। लेकिन कभी भी इन निर्देशों का पालन नहीं होता है। बता दें कि इस जिले में करीब आधा दर्जन ऐसे मठाधीश हैं जो कई दशक से संगठन के पदों पर काबिज हैं। वह चुनाव चाहें उपजा के हों या प्रेस क्लब का। प्रेस क्लब का चुनाव भी 2006 में हुआ था। मतलब यहां पत्रकारों के जो भी संगठन हैं, उन पर वही गिनेचुने मठाधीश ही चुने जाते हैं। जिसकी वजह से युवा पत्रकारों को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिलता है। मठाधीश पदाधिकारी सिर्फ चंदा बसूली और दलाली में ही लिप्त रहते हैं। पत्रकारो की हक की लडाई लडने के समय यह मठाधीश कही भी दिखाई नही देते है।

सौरभ दीक्षित की रिपोर्ट. संपर्क- 9450438752

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