मुंबई : भारत-पाकिस्तान के पत्रकारों को अब नफरत के खेल में शामिल नहीं होना चाहिए. दोनों देशों के रिश्ते सुधारने में मीडिया बडी भूमिका अदा कर सकता है. हमने यह भूमिका निभानी शुरु भी कर दी है. यह कहना है कराची प्रेस क्लब के अध्यक्ष ताहिर हसन खान का. मुंबई दौरे पर आए पाकिस्तानी पत्रकारों के दल का नेतृत्व कर रहे खान ने मंगलवार को मुंबई प्रेस क्लब में आयोजित परिचर्चा में यह बात कही.
उन्होंने कहा कि हमें एक दूसरे के देश में आने जाने के लिए वीजा मिलने में बहुत परेशानी होती है. वीजा आसानी से मिलना चाहिए. हमारा आना-जाना बढेगा तो हम एक दूसरे के करीब आऐंगे. उन्होंने कहा कि हम भी आप की तरह कपड़े पहनते हैं. आप की तरह बोलते हैं और आप की तरह ही मोहब्बत करते हैं. इसके बावजूद हमारे बीच में काफी गलतफहमीया हैं. पाकिस्तान इंस्टीच्यूट ऑफ लेबर एजुकेशन के कार्यकारी निदेशक करामत अली ने कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच होने पर मीडिया ऐसी
तस्वीर बनाती है, जैसे दो दुश्मनों के बीच युद्ध होने वाला है. उन्होंने दोनों देशों के पत्रकारों से अपील की कि वे इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करने से बचे. अली ने कहा कि दोनों देशों के बीच सफर आसान करना जरुरी है. इससे लिए वीजा मिलने की प्रक्रिया आसान की जानी चाहिए. हमारे बीच एक दूसरे के बारे में काफी गलतफहमिया है. जिसकी वजह से हमारे संबध असामान्य बन गए हैं.
जंग मिडिया ग्रुप के वरिष्ठ पत्रकार फाजिल जामिली ने कहा कि पाकिस्तान में भी नई पीढि की सोच बदल रही है. क्रिकेट वल्र्डकप में यदि भारत-पाकिस्तान आमने सामने नहीं हैं तो पाकिस्तान के युवा हिंदुस्तान की ही समर्थन करते हैं. उन्होंने कहा कि आतंकवाद का शिकार पाकिस्तान का हर शहर है. पर अब वहां की मिडिया में यह खबरे नहीं आती कि इस विस्फोट में इंडिया का हाथ है. जियो न्यूज के अकबर अली ने कहा कि दोनों देशों के लोगों के जेहन में एक दूसरे को लेकर काफी सवालात हैं. हम एक दूसरे तक अपनी बात पहुचाने के लिए सोशल नेटवर्किंग साईट का भी उपयोग कर सकते हैं. पाकिस्तान के कराची व हैदराबाद से आए ये 17 पाकिस्तानी पत्रकार 28 मई तक मुंबई व पुणे में रहेंगे. इस दौरान महाराष्ट्र के मु�यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण सहित कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करेंगे.
मुंबई से विजय सिंह ‘कौशिक’ की रिपोर्ट.


