जिस खेल को सपा ने दस दिन पहले शुरू किया था, बसपा ने आज उसी में सपा की पूर्णाहुति देकर खत्म कर दिया। विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन समाजवादी पार्टी के एक साथ छह विधायकों को बसपा ने अपने पाले में करते हुए उन्हें पार्टी की सदस्यता दिला दी। हैरत की बात तो यह है कि यह सभी विधायक अब तक समाजवादी पार्टी और मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी माने जाते रहे हैं। सौ सुनार की और एक लोहार की तर्ज पर हुए इस बसपाई हमले से सपा मुख्यालय में मौत का सा सन्नाटा छा गया है।
दरअसल इस खेल की शुरूआत खुद सपा से ही हुई थी। अभी करीब दो हफ्ता पहले ही सपा ने बसपा का किला ढहाने के अंदाज में अंबेदकरनगर से बसपा के विधायक शेर बहादुर सिंह को समाजवादी पार्टी में शामिल करा लिया था। सपा ने तब पूरे जश्न के माहौल में दावा किया था कि इस पाला बदल से बसपा की जमीनी हकीकत का खुलासा हो गया है। यह दावा वाजिब भी लग रहा था। वजह यह कि अंबेदरकर नगर से मायावती सांसद भी रह चुकी हैं और यह इलाका उनकी प्रतिष्ठा का प्रश्न माना जाता है। प्रदेश सरकार के तीन कद्दावर नेता भी इसी जिले से हैं। इसके बाद से ही दोनों ही दल एक दूसरे में सेंध लगाने में जुट गये थे। मायावती ने सपा के छिटपुट विधायकों को बसपा में शामिल कराया तो सपा ने भी यही रणनीति अपनायी। लेकिन यह अब तक छापामार गुरिल्ला शैली में चलता रहा।
आज इस झगडे़ ने तब निर्णायक मोड़ लेते हुए बसपा के सिर पर विजय की कलंगी लगा दी, जब सपा के छह विधायक एक साथ मुलायम का पाला छोड़ कर मायावती की शरण में आ गये। जाहिर है कि इसके बाद ही बसपा ने दावा कर दिया कि समाजवादी पार्टी की जन विरोधी नीतियों और परिवारवाद से त्रस्त होकर यह विधायक बसपा की शरण में प्रदेश के एक नयी दिशा और दशा देने के मकसद से आये हैं। बसपा में आये सपाई विधायकों में सर्वेश सिंह सीपू, सगड़ी, आजमगढ़; सुल्तान बेग, कांवर बरेली; अशोक कुमार सिंह चन्देल हमीरपुर, सन्दीप अग्रवाल मुरादाबाद; सुन्दर लाल लोधी हड़हा, उन्नाव और सूरज सिंह शाक्य सकीट, एटा शामिल हैं।
हालांकि इन विधायकों के शपथ ग्रहण के मौके पर मायावती ने अपनी मौजूदगी नहीं जतायी, जबकि बसपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य तथा कैबिनेट मंत्री लालजी प्रसाद वर्मा और नसीमुददीन सिद्दीकी मौके पर मौजूद थे। खास बात यह भी है कि अपने विधायकों के सपा में जाने पर बसपा ने तो फौरन ऐतराज जताते हुए सपा की इस हरकत को लोकतंत के लिए घातक व जहरीला बताते हुए पाला बदलने वाले विधायकों को बर्खास्त करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को खत लिख दिया था, जबकि आज जब अपने खेमे में सपा विधायक आये तो बसपा ने इस पर चुप्पी ही साध ली।
बहरहाल, बहुजन समाज पार्टी में शामिल होने के अवसर पर इन विधायकों ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने उन्हें घुटन महसूस हो रही थी। सपा में भाई-भतीजावाद, परिवारवाद के वर्चस्व के चलते विधायकों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है, इससे आजिज आकर हम लोगों ने बहुजन समाज पार्टी ज्वाइन करने का निर्णय लिया। इन लोगों का यह भी कहना था कि समाजवादी पार्टी को दलितों, पिछड़ों एवं अल्पसंख्यकों तथा समाज के कमजोर वर्गों से कोई लेना देना नहीं है। विधायकों ने यह भी कहा है कि मुख्यमंत्री मायावती ही सर्वसमाज की सच्ची हितैषी हैं। विधायकों ने कहा कि बहुजन समाज पार्टी ही देश की ऐसी इकलौती पार्टी है, जिसने सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय के सिद्धान्त पर चलते हुए समाज के सभी वर्गों का पूरा-पूरा ध्यान रखा है। इन विधायकों ने कहा कि सपा की नीतियों एवं कार्यक्रमों को लेकर सपा विधायकों में भारी असन्तोष है, जिसकी वजह से सपा से भारी संख्या में लोग बसपा में शामिल होना चाहते हैं।
वरिष्ठ पत्रकार कुमार सौवीर की रिपोर्ट.


