: 5 जून पर्यावरण दिवस पर विशेष : आम, महुआ, आंवला, कटहल के फलदार वृक्षों वाले बगीचों के बीचोबीच अचानक काले जहर उगलते ईंट-भट्ठों की मौजूदगी न सिर्फ चौंकाने वाली है, बल्कि चिंतित भी करती है कि काली कमाई का लालच किस कदर कुछ लोगों को स्वार्थ में धृतराष्ट्र सरीखे अंधा बना देती है। खासकर, वह जो इस पांच किमी इलाके के ईंट-भट्ठा संचालक हैं और वो घूंसखोर सरकारी अफसर भी जो चांदी का जूता (रिश्वत) खाकर कुछ भी करने को हमेशा तैयार रहते हैं।
इलाहाबाद जिला मुख्यालय से करीब पच्चीस किमी पश्चिम लखनऊ-इलाहाबाद राजमार्ग से गुजरते हुए अगल-बगल हरे-भरे बाग-बगीचों की हरियाली
तबीयत खुश करने लगती है पर यह प्रसन्नता ज्यादा देर तक नहीं टिक पाती। इलाहाबाद से नवाबगंज के आगे लखनऊ की तरफ थोड़ा आगे बढ़ते ही जो दृष्य सामने आता है, वह किसी भी पर्यावरण प्रेमी का मन खट्टा कर देता है। ईंट-भट्ठों की चिमनियों से दिनरात निकलने वाला काला जहरीला धुंआ यहां के पच्चीस हजार वाशिंदों की जिंदगी ’धुंआ‘ कर उनके जीवन को लील रहा है। घने बाग-बगीचों के फलदार वृक्ष सूखने लगे हैं। आम के फल काले पड़ने लगे हैं। कृषि बाहुल्य इस क्षेत्र में फसलों की भी उपज तेजी से घट रही है। इससे भी बड़ी चिंता इस बात की है कि जहरीले धुंए का गुबार लोगों में सांस से जुड़ी बीमारियां बांट रहा है। ईंट-भट्ठों की लंबी श्रृंखला लालगोपालगंज, भगौतीपुर, मंसूराबाद, श्रृंगवेरपुर इलाके में देखी जा सकती है। दर्जनों की तादाद में यहां की घनी अमराइयों के बीचोबीच धड़ल्ले से चलने वाले इन ईंट-भट्ठों के चलाने का लाइसेंस किन अधिकारियों ने बगैर स्थलीय निरीक्षण के दे दिया, यह जांच का विषय हो सकता है। पर्यावरण प्रदूषण से संबंधित अफसरों की अनदेखी चौंकाने वाली है।
बताया जा रहा है कि पड़ोसी जिले प्रतापगढ़ में बेंती राजघराने के कुंवर रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया की तरफ से कोर्ट में याचिका दायर कर बढ़ते प्रदूषण और उससे होने वाले नुकसान का हवाला दिया गया था। कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेकर यहां से दर्जनों ईंट-भट्ठों को हटवा दिया था। यह वही राजा भैया हैं, जो कुंडा से विधायक बनने के बाद इन दिनों प्रदेश के
कारागार मंत्री हैं। कुंडा इलाके से भगाए गए ईंट-भट्ठा संचालकों ने सीमावर्ती इलाहाबाद जिले के इन इलाके में वर्चस्व कायम कर लिया। पांच जून को पर्यावरण दिवस है। इस मौके पर गोष्ठियां, बैठकों समेत देशभर में कई आयोजन होंगे। बड़े-बड़े संकल्प लिए जाएंगे। सो, इस तल्ख सच्चाई पर भी एक निगाह। हो सके तो इस नर्क से यहां के हजारों लोगों की जिंदगी बचा लीजिए हुजूर।
लेखक शिवाशंकर पांडेय इलाहाबाद के वरिष्ठ पत्रकार हैं. हिंदुस्तान, अमर उजाला, दैनिक जागरण समेत कई संस्थानों को अपनी सेवाएं दे चुके हैं.


