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प्रशांत भूषण से किनारा कर सकते है अन्ना, दिग्गी के अभियान को भी लगा झटका

कश्मीर जैसे संवेदनशील मसले पर आम भारतीय को चोट पहुंचाने वाले प्रशांत भूषण के बयान ने अन्ना हजारे की चिंता बढ़ा दी है। मिली जानकारी के अनुसार अन्ना हजारे प्रशांत भूषण से किनारा कर सकते है। अन्ना ने इस ब्यान को गंभीरता से लिया है, क्योंकि इससे आम भारतीयों में अन्ना हजारे की क्रेडिबिलिटी का सवाल उठने की संभावना बतायी जा रही है। हालांकि प्रशांत भूषण की टिप्पणी और उसके बाद उनकी हुई पिटाई से अन्ना हजारे की टीम को एक तत्कालिक फायदा मिला है। दिग्गी राजा के उस अभियान को झटका लगा है जिसमें लगातार वो आरोप लगा रहे है कि अन्ना संघ के कहने पर चल रहे हैं। प्रशांत भूषण की संघ विचारधारा से जुड़े लोगों की पिटाई के बाद दिग्गी राजा को अब आगे कहने में भारी मुश्किल आएगी कि टीम अन्ना के पीछे संघ परिवार है।

कश्मीर जैसे संवेदनशील मसले पर आम भारतीय को चोट पहुंचाने वाले प्रशांत भूषण के बयान ने अन्ना हजारे की चिंता बढ़ा दी है। मिली जानकारी के अनुसार अन्ना हजारे प्रशांत भूषण से किनारा कर सकते है। अन्ना ने इस ब्यान को गंभीरता से लिया है, क्योंकि इससे आम भारतीयों में अन्ना हजारे की क्रेडिबिलिटी का सवाल उठने की संभावना बतायी जा रही है। हालांकि प्रशांत भूषण की टिप्पणी और उसके बाद उनकी हुई पिटाई से अन्ना हजारे की टीम को एक तत्कालिक फायदा मिला है। दिग्गी राजा के उस अभियान को झटका लगा है जिसमें लगातार वो आरोप लगा रहे है कि अन्ना संघ के कहने पर चल रहे हैं। प्रशांत भूषण की संघ विचारधारा से जुड़े लोगों की पिटाई के बाद दिग्गी राजा को अब आगे कहने में भारी मुश्किल आएगी कि टीम अन्ना के पीछे संघ परिवार है।

मिली जानकारी के अनुसार अन्ना हजारे ने अरविंद केजरीवाल को इसी कारण महाराष्ट्र बुलाया है। दरअसल प्रशांत भूषण की क्रेडिबिलिटी पर पहले से ही सवाल उठ रहा है। पहले ही इलाहाबाद में एक जमीन की रजिस्ट्री के मामले में प्रशांत भूषण और उऩके पिता शांतिभूषण पर सवाल उठ चुके हैं। हालांकि उस समय यह मामला इतना तूल नहीं पकड़ा और मामला दब गया। लेकिन कश्मीर का मसला आम भारतीयों के सेंटिमेंट से जुड़ा है। इसलिए इस बयान के बाद अन्ना को भारी झटका लगा है। क्योंकि आम भारतीयों के बीच अन्ना हजारे की तुलना गांधी से की जा रही है। वैसे में अगर टीम अन्ना का एक सदस्य पूरी तरह से अलगाववादियों की भाषा में बात करे, यह अन्ना के लिए चिंता की बात हो गई है। कम से कम हिंदी हार्टलैंड और अन्ना के गृह राज्य में ही इसे बरदाश्त नहीं किया जाएगा। बताया जाता है कि अन्ना ने खुद 1965 की लड़ाई में हिस्सा लिया और उनके कार्यक्रमों में भारत माता की जय के नारे लगते है। अगर इस भारत माता की जय के नारे के बीच कश्मीर में जनमत संग्रह की बात टीम अन्ना के एक सदस्य करें, जिसे न तो कांग्रेस ने मंजूर किया न अन्य दलों ने तो इससे अन्ना की साख पर भारी धक्का लगेगा।

हालांकि प्रशांत भूषण की पिटाई ने टीम अन्ना को एक फ्रंट पर राहत दे दी है। पिटाई करने वाले ज्यादातर लोग संघ की विचारधारा से जुड़े हैं और श्रीराम सेना के सदस्य बताए जा रहे हैं। पटियाला हाउस अदालत में भी वीरवार को अन्ना समर्थकों की पिटाई करने वाले लोग ज्यादातर भगवा ड्रेस में थे। इससे दिग्गविजय सिंह के उस अभियान को झटका लगा है, जिसमें वे लगातार टीम अन्ना संघ के गठजोड़ को साबित करने के प्रयास में थे। उन्होंने संघ द्वारा टीम अन्ना को लिखी दो चिट्ठियों को जारी कर यह साबित करने की कोशिश की थी कि टीम अन्ना के बीच संघ है। लेकिन वे टीम अन्ना की कोई चिट्ठी अभी तक जारी करने में विफल रहे हैं, जिसमें टीम अन्ना ने संघ से कोई सहायता मांगी हो। अब संघ विचारधारा के लोगों के हाथ प्रशांत भूषण के पिटने के बाद टीम अन्ना के सदस्य खुद कह रहे हैं कि प्रशांत भूषण की पिटाई के बाद यह साबित हो गया है कि संघ की कोई सहानभूति टीम अन्ना के साथ नहीं है।

वैसे कांग्रेस की पूरी कोशिश रही है कि टीम अन्ना को संघ परिवार से जोड़ दिया जाए। संघ परिवार भी समय-समय पर अपनी कोशिश कर यह जताने में कोताही नहीं बरत रहा है कि टीम अन्ना को उन्होंने भरपूर समर्थन दिया। हालांकि यह कह संघ परिवार कांग्रेस के बिछाए जाल में फंसती नजर आयी और इससे संघ और भाजपा को लाभ के बजाए नुकसान हुआ है। संघ परिवार ने ही बाबा रामदेव का नुकसान किया और दिग्गी राज ने काफी चालाकी से बाबा रामदेव और संघ को एक साथ बता दिया। इससे बाबा रामदेव के साथ जुड़ने वाला आम जनमानस थोड़ा दूर हो गया। लेकिन अभी तक टीम अन्ना ने चालाकी से संघ परिवार से दूरी बना रखी है और अपने मंच से संघ परिवार को दूर रखा। साथ ही गांधी टोपी के प्रचार को मजबूत कर संघ की काली टोपी को भी नुकसान पहुंचाया। इसके बावजूद कांग्रेस का खेल जारी है। लेकिन श्रीराम सेना की कार्रवाई ने कांग्रेस की सारी योजना को फिलहाल बाधित किया है।

लेखक संजीव पांडेय पत्रकार हैं.

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