हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने ऊना जिला मुख्यालय में आयोजित एक समारोह में हिमाचल साहित्य अकादमी से सम्मानित साहित्यकार गुरमीत बेदी के व्यंग्य संग्रह ‘खबरदार जो व्यंग्य लिखा’ का विमोचन किया। इस संग्रह की भूमिका देश के तीन शीर्षस्थ व्यंग्यकारों- गोपाल चतुर्वेदी, प्रेम जनमेजय और सुभाष चन्द्र ने लिखी है और दिल्ली के एक प्रमुख प्रकाशन संस्थान ने इसका प्रकाशन किया है। इस व्यंग्य संग्रह में गुरमीत बेदी के 78 व्यंग्य लेख संग्रहित हैं जो देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित व चर्चित हो चुके हैं।
पुस्तक की भूमिका में देश के शीर्षस्थ व्यंग्यकार गोपाल चतुर्वेदी ने लिखा है- ‘गुरमीत के लेखन में मुझे जो सबसे अधिक प्रभावित करता है, वह है इनका व्यंग्य का अनूठा अंदाज। इसमें न परसाई की पाठशाला का प्रभाव है, न जोशी मठ का। यह तथ्य अपने आप में सामान्य व्यंग्यकारों से गुरमीत को अलग करता है। गुरमीत ने अपनी शैली और भाषा स्वयं विकसित की है और व्यंग्य के बारे में ही नहीं, जीवन के विषय में भी काफी अध्ययन किया है। इनकी भाषा में धार है, प्रवाह है और विषमताओं के प्रति चुप न बैठने की लगन। उनका व्यंग्य सार्थक है और उनकी व्यंग्य दृष्टि को उजागर करता है।’
प्रतिष्ठित व्यंग्यकार प्रेम जनमेजय ने इस व्यंग्य संग्रह पर अपनी टिप्पणी दर्ज करते हुए लिखा है- ‘गुरमीत बेदी दांतों के बीच जिह्ना समान व्यवस्था के बीच रहते हुए भी अपनी जिह्ना को लोकतांत्रिक प्रहार से युक्त किए हुए हैं… व्यवस्थागत विसंगतियों के विरुद्ध खतरनाक व्यंग्य लिखने का उनका साहस मंद नहीं पड़ा है। उनकी इस जिद्द का परिणाम है- उनका यह ताजा संकलन।’ इसी संग्रह पर जाने माने व्यंग्यकार सुभाष चन्द्र ने अपनी टिप्पणी में लिखा है- ‘गुरमीत बेदी व्यंग्य में हास्य के मिश्रण के पक्षधर हैं। उनका व्यंग्य हंसते-हंसते व्यवस्था को जिस्म में नश्तर चुभाने का कार्य करता है। यूं तो बेदी ने जीवन के हर क्षेत्र के विद्रूपों पर शरसंधन किया है पर राजनीतिक, प्रशासनिक और साहित्यिक विसंगतियों पर उनकी प्रहारात्मकता देखते ही बनती है। ऐसी रचनाओं में उनके व्यंग्य का जादू सिर चढ़कर बोलता है।’
विमोचन समारोह में मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि गुरमीत बेदी ने अपने साहित्यिक लेखन से समूचे उत्तरी भारत में अपनी पहचान बनाई है और प्रदेश का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्य निष्पादन में भी गुरमीत बेदी ने विशिष्ट छाप छोड़ी है और अपनी रचनाओं से भी उन्होंने साहित्य को समृद्ध किया है। उन्होंने कहा कि व्यंग्य साहित्य की एक कठिन लेकिन लोकप्रिय विधा है और गुरमीत बेदी के पास एक सधा हुआ व्यंग्य कौशल है जिस में हास्य का पुट और शालीन विनोद दोनों शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दी गद्य व्यंग्य लेखन में जिन व्यंग्यकारों ने इस महत्वपूर्ण व कठिन विधा को निरंतर प्रयोगशील व सार्थक बनाया है, उनमें गुरमीत बेदी एक अत्यन्त विश्वसनीय व पठनीय नाम है। उन्होंने गुरमीत बेदी को इस पुस्तक के लेखन के लिए बधाई दी और आशा व्यक्त की कि वह भविष्य में भी साहित्य जगत को अपनी रचनाओं से समृद्ध करते रहेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश का नैसर्गिक सौंदर्य व शांत माहौल हमेशा से ही लेखकों व कलाकारों को आकर्षित करता आया है और यहां के साहित्यकारों ने साहित्य जगत को कई कालजई रचनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार साहित्य व संस्कृति के सरंक्षण व संवर्धन के लिए अनेक योजनाएं क्रियान्वित कर रही है और उत्कृष्ट साहित्यिक कृतियों पर सरकार द्वारा पुरस्कार भी प्रदान किए जाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण कहलाता है और साहित्यकारों की रचनाएं समाज को नई दिशा देती हैं।
इस अवसर पर बोलते हुए मुख्य संसदीय सचिव सतपाल सिंह सत्ती ने कहा कि सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और विचारात्मक व्यंग्यों से भरपूर गुरमीत बेदी का यह व्यंग्य संकलन उनकी शुद्ध सात्विक व्यंग्य चेतना का परिचायक है। उन्होंने कहा कि शिष्टता, शालीनता, विनम्रता और सांस्कृतिक चेतना का संस्पर्श गुरमीत की रचनाओं में बराबर मिलता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक विसंगतियों को उजागर करने और उन पर प्रहार करने में व्यंग्यकार एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
‘इसलिए हम हंसते हैं’ और ‘नाक का सवाल’ व्यंग्य संग्रहों के बाद गुरमीत बेदी की व्यंग्य की यह तीसरी पुस्तक है। उनकी कविता, कहानी व शोध की एक-एक पुस्तक के अलावा तीन उपन्यास धारावाहिक रूप से प्रकाशित हो चुके हैं। उनके दूसरे व्यंग्य संग्रह नाक को सवाल को कनाडा की विरसा संस्था पुरस्कृत कर चुकी है। बेदी को कविता संग्रह- मौसम का तकाजा के लिए 1994 में हिमाचल साहित्य अकादमी का अवार्ड भी मिल चुका है। गुरमीत बेदी के व्यंग्य लेखों का अनुवाद पंजाबी, तेलगू, मराठी व गुजराती भाषा सहित कई भाषाओं में हो चुका है। बेदी के कविता व कहानी संग्रहों पर दो विद्यार्थी हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से एम.फिल भी कर चुके हैं। गुरमीत बेदी हिमाचल प्रदेश के ऊना जिला में जिला लोक संपर्क अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।
विमोचन समारोह में, मुख्य संसदीय सचिव वीरेन्द्र कंवर, गगरेट के विधायक प्रवीण शर्मा, प्रदेश जल प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष प्रवीण शर्मा, डीसी के.आर. भारती सहित अनेक साहित्यकार, लेखक , रंगकर्मी व बुद्धिजीवी उपस्थित थे। पुस्तक का प्रकाशन ‘भावना प्रकाशन , 109-ए, पटपड़गंज, दिल्ली- 110091’ ने किया है। आकर्षक छपाईयुक्त 192 पृष्ठ की इस पुस्तक का मूल्य 300 रूपए है।


